Archive for: June, 2009

“आज तक” की गर्दन पर सवार “इंडिया टीवी”

चुनाव बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि इंडिया टीवी बहुत जल्द आज तक को पीट देगा। लंबे समय से बिना किसी उठापटक के नंबर वन की कुर्सी पर विराजमान आज तक की बादशाहत डगमगाने लगी है। हालांकि टैम की रेटिंग के मुताबिक आज तक अब भी नंबर वन और इंडिया टीवी नंबर दो। [...]

वोट से पहले मीडिया में खेला गया नोट का खेल

दिल्ली सरकार ने चुनाव पूर्व मीडिया के लिए खजाना खोल दिया था। दस साल में विज्ञापन राशि तीस गुना से ज्यादा बढ़ गई है। चार साल में गैर-समाचार पत्र प्रचार माध्यमों में विज्ञापन के मद में खर्च सौ गुना से ज्यादा बढ़ गया है। केन्द्र सरकार ने भी चुनाव के पहले के महीनों में मीडिया [...]

“एसपी” के बहाने मीडिया – कल, आज और कल

27 जून करीब है। ये वही दिन है जब 12 साल पहले सुरेंद्र प्रताप सिंह यानी सबके प्यारे एसपी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके जाने के बाद के इन 12 वर्षों में मीडिया का चाल, चरित्र और चेहरा बहुत कुछ बदला है। लिखने और बोलने की आज़ादी पर कई नई बेड़ियां डली [...]

हरीश खरे ने कार्यभार संभाला

वरिष्ठ पत्रकार हरीश खरे ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार का कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले हरीश खरे द हिंदू के चीफ ऑफ ब्यूरो और सीनियर एसोसिएट एडिटर के पद पर काम चुके हैं। इसके अलावा वो टाइम्स ऑफ इंडिया अहमदाबाद के संपादक और हिंदुस्तान टाइम्स के वरिष्ठ संपादक का ओहदा संभाल [...]

आरटीआई के दायरे में हों मीडिया संस्थान

मीडिया को सूचना अधिकार के दायरे में लाया जाए या नहीं – ये बहस तेज हो रही है। कुछ समय पहले अरुंधति रॉय से बात हुई तो उन्होंने मीडिया को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाने की बात कही। मीडिया संस्थानों को मिलने वाले पैसे का पूरा हिसाब देने की मांग की। वो [...]

जागरण में ये ख़बर किसने “प्लांट” की?

दैनिक जागरण में 18 जून को एक ख़बर छपी। उसका शीर्षक दिया गया… “उपभोक्ता कर रहे हैं एमटीएनएल फोन व इंटरनेट से तौबा”। अब आप इस हेडिंग को पढ़ कर क्या सोचेंगे। यही न कि उसमें कुछ ऐसे उपभोक्ताओं से बात होगी जो एमटीएनएल का कनेक्शन लेने के बाद से परेशान हो गए हैं। ऐसे [...]

दिल्ली के पत्रकार को जान से मारने की धमकी

दिल्ली के पत्रकार अरबिंद गोस्वामी को जान से मारने की धमकी दी गई है। अरबिंद मुंबई से छपने वाली पत्रिका “युवा” में काम करते थे और उन्हें धमकी उस कंपनी के मालिक और उसके दो साथियों ने दी। इस बारे में अरबिंद ने दिल्ली के बाराखंबा रोड पुलिस थाने में अपनी शिकायत भी दर्ज कराई। [...]

क्या कंधों पर कुछ बोझ महसूस हो रहा है?

शैलेंद्र सिंह की असमय मौत से उठे सवाल ने हर किसी को बेचैन कर दिया है। यही वजह है कि जनतंत्र की अपील के बाद कई लोग अपने दिल की बात लिख रहे हैं। बस उन सबकी गुजारिश यही है कि उनका नाम जाहिर न हो। हमें भी मुद्दे से मतलब है, किसी के नाम [...]

मीडिया के साथियों से एक अपील

जहां सौ-दो सौ लोग काम करते हैं, वहां थोड़ा टकराव तो ज़रूर होता है। ख़बरों पर तीखी बहस होती है। किसी की लापरवाही से ख़बर समय पर नहीं चले तो झगड़ा भी होता है। हम सबने ने ऐसे झगड़े कई बार किये हैं और बहसें भी खूब की हैं। लेकिन किसी को भी (किसी को [...]

शैलेंद्र जाते-जाते हमें सोचने को मजबूर कर गए हैं

((पत्रकार शैलेंद्र के निधन से आहत एक शख़्स ने शुक्रवार शाम जनतंत्र के ई-मेल पर एक ख़त भेजा। ख़त भेजने वाले को मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं। मैंने फोन करके पूछा कि क्या ये ख़त जनतंत्र पर छाप दूं। उन्होंने मना कर दिया। कहा कि “ऐसा करके आप मेरा तनाव बढ़ा देंगे।” फिर मैंने [...]

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