नाम रह जाएगा….

एक मित्र ने बताया कि उनके यहां जीडीए की ओर से एक सफाई कर्मचारी आया था। नाम था रुमाल सिंह। एक भाई ने बताया कि हमारे गांव में एक चचा थे। मोची थे। नाम था कोलंबस। बात चली तो मुझे भी कुछ रोचक नाम याद आ गए।

दोस्तों के साथ बैठे हों, वो भी एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के हॉस्टल में, तभी कोई ज़ोर से आवाज़ लगाए- ‘प्रशासन..!’ क्या लगेगा? शायद किसी नाटक का संवाद बोला जा रहा है या फिर…? पता चला एक साथी एक्टर का नाम है। पूरा नाम है- प्रशासन संरक्षण मल्तियार। पता नहीं कितना सही था लेकिन मेरे चौंकने पर दोस्तों ने बताया कि प्रशासन के घर में और लोगों के नाम भी ऐसे ही – राष्ट्र, राज्य, संविधान, नीति टाइप के हैं।

इलाहाबाद के आउटर में है झूंसी। 1993 की बात है। झूंसी बसना शुरू हुई थी। आवास विकास कॉलोनी में हमारा घर बन रहा था। मैं और पिताजी अपनी बजाज स्कूटर से इलाहाबाद सिटी से साइट पर आते थे ठेकेदार, मिस्त्री और मज़दूरों का हिसाब करने। एक रोज़ धूप और गर्मी बहुत थी। पिताजी ने पानी मांगा। एक मज़दूर पानी लाया। एक घूंट लगाते ही पिताजी बोले- ‘बहुत गरम पानी हैं यार! सुराही नहीं रखे हो का?’ सीढ़ियां डालता हुआ एक मज़दूर बोला- ‘साहेब, इलाहाबाद गए हैं’। पिताजी ने थोड़ा चौंकते हुए पूछा- ‘इलाहाबाद? झूंसी में सुराही नहीं मिलती!? हंसते हुए जवाब मिला- ‘साहेब, नाम आहै’ (जो भाई कहीं-आस पास गया था उसका नाम)।

इलाहाबाद में कर्नलगंज इंटरमीडिएट कालेज में पढ़ता था। वार्षिकोत्सव हो रहा था। रंगारंग प्रस्तुतियां होती थीं और साल पर हुई प्रतियोगिताओं में जीतनेवालों को पुरस्कार दिए जाते थे। प्रधानाचार्य अशोक रस्तोगी घोषणा की- ‘वाद विवाद प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के विजेता हैं कक्षा नौ के जालिम सिंह राणा।‘ बालक उठकर पुरस्कार लेने आया। चीफ गेस्ट महोदय बधाई देने के बाद इतना कहने से खुद को रोक नहीं सके – ‘मुझे उन माता-पिता का मनोविज्ञान समझ में नहीं आता जिन्होंने अपने नवजात शिशु का नाम जालिम सिंह राणा रख दिया होगा..।

गिरिजेश टेलीविजन के वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Last 5 posts by गिरिजेश कुमार

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Posted by on Jul 26 2009. Filed under तीर-ए-नज़र. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

4 Comments for “नाम रह जाएगा….”

  1. आपको ऐसे ही कई नाम मिल जायेंगे. बस्तर के जंगलों में एलिजाबेथ और विक्टोरिया आज भी तेंदूपत्ते बटोरती हैं.

    बिहार में कई गावों में (इनिस्पित्तर) इंसपेक्टर सिंह और मजिस्टर सिंह रहते हैं.

    हिन्दी के प्रसिद्द लेखक मैनेजर पाण्डेय हैं.

    एक आदमी का नाम लतखोरीलाल था.

    शैतान सिंह नाम सुनकर लोग अब हंसते नहीं हैं.

    और भी नाम कभी याद आ जायेंगे.

  2. अविनाश

    क्‍या बात है गुरु… कमाल कर दिया… हंसते हुए पूरा किस्‍सा-कोताह पढ़ा। बधाई।

  3. Archana

    Aise hi kuchh naam mai bhi batana chahungi, mere gaon mein ek vyakti the jinka naam Bhaarat Sarkaar tha, ek ka naam Rusi, Mangani tha.

  4. गिरिजेश भाई, लगता है कि नामकरण का मनोविज्ञान ऐसा है कि जिसमें ज़्यादा मन रमता हो, उसे अपना बेटी-बेटी बना लो। हरियाणा के मेरे एक दोस्त ने एनआरआई बनने का हसीन ख्वाब देख रहे एक शख्स के कुनबे का ब्यौरा बताया था, जो कुछ यूं था- अमरीका सिंह की पत्नी अंग्रेजो देवी और बेटा जरमन सिंह। अब समझ में नहीं आता कि जब एक ही छत के नीचे अमरीका और जर्मन दोनों होंगे, तो उनके बीच विश्वयुद्ध कैसे टलता होगा? बहरहाल, रोचक संस्मरण साझा करने का शुक्रिया..।

    गिरिजेश मिश्र
    (अब ये मत समझिएगा कि हमने आपका नामहरण कर लिया..इ हमारा ओरिजिनल नाम है..)

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