योग गुरु बाबा रामदेव लोगों को ये सिखाते नहीं थकते कि ज़िंदगी में संयम बनाये रखना है तो योग की शरण में आओ। लेकिन धारा 377 को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के ताज़ा फैसले पर अपनी वाणी पर वो खुद संयम नहीं रख पाये। समलैंगिकता को लेकर एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान बाबा [...]
Jul 28 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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सलीके से सिर ढंकने वाली महबूबा मुफ्ती को संसदीय सलीका नहीं आता। अगर आता तो जम्मू कश्मीर विधानसभा में सोमवार को जो कुछ हुआ, वह नहीं होता। महबूबा इस कदर आपा नहीं खोतीं कि स्पीकर की गरिमा का भी उन्हें खयाल नहीं रहता। वह युवा हैं लेकिन घाटी की एक वरिष्ठ नेता हैं। उनका व्यवहार [...]
Jul 28 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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बीते एक सप्ताह में टेलीविजन चैनलों ने एक ख़ौफ़नाक युद्ध को उत्सव बना दिया। और एक अजीब से राष्ट्रप्रेम में करगिल की तथाकथित जीत का ये उत्सव मनाया गया। एक चैनल ने कहा “ज़रा याद करो कुर्बानी” … दूसरे चैनल से आवाज़ आई… “जां तक लुटा जाएंगे”… तीसरे ने कहा… अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों। [...]
Jul 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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“सच का सामना” के बचाव में कई महारथी मैदान में उतर आए हैं। वीर सांघवी का कहना है कि अगर आपको रिएल्टी टीवी पसंद नहीं तो अपना मत रिमोट से जाहिर कीजिए। चैनल बदल दीजिए। वो भी ऐसा करते हैं इसलिए भारत के तमाम दर्शकों से उनकी अपील है कि वो भी ऐसा ही करें। [...]
Jul 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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ऐतिहासिक मंदी ने दुनिया भर के मीडिया संस्थानों की हालत ख़राब कर दी है। विस्तार की योजनाएं ठप पड़ी हैं। कई बड़ी कंपनियों पर कर्ज का बोझ बेतहाशा बढ़ गया है। बहुत से अख़बार बंद हो चुके हैं। वेबसाइट भी घाटे में हैं। लेकिन इन सब निराशाजनक ख़बरों के बीच द इकोनमिस्ट ने मुनाफा कमाया [...]
Jul 26 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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एक मित्र ने बताया कि उनके यहां जीडीए की ओर से एक सफाई कर्मचारी आया था। नाम था रुमाल सिंह। एक भाई ने बताया कि हमारे गांव में एक चचा थे। मोची थे। नाम था कोलंबस। बात चली तो मुझे भी कुछ रोचक नाम याद आ गए। दोस्तों के साथ बैठे हों, वो भी एनएसडी [...]
Jul 26 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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“सच का सामना” बंद होना चाहिए या नहीं – इस पर बहस तेज़ हो रही है। वैसे ऐसे कार्यक्रमों में कोई बुराई नहीं। लेकिन क्या सच में हमारा समाज ऐसे किसी भी सच का सामना करने के लिए तैयार है? शुरुआती कुछ खुलासों से ऐसा नहीं लगता। आप सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली को ही [...]
Jul 25 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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अविनाश ने जो बातें कही हैं , उनमें बहुत दम है। और इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि “अश्लीलता कोई राजनीतिक या सामाजिक (या यहां तक कि निजी) विचारधारा नहीं है। यह हमारी सभ्यता की वो सरहद है, जहां कब दीवार खड़ी कर दी गयी, हमें पता ही नहीं चला”। लेकिन अश्लीलता परिभाषित [...]
Jul 25 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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टेलीविजन शो सच का सामना के लिए अब स्टार प्लस को सरकारी नोटिस का सामना करना पड़ रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को उसे कारण बताओ नोटिस भेज दिया है। जवाब देने के लिए उसे 27 जुलाई तक का वक्त दिया गया है। चैनल पर आरोप है कि उसने शालीनता के मानदंडों [...]
Jul 24 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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जनतंत्र मजबूत हो रहा है। रफ़्तार बहुत तेज नहीं है लेकिन बहुत धीमी भी नहीं। दो महीने में जनतंत्र ने साइबर स्पेस में 40 लाख वेबसाइटों को पीछे छोड़ दिया है। करीब तीन महीने पहले हमने जब ये वेबसाइट शुरू की तो एलेक्सा पर इसकी रैंकिंग नहीं आती थी। कुछ दिन बाद एलेक्सा पर इसकी [...]
Jul 24 2009 | Posted in
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