Archive for: August, 2009

सेक्स विवाद में फंसे बार्लुस्कोनी के निशाने पर प्रेस

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बार्लुस्कोनी ने अब मीडिया से दो-दो हाथ करने की ठान ली है। निजी ज़िंदगी को लेकर मीडिया के कवरेज से बार्लुस्कोनी काफी दुखी हैं। बीते कुछ महीनों में बार्लुस्कोनी की निजी ज़िंदगी से जुड़े कई विवादों को यूरोपीय मीडिया ने चटखारे लेकर प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में उनकी नग्न तस्वीरें छापी [...]

पत्रकारिता ने जातीयता बढ़ाई है कम नहीं की है: एसपी सिंह

पत्रकारिता के शोधार्थी और अब दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक डॉक्टर श्योराज सिंह बेचैन ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के दौरान एक प्रश्नावली कई पत्रकारों को भेजी थी। ये लगभग 13 साल पुरानी बात होगी। इस शोध के गाइड कवि-पत्रकार डॉक्टर वीरेन कुमार डंगवाल थे। आप पढ़िए सुरेंद्र प्रताप सिंह का साक्षात्कार, बिना किसी काट-छांट [...]

"प्रभाष जोशी पर सवाल उठाने वाले लफंगे हैं"

प्रभाष जोशी चुप हैं। चुप्पी एक हथियार है। वो हथियार जिससे सत्ता बड़े से बड़े आंदोलन को दबाती है। प्रभाष जोशी पत्रकारिता के शलाका पुरुष हैं। वो इस हथियार से न केवल वाकिफ हैं। बल्कि इसकी मारक क्षमता के परिचित भी हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कागद कारे में लिखा कि बड़ी बेशर्मी है कोई [...]

पाकिस्तानी मंदिरों पर रिपोर्ट – पर्दे के पीछे की कहानी

पाकिस्तान से रिपोर्टिंग अपने आप में चुनौती का काम है। भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा जो एक शक का माहौल रहता है। उसके मद्देनज़र दोनों देशों के पत्रकारों की चुनौती और बढ़ जाती है। पाकिस्तान की ज़मीन से रिपोर्टिंग करने के मुझे अब तक तीन मौक़े मिले हैं। ये तीनों ही मौक़े पाकिस्तान की [...]

टेलीविजन न्यूज़ के सितारों का सम्मान

दिल्ली में बुधवार को इंडियन न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग अवार्ड की घोषणा कर दी गयी। हिंदी और अंग्रेजी न्यूज चैनलों के लिए कुल 11 कैटेगरी के अवार्ड के लिए नॉमिनेशन मंगाये गये थे। नॉमिनेट हुए 44 मीडियाकर्मियों में से विजेताओं के नाम का एलान कर दिया गया। कुछ खास कैटेगरीज के लिए नॉमिनेशन नहीं मंगाए गए थे। [...]

"प्रभाष जोशी" के जातिवाद पर बहस बंद नहीं होगी

प्रभाष जोशी के इंटरव्यू पर जो बहस शुरू हुई है – उस पर कुछ “जनसत्ताइयों” की प्रतिक्रया आई है। उन सभी का एक ही दर्द है कि प्रभाष जोशी के बहाने जनसत्ता के माहौल पर चर्चा क्यों हो रही है? जनसत्ता के माहौल को ब्राह्मणवादी क्यों बताया जा रहा है? और भी ग़म हैं ज़माने [...]

राज्यसभा की रेस में हर बार पीछे छूट जाते हैं गैर-सवर्ण

राज्य सभा के लिए फिर सदस्यों को मनोनीत किया जाना है। ये वो खाका है जिसमें आदिवासी, दलित और पिछड़े फिट नहीं होते। महिलाओं को भी उनकी वाजिब हिस्सेदारी नहीं मिलती। कुछ समय पहले एक रिपोर्ट आई थी जिसके मुताबिक आजादी के बाद से अब तक मनोनीत हुए 107 सदस्यों में 70 फीसदी से ज़्यादा [...]

जनसत्ता में क्यों नहीं चहकती थीं लड़कियां

दिल्ली में हिंदी पत्रकारिता के दो बड़े संस्थान। इंच टेप से नापें तो दोनों के बीच की दूरी ढाई सौ मीटर से ज्यादा न होगी। लेकिन दोनों के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर था। ये बात लगभग 20 साल पुरानी है। पहले संस्थान में थी सिर्फ एक लड़की। डेस्क पर काम करती थी। और दूसरे [...]

ब्लागर का एलान- गूगल से चाहिए 1.5 करोड़ डॉलर हर्जाना

अमेरिका में एक ब्लागर ने गूगल पर मुकदमा ठोंकने का एलान किया है। न्यूयॉर्क में फैशन की छात्रा रोजमैरी पोर्ट का कहना है कि गूगल ने अदालती आदेश पर उनकी पहचान सार्वजनिक करके उनकी निजता को भंग किया है। इसके लिए वो गूगल पर मुकदमा करेंगी। 29 वर्षीय छात्रा रोजमैरी ने अपने ब्लाग पर 36 [...]

जादुई घंटे के जन्मदाता….डान हेविट

हाल ही एक ऐसी बड़ी शख़्सियत ने दुनिया को अलविदा कहा, जिसने टेलीविजन का चेहरा ही बदल दिया. 84 साल की उम्र तक काम करते हुए उन्होंने टीवी पत्रकारिता को नए आयाम दिए, गंभीरता दी और जवाबदेह भी बनाया। मशहूर अमेरिकी पत्रकार डॉन हेविट ने टीवी जर्नलिज़म को उस दौर में ही नई शक्ल दी, [...]

300x250 ad code [Inner pages]

Search Archive

Search by Date
Search by Category
Search with Google
120x600 ad code [Inner pages]
Log in | Designed by Gabfire themes