यहां का बेटा, वहां का बेटा
स्पेन में छुट्टी मनाने का मौक़ा मिला तो बड़ा मज़ा आया. छोटे से द्वीपीय शहर मलागा में समुद्र किनारे धूप सेंकने का भी मौक़ा मिला. बचपन में जो कहानियों और फ़िल्मों में देखते सुनते आया था, हक़ीक़त में भी चीज़ें लगभग वैसी ही होती हैं. बस पैसा लगता है.
बहरहाल, धूप सेंकते-सेंकते एक सदमा लगा. हुआ यूं कि साथ में बालू पर अस्थि पंजर जमाए एक यूरोपीय शख़्स के मोबाइल की घंटी घनघनाई. बातचीत शुरू हुई तो थोड़ी गंभीर होती गई. बाइसों भाषा वाले यूरोप में वह शख़्स ऐसी ज़ुबान बोल रहा था, जो मैं समझ सकता था.
क़रीब दो मिनट तक बातचीत हुई. पता चला कि जनाब के पिताजी गुज़र गए हैं और साहब इसलिए नाराज़ हैं कि उन्होंने बहुत पैसे ख़र्च करके यह छुट्टी तैयार की थी. अब पिताजी ऐसे वक्त में गुज़र गए तो छुट्टी ख़राब होने का ख़तरा था. लेकिन फ़िक्र की कोई बात नहीं, उन्होंने फ़ोन करने वाले को बता दिया है कि छुट्टी ख़राब नहीं कर सकते. अगले वीकेंड में आएंगे तो क्रिया कर्म कर दिया जाएगा.
आंखों पर धूप का बेहतरीन अरमानी चश्मा लगा कर बालू में फिर वैसे ही गड़ गए, जैसे फ़ोन आने के पहले गड़े थे.
लेकिन उनसे कुछ ही फ़ीट की दूरी पर मेरा चैन हराम हो गया. समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या ऐसा हो सकता है कि किसी का बाप गुज़र जाए और वह उन्हें देखने भी न जाए. पिता की मृत्यु की ख़बर सुन कर भी छुट्टियां और जश्न मनाता रहे. क्या ऐसा हो सकता है कि एक बेटा कह दे कि बाप के शव को संभाल कर रख दो, हफ़्ता भर जश्न मनाने के बाद आकर आख़िरी रस्म अदा कर देंगे.
इसी बात पर सोचते सोचते छुट्टियां बीत गईं. यूरोप को कोसते कोसते घर लौटा. उधेड़बुन ऐसी थी कि यह बात मन से निकल ही नहीं रही थी. यह भी नहीं समझ पा रहा था कि किससे चर्चा करूं.

अनवर जमाल अशरफ़
एक यहां का बेटा, एक वहां का बेटा.
((प्रिंट और टेलीविजन में लंबा वक़्त बिताने के बाद वरिष्ठ पत्रकार अनवर जमाल अशरफ़ फिलहाल डॉयचे वेले से जुड़े हैं और बीते तीन साल से जर्मनी के बॉन शहर में रह रहे हैं।))
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सही है जमाल जी पर अब यहाँ भी वहा के बेटे फ़ैल रहे है
खून के गाढ़पेन और रिश्तों की गर्माहट पर जैसे किसी की बुरी नज़र लग गई है…। वासना, स्वार्थ, पैसा, शोहरत और ताकतवर होते जाने की चाहत अंधा बनाती जा रही है…। क्या बेटे, क्या बाप…सबके मन से अपनापन गायब हो रहा है और अफ़सोस…सब अपने आप में ही मस्त हैं। काश, कोई होता, जो सारी दुनिया को तुरंत जन्मे बच्चे की तरह ही मासूम बना देता!
Parashuram ji kahaN ke the jinhone apni maaN ka sar kat diya tha !?