ताक़त दिखाने के बाद ब्लागवाणी की वापसी

ब्लागवाणी की वापसी हो गई। आरोप लगाने वालों को ताक़त दिखाने के बाद ब्लागवाणी के संचालकों ने इसे फिर से शुरू कर दिया है। ब्लागवाणी को बंद करने और उसे एक दिन बाद फिर से शुरू करने के पीछे संचालकों के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि “ब्लागवाणी जब आपकी है तो आरोप सिर्फ़ उन पर क्यों लगे।” इसके जवाब में बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन फिलहाल सिर्फ़ इतना ही कि देश हमारा है लेकिन आरोप तो उन्हीं पर लगते हैं जो देश चलाते हैं। जब ब्लागवाणी को बंद करने का फैसला लिया गया था तो साइबर स्पेस पर बहुत सारे लोगों ने कहा था कि ब्लागवाणी कोई मुनाफे का अड्डा नहीं है। कोई दुकान नहीं है। हिंदी के प्रति ब्लागवाणी के संचालकों की समर्पित भावना का इजहार है। यहां पर भी एक बात कहने लायक है। कोई भी संस्था, मंच, व्यवस्था और देश तब तक पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं हो सकता जब तक उसे आर्थिक तौर पर अपने पैरों पर खड़ा नहीं किया जाए। ब्लागवाणी के संचालक इस बात को समझते होंगे। और हमें उम्मीद है कि वो उसे आर्थिक लिहाज से स्वतंत्र बनाने की कोशिश भी कर रहे होंगे। – मॉडरेटर

ब्लागवाणी को बन्द करने की सोचना भी हमारी गलती थी. आपकी प्रतिक्रिया देख कर लगता है कि यह फिनोमिना हमारी सोच से भी बड़ी हो गई थी. पिछले 24 घंटो में हमें अनगिनत SMS, ई-मेल और फोन आये यह देख कर लगता है कि ब्लागवाणी शुरु करने का फैसला तो हमारे हाथ में था, लेकिन बन्द करने का फैसला अकेले हमारे हाथ में नहीं है. यह फैसला दबाव में ही लिया गया था. लेकिन यह दबाव आर्थिक या काम के बोझ का नहीं था, हम तो हतप्रभ रह गये थे कि ब्लागवाणी की व्यवस्था बनाये रखने के लिये गये उपायों पर भी कोई पक्षधरता के आरोप लगाये जा रहे थे. यही शायद असहनीय बन गया.

आपकी प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि ब्लागवाणी को बन्द करना संभव नहीं है.

लेकिन ब्लागवाणी को इस रूप में चलाना भी अब संभव नहीं है क्योंकि क्रेडिबिलिटी पर उठने वाले सवाल सबसे ज्यादा चोट पहुंचाते हैं, खास कर तब जब आपने अपनी कोशिश में कहीं कमी नहीं छोड़ी हो. वैसे भी ब्लागवाणी जब आपकी है तो आरोप हम क्यों सहें. इसलिये ब्लागवाणी का मोडरेशन अब कोई मोडरेटर नहीं बल्कि ब्लागर कम्युनिटी खुद करेगी.

1. ब्लागवाणी के प्रयोक्ता ही यह फैसला करेंगे कि कौन सा ब्लाग जोड़ना है और कौन सा छोड़ना.
2. सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य ही पसंद कर सकेंगे और यह सब देख सकेंगे कि पसंद किसने की थी ताकी फिर कोई अर्नगल आरोप न लगा सके कि यहां-वहां गड़बड़ है. साथ ही जो नकली पसंद करेगा वो भी जग-जाहिर हो जायेगा. हां यह जरूर है कि अब पसन्द/नापसन्द के साथ अनोनिमिटी नहीं रहेगी. यह शायद एक जरूरी पैनल्टी है.
3. पसंद के साथ ही नापसंद भी लाया जायेगा जिसका प्रयोग भी सिर्फ ब्लागवाणी के सदस्य कर सकेंगे.

ब्लाग जोड़ने आदि की सारी शक्तियां ‘माडरेटर” जैसा दर्जा प्राप्त ब्लागिंग में सक्रिय लोगों की होगी. इनकी चुनाव प्रक्रिया स्वाचलित और पारदर्शी होगी. आगे की जानकारी आपको इसी ब्लाग में मिलती रहेगी.

यह ब्लागवाणी अस्थायी ब्लागवाणी है

आज से हम नयी ब्लागवाणी पर काम शुरु कर रहे हैं. इतना सब कुछ बनाने में वक्त लगेगा इसलिये फिलहाल इस ब्लागवाणी को इसलिये चालू किया जा रहा है ताकी व्यवस्था में खलल न पड़े. हमें लगता है कि नई ब्लागवाणी पर कार्य 1 से 1.5 महीने में पूर्ण किया जा सकेगा. इसके लिये भी आपके सुझाव आमंत्रित हैं. क्योंकि काम नये सिरे से शुरु होगा इसलिये नयी ब्लागवाणी नयी सुविधायें भी लेकर आयें जिससे ब्लागिंग का दायरा बढ़े और जैसा कि कुछ पोस्टों में कहा गया है कि ब्लागर के साथ अधिकाधिक संख्या में पाठक भी आयें.

साथ ही ब्लागवाणी पसंद की क्रेडिबिलिटी पर उठे सवालों के लिये यह कहना चाहेंगे कि जिन सदस्यों की ब्लागवाणी पसंद से शिकायत की वजह से यह सारा बवाल उठा अगर वह सार्वजनिक रूप से मांग करते हैं तो हम उनकी पसंद की सारी जानकारी (किस पोस्ट पर किस आइपी से कब पसंद आयी) सार्वजनिक कर देंगे और ब्लागवाणी के प्रयोक्ता खुद देख सकेंगे की ब्लागवाणी का सुरक्षा तंत्र नकली पसंद हटाने का काम सही कर रहा था या नहीं.

ब्लागवाणी में आने वाली समस्याओं के बारे में लोग पहले बतायें ताकि इनका निदान हो सके. इसके लिये माध्यम मौजूद हैं लेकिन शायद कम पड़े इसलिये जल्द ही एक फोरम शुरु हो जिसमें ब्लागिंग से संबंधित बातचीत हों और अगर कोई ऐसी घटना हुई जिससे ब्लागवाणी के कामकाज पर खलल पड़ रहा हो (जैसे नकली पसंदे) तो कम्युनिटी उसे बारे में बातचीत कर निदान खोज पायें.

आशा है कि जैसा दबाव हमने महसूस किया ऐसा दोबारा नहीं करना पड़े. आपके सहयोग कि अपेक्षा के साथ.

टीम ब्लागवाणी

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Posted by on Sep 29 2009. Filed under स्पेशल रिपोर्ट. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

3 Comments for “ताक़त दिखाने के बाद ब्लागवाणी की वापसी”

  1. विवेक

    मुझे भी यही लगता है कि सिर्फ अपनी ताकत दिखाने के लिए ही ब्लागवाणी को बंद किया गया था। बेहतर होता कि इसे बंद करने की जगह आरोपों का जवाब दिया गया होता या फिर ब्लागवाणी से जुड़े ब्लागरों को उसका तकनीकी पहलू समझाया गया होता। लेकिन ऐसा करने की जगह एक ड्रामा खेला गया।

  2. ब्लॉगवाणी, जनतंत्र और मोहल्ला को धन्यवाद.

    सेवा की बहाली के विश्लेषण का मन नहीं कर रहा कि ब्लॉगवाणी क्यों बंद किया गया और फिर क्यों चालू किया गया. बहाल हो गया है, ये सबसे अच्छा है.

  3. छोड़ो बेकार की बातें…कहीं बीत ना जाए रैना…।

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