Archive for: September, 2009

पुलिस के धोखे से पत्रकारों की जान ख़तरे में, मीडिया ख़ामोश

पश्चिम बंगाल की पुलिस छत्रधर महतो की गिरफ्तारी पर फूली नहीं समा रही है। छत्रधर महतो, यानी लालगढ़ की पुलिस संत्रास विरोधी जनसाधारणेर कमेटी का नेता। महतो की गिरफ्तारी को पुलिस बहुत बड़ी कामयाबी बता रही है। लेकिन ये कामयाबी उसने जिन तौर-तरीकों से हासिल की है, वो पत्रकारों के लिए ख़तरे की घंटी है। [...]

"हिंदुस्तान" की कोशिश के बावजूद लुट गई लाज

दैनिक जागरण और टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक बार फिर साबित किया है कि वो सर्कुलेशन में नंबर वन ऐसे ही नहीं बन गए हैं। आज आप इन दोनों अख़बारों के दिल्ली संस्करण के पहले पन्ने को देखेंगे तो आपको वहां भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच से जुड़ी एक-एक तस्वीर मिलेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया में वो तस्वीर [...]

"संस्कृति के ठेकेदारो, कहां हो"

बड़ी अजीब बात है. कोई सामने आता ही नहीं. अभी दो तीन महीने पहले ही तो ढोल नगाड़े लेकर सच का सामना के ख़िलाफ़ जंग छेड़ी गई थी. अब कार्यक्रम बंद हो गया तो कोई कुछ बोलता ही नहीं. बोले भी तो कैसे. तब तो संस्कृति की दुहाई दी जा रही थी. बड़े बड़े जुमले [...]

राष्ट्रपति के बेटे के समर्थन में नई दुनिया की मुहिम

नई दुनिया ने प्रतिभा पाटिल के बेटे राजेंद्र सिंह शेखावत के बारे में माहौल बनाने के लिए सभी घोड़े खोल दिये हैं। शुक्रवार को भी नई दुनिया में एक ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित की गई है जिसमें अमरावती से राजेंद्र सिंह शेखावत को टिकट दिये जाने के फैसले को सही ठहराया गया है। राजेंद्र को टिकट [...]

नई दुनिया की राष्ट्रपति भवन पर ख़ास नज़र!

नई दुनिया में शुक्रवार को 12वें पेज पर प्रतिभा पाटिल की तस्वीर छपी है। भारतीय मूल के पीटर वर्गीज के साथ। पीटर वर्गीज भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बने हैं। रिपोर्ट दो कॉलम की है और उसके ठीक बगल में तीन कॉलम में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की तस्वीर है। उस तस्वीर में पीटर वर्गीज राष्ट्रपति [...]

हिंदुस्तान छोड़, लोकमत चले वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त

हिंदुस्तान से वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त ने इस्तीफा दे दिया है। वो अब लोकमत समाचार, नागपुर में एक्जीक्यूटिव एडिटर का कार्यभार संभालेंगे। जयशंकर गुप्त काफी सीनियर पत्रकार हैं और हिंदुस्तान से पहले रविवार, नवभारत टाइम्स और इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। जनतंत्र से बातचीत में जयशंकर गुप्त ने इस्तीफ़ा [...]

नई दुनिया का मतलब राष्ट्रपति भवन का भोंपू !

संबंध निजी होते हैं और संबंधों को हर कोई निभाता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी संस्थान के शीर्ष पर बैठा हो और वो उस संस्थान को निजी संबंधों को साधने का जरिया मात्र बना दे तो यह किसी के लिए अच्छा नहीं। न खुद उस व्यक्ति के लिए और न ही संस्थान के लिए। [...]

सड़ना मंजूर मगर मरना नहीं

“एक मजदूर काफी बूढ़ा हो गया था। बदन में इतनी शक्ति नहीं थी कि वह मजदूरी कर सके। लेकिन संतान नालायक थीं, इसलिए वृद्धावस्था में भी उसे काम करना पड़ता था। जब भी वह बोझ उठाता तो भगवान का नाम लेकर कहता- हे भगवान, कितना सताओगे, अब तो मुझे उठा लो। एक दिन भगवान पसीज [...]

क्या बचेगी हिंदी? जानिए संपादकों की राय

नई दिल्ली, 24 सितंबर। हिंदी के भविष्य को लेकर देश के कुछ संपादक चिंतित हैं तो कुछ उम्मीदों से भरे हुए हैं. संपादकों की राय में हिंदी के भविष्य को लेकर रुदन करने के बजाय उन चुनौतियों से निपटने और मौजूदा समय की ज़रूरतों के अनुसार हिंदी को तैयार करने की आवश्यकता है. ये राय [...]

गैरी के गुरु मंत्र पर मीडिया की सेक्स खुराक

सेक्स को लेकर मीडिया में भी एक तरह का ऑब्सेशन है। एक कुंठा है। यही वजह है कि इससे जुड़ी कोई बात उठी नहीं कि मीडिया चौके-छक्के लगाना शुरू कर देता है। ताज़ा मामला भारतीय क्रिकेट टीम और उसके कोच गैरी कर्स्टन से जुड़ा है। गुरु गैरी ने अपने चेलों को ज्ञान दिया है कि [...]

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