मुंबई में 8वां महिला नाट्यलेखक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन यानी Women Playwright International (WPI) 1 से 7 नवंबर, 2009 तक मुंबई विश्वविद्यालय के अकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट तथा स्त्री मुक्ति संघटना, मुंबई के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। WPI के गठन का उद्देश्य थिएटर के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को बिना किसी भेदभाव [...]
Oct 31 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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नई दुनिया में अक्टूबर में एक सीरीज छापी गई। आमतौर पर मीडिया संस्थान किसी भी बड़ी कंपनी को चुनौती देने से बचते हैं। ऐसे वाकये एक-दो ही होंगे जब किसी मीडिया संस्थान ने देश की किसी ताक़तवर कंपनी के काले कारनामों का खुलासा करने के लिए सीधी मुहिम चलाई हो। नई दुनिया ने यह कारनामा [...]
Oct 31 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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हिंदुस्तान ने अक्टूबर में एक बेहतरीन काम किया है। हिंदुस्तान “समागम” नाम से पटना और लखनऊ दो शहरों में आयोजन किए। पटना का आयोजन शानदार रहा। थोड़े अंतराल पर ही सही दोनों ने एक ही कार्यक्रम में नीतीश कुमार और लालू यादव – दोनों ने हिस्सा लिया। बिहार की बेहतरी पर लोगों के सामने अपनी [...]
Oct 30 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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इलाहाबाद से जब से लौटा हूं… एक आशंका गहरा रही है। लगता है कि अब ब्लॉग के रेग्युलेशन की मांग जोर पकड़ेगी। आए दिन ब्लॉगरों पर मुक़दमे होंगे। बेनामियों की धर-पकड़ तेज होगी। तभी तो नामवर सिंह ने कहा कि “कहने से जीभ नहीं कटती मगर लिखने से हाथ कट जाते हैं”। तभी तो विभूति [...]
Oct 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ और परवेज अहमद की जोड़ी ने एक बार फिर विरोधियों को मात दे दी है। पुष्पेंद्र ने सेक्रेटरी जनरल के पद पर नदीम अहमद काजमी को हराया। जबकि परवेज ने अध्यक्ष पद पर आठ वोटों से अरुण केसरी को शिकस्त दी। इनके अलावा उपाध्यक्ष पद पर पुष्पेंद्र के [...]
Oct 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
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महाराष्ट्र चुनाव के नतीजे देखकर राज ठाकरे बहुत खुश होंगे। एक तो यूं कि चचा को बता दिया कि उनका असली राजनीतिक उत्तराधिकारी उनका बेटा ऊद्धव नहीं बल्कि वो खुद हैं। दूसरा ये कि एमएनएस के गुंडों ने उत्तर भारतीय के खिलाफ मुंबई में जो हिंसा की थी उसको राज ठाकरे अब नतीजों के आइने [...]
Oct 26 2009 | Posted in
देश - दुनिया |
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ब्लॉग-विमर्श के लिहाज से पहले दिन के मुक़ाबले दूसरे दिन के दोनों सत्र ज़्यादा कारगार लगे। इसकी एक वजह तो समय से सत्र का शुरू होना रहा। अधिक वक्ताओं के विचार आए लेकिन इसके साथ ही तकनीकी सत्र में जिस बारीकी से रविरतलामी, मसिजीवी, ज्ञानदत्त पांडेय और संजय तिवारी ने सूचना, तकनीक औऱ अभिव्यक्ति के [...]
Oct 25 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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जब भी कोई नाटक किया जाता है तो उसे एक टीम के रूप में ही तैयार किया जाता है. मगर कई बार हो यह जाता है कि एक नाटक शुद्ध रूप से निर्देशक का नाटक हो जाता है तो कई बार वह एक्टर का हो कर रह जाता है. एकजुट थिएटर ग्रुप, मुंबई द्वारा प्रस्तुत [...]
Oct 25 2009 | Posted in
ब्लॉग |
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अचानक पाबंदियों के टूटने से भी दम घुटने लगता है, अनंत आजादी कई बार अराजक स्थिति पैदा करते हैं। इसलिए चिट्ठाकारी पर जब भी हम बात करते हैं तो स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच के फर्क को समझना होगा। चिट्ठाकारी में जो कुछ भी कर रहे हैं उसके साथ हर हाल में जिम्मेदारी का एहसास [...]
Oct 24 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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दिल्ली और एनसीआर में नई दुनिया की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। अख़बार का सर्कुलेशन बढ़ाने की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। कुछ दिन पहले अख़बार ने बेडशीट स्कीम लॉन्च की। इस उम्मीद में कि बेडशीट कंटेंट के बूते न सही बेडशीट के भरोसे ही सही पाठक अख़बार खरीदने लगें। [...]
Oct 23 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
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