सियासत में झूठ और ग़लतबयानी भी एक बहुत बड़ा हथियार है। ताज़ा मामला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से जुड़ा है। द हिंदू ने आज अपनी एक ख़बर में उनके झूठ से पर्दा उठाया है। द हिंदू के मुताबिक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने दावा किया है कि उन्होंने अख़बारों में विज्ञापन पर सिर्फ 5379 रुपये [...]
Nov 30 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
Read More »
देश के जाने माने पत्रकार कुलदीप नैयर एक किस्सा सुनाते हैं। गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री और कुलदीप नैयर उनके प्रेस सचिव थे। संसद की भाषाओं के संबंध में एक समिति थी। उस समिति के अधीन एक खैर समिति थी। उस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संसद को हर पांच वर्ष [...]
Nov 30 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
Read More »
मुद्दे, राजनीति के सुहाग हैं. बिन मुद्दे राजनीति उजड़ी, सूनी और अर्थहीन है. प्रसंग था, अर्थनीति, महंगाई और देश के गरीब. लोकसभा में डॉ राममनोहर लोहिया ने पहले ही भाषण में कहा, इस देश के एक नागरिक की आमद साढ़े तीन आने रोजाना है. इसके पहले वह संसद के बाहर कह चुके थे. प्रधानमंत्री पर [...]
Nov 30 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
Read More »
वह एक उदास करने वाली शाम थी। टेलीविजन 26/11 के हमले की पहली वर्षगांठ ‘मना’ रहा था। तर्कवीर सुबह से कुछ निंदा, कुछ आलोचना, कुछ समालोचना, कुछ प्रशंसा, तो कुछ निजी एजेंडे के तीर चला रहे थे। जितने मुंह उतनी बातें। तर्को के इस घमासान में यह सच दम तोड़ चुका था कि हम अभी [...]
Nov 29 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
Read More »
समाचार न्यूज़ एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) अब टेलीविजन न्यूज़ के कारोबार में कदम रखने जा रही है। एएनआई की तर्ज पर अब यूएनआई ने न्यूज़ चैनलों को विजुअल स्टोरी मुहैया कराने के लिए अपनी सेवा शुरू कर दी है। आज इस सेवा का उद्घाटन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यूएनआई का जोर डेवलपमेंटल [...]
Nov 28 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
Read More »
इंडियन एक्सप्रेस की यह ख़बर सही निकलती है तो एनडीटीवी के प्रमोटर अब एनडीटीवी इमैजिन को बेचने की तैयारी में जुटे हैं। करीब डेढ़ साल पहले यह चैनल बड़े तामझाम के साथ शुरू हुआ था। लेकिन कंपनी की माली हालत इतनी ख़राब है कि अब वह इस सफेद हाथी को ज्यादा दिनों तक नहीं पाल [...]
Nov 28 2009 | Posted in
स्पेशल रिपोर्ट |
Read More »
19 नवंबर को गन्ना किसानों ने सड़क से संसद तक अपना रोष ज़ाहिर किया। वे दिल्ली पहुंचे क्योंकि हमारी सरकार को ऊंचा सुनने की बीमारी हो गई है। उनका मकसद केवल सरकार के कानों में अपनी बात को डालना था। वे डालकर गए भी, लेकिन अगले दिन अखबारों ने बड़ा चौंकाने वाला काम किया। इस [...]
Nov 28 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
Read More »
आईबीएन-लोकमत चैनल के मुबंई दफ्तर पर शिवसैनिकों के हमले के विरोध का स्वर बेहद दबा नजर आया। शिव सैनिकों के कुछ वर्ष पूर्व के मीडिया पर हमलों के विरोध को याद करें तो उसकी तुलना में तो इस बार का विरोध महज औपचारिक विरोध के रूप में सामने आया। मुझे याद है कि 1990 के [...]
Nov 28 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
Read More »
लिब्रहान आयोग की रपट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। सारे राजनीतिक दल अपनी सुविधा के मुताबिक उसका खंडन-मंडन कर रहे हैं। लेकिन लिब्रहान आयोग में एक अदद नाम ने भी पूरे राजनीतिक वातावरण में कम लुत्ती नहीं लगायी है। आयोग ने जिन लोगों को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए जिम्मेदार ठहराया है, उनमें [...]
Nov 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
Read More »
क्या कभी हमारे देश का राजनीतिक माहौल ऐसी शर्मनाक स्थिति में रहा है, जैसा की अभी है? अख़बारों के पहले पन्ने पर जिस तरह की ख़बरें रोज़ आ रही हैं, उससे आपको उबकाई आती होगी। बात कुछ दिन पहले से शुरू करते हैं, जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइ राजशेखर रेड्डी का निधन एक हेलीकॉप्टर [...]
Nov 27 2009 | Posted in
तीर-ए-नज़र |
Read More »