बाउंड्री भी नहीं लगा पाया आईपीएल
दो साल पहले आईपीएल का बाज़ार सजा और क्रिकेटरों को ख़रीदा बेचा गया. क्रिकेट चाहने वाले तो तभी बेचैन हो उठे, लेकिन इस बार बाज़ार में पेश किए गए खिलाड़ी जब नहीं बिके, तो बेचैनी और बढ़ गई.
विश्व चैंपियन पाकिस्तान के खिलाड़ियों को आईपीएल की किसी टीम ने नहीं ख़रीदा. यह सही है कि वेस्ट इंडीज़ के रामनरेश सरवन और डेरेन गंगा जैसे खिलाड़ियों को भी ख़रीदार नहीं मिला और इंग्लैंड के ग्रेम स्वैन और श्रीलंकाई ओपनर उपुल तरंगा को भी नहीं. लेकिन इन बड़े नामों ने ट्वेन्टी 20 क्रिकेट में कोई बड़ा धमाल नहीं मचाया है.
धमाल मचाया है पाकिस्तान के ट्वेन्टी 20 कप्तान शाहिद अफ़रीदी ने. इंग्लैंड में पिछले साल खेले गए टी 20 वर्ल्ड कप की चैंपियन टीम के हीरो. सीमित ओवरों में गेंदबाज़ों की नींद हराम कर देने वाले अफ़रीदी के नाम सिर्फ़ 37 गेंद में शतक ठोंकने का रिकॉर्ड है. उनके साथी अब्दुर रज़्ज़ाक भी वर्ल्ड चैंपियन टीम के हिस्सा रह चुके हैं. कामरान अकमल भी और इमरान नज़ीर भी, मोहम्मद आमिर भी. लेकिन इन सितारों पर आईपीएल की किसी टीम ने पैसे नहीं लगाए.
आईपीएल में पाकिस्तान के 11 खिलाड़ियों की बोली लगनी थी लेकिन एक का भी सौदा नहीं हुआ. बहुत सीधी बात है, या तो आईपीएल की टीमों को इस बात का भय सता रहा होगा कि आख़िरी वक्त में पाकिस्तानी क्रिकेटरों को वीज़ा न मिल पाए. या फिर पाकिस्तानी खिलाड़ियों की बात मानें, तो यह उनके ख़िलाफ़ सोची समझी साज़िश है.
चाहे भय का नतीजा हो या साज़िश का, बुरा क्रिकेट का होने वाला है. मौजूदा दौर में क्रिकेट के सबसे कामयाब मुक़ाबले की सबसे कामयाब टीम के खिलाड़ी आईपीएल में नहीं खेलेंगे. आज की पाकिस्तान टेस्ट टीम भले ही कमज़ोर समझी जाती हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वह ट्वेन्टी 20 की सबसे बड़ी टीम है. ट्वेन्टी 20 के दो वर्ल्ड कप हुए हैं और दोनों बार पाकिस्तान फ़ाइनल में पहुंचा है. एक बार चैंपियन और एक बार उप विजेता.
शाहिद अफ़रीदी और मोहम्मद आमिर छोटे क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं. यह बात तो माननी मुश्किल है कि उनके अंदर कैलिबर नहीं और इस वजह से उन्हें आईपीएल में ख़रीदा नहीं गया. अगर वेस्ट इंडीज़ के किरोन पोलार्ड जैसे कम जाने जाने वाले खिलाड़ी के लिए मुंबई की टीम साढ़े सात लाख डॉलर ख़र्च कर सकती है, तो डेक्कन चार्जर्स अपने पुराने खिलाड़ी शाहिद अफ़रीदी को तो फिर से हासिल कर ही सकती थी.
आईपीएल 1 की चैंपियन राजस्थान रॉयल्स ने अपने पुराने साथी सुहैल तनवीर को नज़र अंदाज़ कर दिया तो पिछले साल शोएब अख़्तर के न आने पर गहरा दुख मनाने वाले कोलकाता के मालिक शाहरुख़ ख़ान ने भी किसी पाकिस्तानी क्रिकेटर पर तवज्जो नहीं दिया.
यह ठीक है कि मुंबई पर आतंकवादी हमलों के बाद पिछले बार यानी आईपीएल 2 की स्थिति कुछ और थी. तब पाकिस्तान के खिलाड़ी आईपीएल में शामिल नहीं हो सकते थे. लेकिन इस बार तो बाक़ायदा दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों ने इसके लिए औपचारिकताएं पूरी कीं. सरकारों से वीज़ा मिलने की गारंटी मिली. इसके बाद ही पाकिस्तान के 11 खिलाड़ियों के नाम बोली के लिए भेजे गए. लेकिन क्या इनमें से एक भी आईपीएल की किसी भी टीम का हिस्सा बनने लायक़ नहीं.
हाल में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी भारत आए और दोनों पक्षों में कई मुद्दों पर बात हुई. लेकिन शायद यह पहलू रह गया. मुंबई हमलों के बाद दोनों पड़ोसियों के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं. लेकिन यह बात जगज़ाहिर है कि जब जब दोनों देशों के रिश्ते ख़राब हुए हैं, क्रिकेट ने इसे ठीक करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है. पर इस बार लगता है कि ऐसा नहीं हो पाएगा.

अनवर जमाल अशरफ़
((वरिष्ठ पत्रकार अनवर जमाल अशरफ़ इन दिनों जर्मन रेडियो डॉयचे वेले से जुड़े हैं। और जर्मनी के बॉन शहर में रहते हैं।))
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बीसीसीआई और आईपीएल का रवैया बहुत बेहूदा है। किसी भी वतन के खिलाड़ियों का अपमान नहीं करना चाहिए। खेल को सियासत से दूर रखना चाहिए था। ऐसा करने से बात बनने की जगह बिगड़ती है।
निष्पक्ष विश्लेषण. गंभीरता से सोचने के लिए मज़बूर करता है ये आलेख.