कतर में मैं बहुत खुश हूं – एमएफ हुसैन, एक पूर्व भारतीय
यह बयान मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन का है… जो चंद दिनों पहले तक भारतीय हुआ करते थे। उन्होंने यह बात मलयालम दैनिक “माध्यमम” के “दोहा संस्करण” से कही है। हुसैन ने कहा है कि वो भारत से बहुत प्यार करते हैं, लेकिन भारत को ही अब उनकी ज़रूरत नहीं है। एक नज़र एम एफ हुसैन की बातों पर – मॉडरेटर
“भारत मेरी जन्मभूमि है। मैं मातृभूमि से नफ़रत नहीं कर सकता। लेकिन भारत ने मुझे ठुकरा दिया है। फिर, मैं वहां क्यों रहूं?”
“जब संघ परिवार के घटकों ने मुझ पर हमला किया, सब चुप रह गए। सियासी नेतृत्व, कलाकार, बुद्धिजीवी वर्ग… कोई भी मेरे बचाव में आगे नहीं आया। लेकिन मैं जानता हूं कि 90 फीसदी भारतीय मुझे प्यार करते हैं। वो लोग मेरे साथ हैं। केवल दस फीसदी, जिनमें कुछ सियासतदान शामिल हैं, मेरे ख़िलाफ़ हैं।”
“भारत की मौजूदा सरकार मेरी रक्षा नहीं कर सकती। इसलिए ऐसे देश में रहना बहुत मुश्किल है। सियासतदानों को केवल वोट चाहिए।”
“अब वो मुझे वापस बुला रहे हैं। जब मैं निर्वसन में था तब किसी को मेरी परवाह नहीं थी। किसी सरकार ने मुझे नहीं बुलाया। अब कतर ने मुझे नागरिकता दे दी है तो वो बुला रहे हैं। मैं ऐसे सियासी नेतृत्व पर कैसे भरोसा करूं जो मुझे सुरक्षा देने से मना कर चुकी है? क्या कोई गारंटी है कि मुझे भारत में सुरक्षा मिलेगी?”
“यह कला और कलाकार की आज़ादी के ख़िलाफ़ अभियान है। कला के जरिए किसी की भावना को ठेस पहुंचाने की मेरी मंशा कभी नहीं थी। मैंने सिर्फ अपनी रचनात्मकता कला के जरिए जाहिर की है। कला की भाषा एक है। जो लोग हर तरह के संकीर्ण दायरे से ऊपर उठ कर इससे प्रेम करते हैं वो मेरी ताक़त हैं।”
“कतर में मैं पूरी आज़ादी का लुत्फ़ उठा रहा हूं। अब कतर ही मेरा घर है। यहां मेरी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई पाबंदी नहीं है। यहां मैं बहुत खुश हूं।”
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तुमने पीछा छोड़ा… यह सोच कर भारतमाता और मेरे जैसे उनके करोड़ों बच्चे भी बहुत खुश हैं। अब तुम कतर में भी कयामत बरपाओ… हम यही दुआ करते हैं।
मकबूल फिदा जी, हम हमेशा से आप-पर फ़िदा रहे हैं. आपके जीने का अंदाज़ हमेशा से निराला रहा है. खूब ब्रुश चलाया आपने, खूब रंग बिखेरे. क्या मैं आपको रोक सकता हूँ? काश आप मेरा आग्रह स्वीकार कर पाते.