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	<title>Comments on: इतिहास के आईने में पेंटिंग्स की तरह ही नंगे हैं हुसैन</title>
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	<description>बोल के लब आज़ाद हैं तेरे</description>
	<lastBuildDate>Thu, 28 Jul 2011 10:38:23 +0000</lastBuildDate>
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		<title>By: अजित वडनेरकर</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1495</link>
		<dc:creator>अजित वडनेरकर</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Mar 2010 23:34:03 +0000</pubDate>
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		<description>अच्छा लिखा है समरेन्द्र।
यही कहूंगा कि विवाद के लिए हमें हुसैन याद रहते हैं जिसके खिलाफ कोई आरोप नहीं हैं। जो हैं वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनाकर्म से जुड़े हैं। क्या हमें शर्म आती है कि जिस शक्तिकपूर की हक़ीक़त कास्टिंग काऊच में सामने आती है, कुछ महीनों में हम कॉमेडी शो में उसकी बेशर्म हंसी में साथ देते हुए अपनी जांघें और बगलें खुजाते हुए खुद के हास्यप्रिय होने का सबूत पूरे परिवार को देते नज़र आते हैं?

दुर्घटना में दिवंगत एक विवादास्पद नेता के पेज-थ्री पुत्र जब बाप की मौत के चंद रोज भीतर माननीय सांसद के लिए तय बंगले में भारतीय करेंसी की बत्ती बनाकर, उसमें नशीला पाऊडर भरकर पीने के बाद पहले अस्पताल, फिर सीखचों में पहुंचते हैं। इस कांड में एक मौत भी होती है। हमें उनकी करतूतें याद रहते हुए भी याद नहीं रहतीं और उनकी नई करामातें, नए अवतार देखने की एक और बेशर्म होड़ में हम सब शरीक होते हैं।

क्या ये हुसैन के गुनाह से बड़ा गुनाह है? कभी इस पर हम लिखेंगे? क्या इसकी भर्त्सना होगी?
तुमने यक़ीनन बहुत अच्छा, तार्किक और सुलझा हुआ पक्ष रखा है। मैं एक अलग आयाम पर सोच रहा था। यहां आने में देर हो गई, पर यह विचार यहीं दर्ज कर रहा हूं।
शुभकामनाएं
जैजै</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अच्छा लिखा है समरेन्द्र।<br />
यही कहूंगा कि विवाद के लिए हमें हुसैन याद रहते हैं जिसके खिलाफ कोई आरोप नहीं हैं। जो हैं वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनाकर्म से जुड़े हैं। क्या हमें शर्म आती है कि जिस शक्तिकपूर की हक़ीक़त कास्टिंग काऊच में सामने आती है, कुछ महीनों में हम कॉमेडी शो में उसकी बेशर्म हंसी में साथ देते हुए अपनी जांघें और बगलें खुजाते हुए खुद के हास्यप्रिय होने का सबूत पूरे परिवार को देते नज़र आते हैं?</p>
<p>दुर्घटना में दिवंगत एक विवादास्पद नेता के पेज-थ्री पुत्र जब बाप की मौत के चंद रोज भीतर माननीय सांसद के लिए तय बंगले में भारतीय करेंसी की बत्ती बनाकर, उसमें नशीला पाऊडर भरकर पीने के बाद पहले अस्पताल, फिर सीखचों में पहुंचते हैं। इस कांड में एक मौत भी होती है। हमें उनकी करतूतें याद रहते हुए भी याद नहीं रहतीं और उनकी नई करामातें, नए अवतार देखने की एक और बेशर्म होड़ में हम सब शरीक होते हैं।</p>
<p>क्या ये हुसैन के गुनाह से बड़ा गुनाह है? कभी इस पर हम लिखेंगे? क्या इसकी भर्त्सना होगी?<br />
तुमने यक़ीनन बहुत अच्छा, तार्किक और सुलझा हुआ पक्ष रखा है। मैं एक अलग आयाम पर सोच रहा था। यहां आने में देर हो गई, पर यह विचार यहीं दर्ज कर रहा हूं।<br />
शुभकामनाएं<br />
जैजै</p>
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	<item>
		<title>By: Sanjeet tripathi</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1494</link>
		<dc:creator>Sanjeet tripathi</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Mar 2010 19:31:53 +0000</pubDate>
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		<description>samrendra jee, phali baar, pahli baar aapki lekhni se bahut hi andar tak prabhavit hua, ekdam dhansu, binshaq, kabhi ambarish kumar jee se bat ho to mere bare me jankari aap le sakte hain......</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>samrendra jee, phali baar, pahli baar aapki lekhni se bahut hi andar tak prabhavit hua, ekdam dhansu, binshaq, kabhi ambarish kumar jee se bat ho to mere bare me jankari aap le sakte hain&#8230;&#8230;</p>
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		<title>By: vishnu</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1493</link>
		<dc:creator>vishnu</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 06:04:04 +0000</pubDate>
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		<description>समरेंद्र जी आप सही कह रहे हैं, जिस अभीव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते है, उसी में एक बात यह भी कही जाती है, अभीव्यक्ति एसी हो जिससे किसी जाति विशेष की भावना को ठेस नहीं पहूंचे। लेकिन हुसैंन सहाव ने जीभर के ठेस पहुंचाने का काम किया। मुझे आज तक ये बात नहीं समझ में नहीं आती  कि इस कलाकार को सिर्फ देवी देवता की पेटिंग्स में ही क्यों कला दिखाई देती है,जबकि हमारे आप-पास इतना कुछ पेटिंग करने के लिए है। मुझे कोई मलाल नहीं है कि अब वो हिंदुस्तान के नागरिक हैं, हिंदुस्तान ने हैसेन नहीं खोया है, बल्की एसएफ हुसैन ने हिंदुस्तान खो दिया है। और ये उनकी बदकिस्मती है। यहां एक बात और में कहना चाहुंगा कि जिस देश (क़तर) में उनको नागरिकता दी है, तो क्या वो उस देश के भी देवी-देवताओं की भी पेंटिंग्स बनाए कि हुम्मत एमएफ हुसैन जुटा पाएंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>समरेंद्र जी आप सही कह रहे हैं, जिस अभीव्यक्ति की स्वतंत्रता कहते है, उसी में एक बात यह भी कही जाती है, अभीव्यक्ति एसी हो जिससे किसी जाति विशेष की भावना को ठेस नहीं पहूंचे। लेकिन हुसैंन सहाव ने जीभर के ठेस पहुंचाने का काम किया। मुझे आज तक ये बात नहीं समझ में नहीं आती  कि इस कलाकार को सिर्फ देवी देवता की पेटिंग्स में ही क्यों कला दिखाई देती है,जबकि हमारे आप-पास इतना कुछ पेटिंग करने के लिए है। मुझे कोई मलाल नहीं है कि अब वो हिंदुस्तान के नागरिक हैं, हिंदुस्तान ने हैसेन नहीं खोया है, बल्की एसएफ हुसैन ने हिंदुस्तान खो दिया है। और ये उनकी बदकिस्मती है। यहां एक बात और में कहना चाहुंगा कि जिस देश (क़तर) में उनको नागरिकता दी है, तो क्या वो उस देश के भी देवी-देवताओं की भी पेंटिंग्स बनाए कि हुम्मत एमएफ हुसैन जुटा पाएंगे।</p>
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		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1492</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 02:47:27 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=4920#comment-1492</guid>
		<description>पौलिटिकली करेक्ट होने का मोह-संवरण छोड़ कर एक अच्छा विश्लेषण किया है आप ने! सेकुलरिज़्म के उत्साह में भाई लोग हुसैन को सर पर बिठा ले रहे हैं..
आप की बात से सहमति के बावजूद मैं समझता हूँ कि उन्हे अपनी अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी होनी चाहिये.. जो उन्हे अब तक मिली हुई है.. या थी..
जैसे डेनिश कार्टूनिस्ट को मुहम्मद का स्केच बनाने की आज़ादी है और सलमान रुश्दी को सैटैनिक वर्सेज़ लिखने की .. उसी तरह की आज़ादी हुसैन को भी मिलनी चाहिये.. ये मेरी राय है.. मगर सवाल ये भी है कि इन दूसरे मामलों में सरकार और हुसैन के समर्थको का क्या रुख़ है?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पौलिटिकली करेक्ट होने का मोह-संवरण छोड़ कर एक अच्छा विश्लेषण किया है आप ने! सेकुलरिज़्म के उत्साह में भाई लोग हुसैन को सर पर बिठा ले रहे हैं..<br />
आप की बात से सहमति के बावजूद मैं समझता हूँ कि उन्हे अपनी अभिव्यक्ति की पूरी आज़ादी होनी चाहिये.. जो उन्हे अब तक मिली हुई है.. या थी..<br />
जैसे डेनिश कार्टूनिस्ट को मुहम्मद का स्केच बनाने की आज़ादी है और सलमान रुश्दी को सैटैनिक वर्सेज़ लिखने की .. उसी तरह की आज़ादी हुसैन को भी मिलनी चाहिये.. ये मेरी राय है.. मगर सवाल ये भी है कि इन दूसरे मामलों में सरकार और हुसैन के समर्थको का क्या रुख़ है?</p>
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	<item>
		<title>By: विवेक</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1491</link>
		<dc:creator>विवेक</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Mar 2010 21:00:55 +0000</pubDate>
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		<description>ठीक ऊपर लगी पेंटिंग में हिटलर की तरह ही नंगे हैं हुसैन। अब तो उनके नाम से चिढ़ सी होने लगी है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ठीक ऊपर लगी पेंटिंग में हिटलर की तरह ही नंगे हैं हुसैन। अब तो उनके नाम से चिढ़ सी होने लगी है।</p>
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		<title>By: shirish khare</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1490</link>
		<dc:creator>shirish khare</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Mar 2010 13:54:10 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=4920#comment-1490</guid>
		<description>एक कड़वी सच्चाई है, जिसे छिपाया जा रहा था. आपने सरेआम उजागर  किया. आपकी बातों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है.

तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा हुसैन और तसलीमा को लेकर जिस तरह से दो तरह के पैमाने अपनाए जा रहे हैं, उससे आम जानता में उनका भरोसा डूबने की कगार तक पहुँच चुका है. अब मुश्किल यह कि आपने जैसे ही हुसैन के खिलाफ अपने तर्क रखने शुरू किए, आपको कहा जाएगा आप अज्ञानी है, फिर कहा जाएगा आप संघी हैं या हिन्दू हैं वगैरह. तो इनके हिसाब से केवल हुसैन के खिलाफ जाने का मतलब है संघी बन जाना. इस आधार पर अगर उनके तसलीमा के खिलाफ जाने को अगर नारीविरोधी कहा जाए तो कैसा लगेगा! यह तो आजकल के प्रगतिवादियों की प्रगतिशीलता है. यानी आप उनके हिसाब से उनके तर्कों को आगे बढाओ तब तक तो ठीक है, अन्यथा ऐसी की तैसी आपकी. तो अगर लाठियों को छोड़ तो इनमें और बजरंगियों में कोई ज्यादा फर्क नहीं दिखता है. अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा ख़तरा तो इनदिनों यही हो गया है कि आपने कट्टरपंथियों के खिलाफ कुछ बोला तो पिटाई होगी और अपने को बुद्धिजीवियों समझने वालों से अलग कुछ बोला तो अछूत बना दिया जाएगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>एक कड़वी सच्चाई है, जिसे छिपाया जा रहा था. आपने सरेआम उजागर  किया. आपकी बातों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है.</p>
<p>तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा हुसैन और तसलीमा को लेकर जिस तरह से दो तरह के पैमाने अपनाए जा रहे हैं, उससे आम जानता में उनका भरोसा डूबने की कगार तक पहुँच चुका है. अब मुश्किल यह कि आपने जैसे ही हुसैन के खिलाफ अपने तर्क रखने शुरू किए, आपको कहा जाएगा आप अज्ञानी है, फिर कहा जाएगा आप संघी हैं या हिन्दू हैं वगैरह. तो इनके हिसाब से केवल हुसैन के खिलाफ जाने का मतलब है संघी बन जाना. इस आधार पर अगर उनके तसलीमा के खिलाफ जाने को अगर नारीविरोधी कहा जाए तो कैसा लगेगा! यह तो आजकल के प्रगतिवादियों की प्रगतिशीलता है. यानी आप उनके हिसाब से उनके तर्कों को आगे बढाओ तब तक तो ठीक है, अन्यथा ऐसी की तैसी आपकी. तो अगर लाठियों को छोड़ तो इनमें और बजरंगियों में कोई ज्यादा फर्क नहीं दिखता है. अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा ख़तरा तो इनदिनों यही हो गया है कि आपने कट्टरपंथियों के खिलाफ कुछ बोला तो पिटाई होगी और अपने को बुद्धिजीवियों समझने वालों से अलग कुछ बोला तो अछूत बना दिया जाएगा.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अनुनाद सिंह</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1489</link>
		<dc:creator>अनुनाद सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Mar 2010 11:40:14 +0000</pubDate>
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		<description>हुसेन &#039;सच्चे भारतीय कम्युनिस्ट&#039; साबित हुए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हुसेन &#8216;सच्चे भारतीय कम्युनिस्ट&#8217; साबित हुए।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: मोहिन्दर कुमार</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1488</link>
		<dc:creator>मोहिन्दर कुमार</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Mar 2010 08:45:30 +0000</pubDate>
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		<description>हुसैन जी पर यह लेख आपकी गहरी व पारखी नजर का द्द्योतक है.  आपके द्वारा चिन्हित सभी बिन्दू सटीक व सही हैं.  जितना उन्होनें इस देश को दिया है उससे कहीं अधिक उन्होंने यहां से पाया है फ़िर भी उनकी ललक व भूख नहीं मिटी और उन्होंने यहां के देशवासियों के दिलों को बार बार ठेस पंहुचाई है.

आपने सही लिखा उन्हें यहां की गरीबी व भूख व अन्य समस्याऎं नजर नहीं आई अपितु उनकी कैन्वास पर सिर्फ़ चमकीले और ऐसे रंग उभरते रहे जो एक आम आदमी की समझ से काफ़ी दूर हैं.. और उन्ही पर उन्हें सम्मानित भी किया गया.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हुसैन जी पर यह लेख आपकी गहरी व पारखी नजर का द्द्योतक है.  आपके द्वारा चिन्हित सभी बिन्दू सटीक व सही हैं.  जितना उन्होनें इस देश को दिया है उससे कहीं अधिक उन्होंने यहां से पाया है फ़िर भी उनकी ललक व भूख नहीं मिटी और उन्होंने यहां के देशवासियों के दिलों को बार बार ठेस पंहुचाई है.</p>
<p>आपने सही लिखा उन्हें यहां की गरीबी व भूख व अन्य समस्याऎं नजर नहीं आई अपितु उनकी कैन्वास पर सिर्फ़ चमकीले और ऐसे रंग उभरते रहे जो एक आम आदमी की समझ से काफ़ी दूर हैं.. और उन्ही पर उन्हें सम्मानित भी किया गया.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: shobharam</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1487</link>
		<dc:creator>shobharam</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Mar 2010 16:05:13 +0000</pubDate>
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		<description>samrendraji dho dala. agar apka lekh hussain sahab padhenge to allah se ye hi gujarish karenge ki jindgi ki antim saans apne watan me hi nikle. vese jise apne watan se pyar nahi wo kahin bhi rahe isse koi fark nahi padta.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>samrendraji dho dala. agar apka lekh hussain sahab padhenge to allah se ye hi gujarish karenge ki jindgi ki antim saans apne watan me hi nikle. vese jise apne watan se pyar nahi wo kahin bhi rahe isse koi fark nahi padta.</p>
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	<item>
		<title>By: प्रभात शंकर</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/03/03/samarendra-article-on-mf-hussain-controversy/comment-page-1/#comment-1486</link>
		<dc:creator>प्रभात शंकर</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Mar 2010 15:35:49 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=4920#comment-1486</guid>
		<description>ek achhe lekh ke liye badhai samarendra.....</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ek achhe lekh ke liye badhai samarendra&#8230;..</p>
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