विलुप्त जानवरों का ‘जुरासिक पार्क’ शैली का चिड़ियाघर

हॉलीवुड की विज्ञान-फंतासी फिल्म ‘जुरासिक पार्क’ जैसा चिड़ियाघर वास्तविक रूप ले सकता है। वैज्ञानिक प्रयोगशाला में डायनोसॉर और अन्य विलुप्त जानवरों को बनाने की एक परियोजना पर काम कर रहे हैं। इन जानवरों के अवशेषों की कोशिकाओं से इन्हें दोबारा विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ के मुताबिक कैलीफोर्निया के ला जोला के ‘स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट’ और सान डियागो चिड़ियाघर के शोधकर्ता विलुप्त होने के कगार पर खड़ीं और विलुप्त हो चुकी जातियों को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं।

इक्वेटोरियल गिनी, नाइजीरिया और कैमरून के एक विलुप्त बंदर को खुदाई में मिले एक मृत बंदर की त्वचा कोशिकाओं से स्टेम कोशिकाएं विकसित कर फिर अस्तित्व में लाने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि स्टेम कोशिकाओं को जैव-रासायनिक तरीके से प्रेरित कर उन्हें शुक्राणु और अंडाणु कोशिकाओं में बदला जा सकेगा। बाद में उन्हें अन्य बंदर के गर्भाशय में विकसित कराया जा सकेगा और इससे एक ऐसे भ्रूण का विकास हो सकेगा जिससे विलुप्त बंदर फिर अस्तित्व में आ सकें।

सान डियागो चिड़ियाघर की ‘फ्रोजन जू’ परियोजना के लिए 800 प्रजातियों के 8,400 सदस्यों के नमूने लिए गए थे। कृत्रिम स्थितियों में प्रजनन कराने में इन नमूनों का इस्तेमाल किया जाना है। शोधकर्ता जीएनी लोरिंग कहते हैं कि मृत जानवरों से प्रजनन कराया जा सकता है।

इस प्रक्रिया को विलुप्तीकरण के कगार पर खड़े जानवरों के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। तकनीकी रूप से विलुप्त हो चुके जानवरों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके लिए अन्य प्रजातियों के जानवरों के गर्भ का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पिछले साल पहली बार एक विलुप्त जानवर पाईरीनियन आईबेक्स का क्लोन बनाया गया था। इसके लिए त्वचा के नमूनों और एक घरेलू बकरी के अण्डाणु का इस्तेमाल किया गया था हालांकि जन्म के कुछ समय बाद ही आईबेक्स की मौत हो गई थी। (आईएएनएस)

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Posted by on Jul 2 2010. Filed under स्पेशल रिपोर्ट. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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