विशालतम तारे की खोज, सूरज से 320 गुणा बड़ा

ब्रह्मांड का सबसे बडा सूरज सौर मंडल के अपने सूरज से 320 गुणा बडा है। ब्रिटेन के वज्ञानिक पॉल क्राउदर और उनके साथी वैज्ञानिकों ने इस सूरज यानी तारे की खोज की है।

लंदन के समाचार पत्र में छपी खबरों के मुताबिक यह सूरज तरंतुला निहारिका में स्थित है। तरंतुला निहारिका लार्ज मैजिलैनिक क्‍लाउड का हिस्‍सा है – यह एक छोटी गैलेक्‍सी है और अपनी मिल्‍की वे का चक्‍कर लगा रही है।

शेफील्‍ड विश्‍वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिकों ने यूरोपियन साउदर्न ऑब्‍जर्बेटरी के चीली में तैनात विशालकाय टैलीस्‍कोप और हब्‍बल स्‍पेस टेलीस्‍कोप से हासिल आंकडों को मिलाकर इस विशालतम तारे की खोज की है। इस तारे का नाम ‘आर 136ए1′ रखा गया है।

इससे पहले ब्रह्मांड के जिन विशालतम तारों की खोज हुई थी, उनका आकार सूरज से करीब 150 गुणा बडा था।

जैसे जैसे तारे का आकार बडा होता जाता है वैसे वैसे उसके केंद्र में पैदा होने वाली ऊर्जा बढती जाती है। एक सीमा के बाद यह ऊर्जा गुरुत्‍वाकर्षण बल को पार कर जाती है। जिससे तारे में विस्‍फोट या तारे के टूटने की घटना होती है। इस सीमा को एडींगटन लिमिट कहते हैं। यह तारा इस लिमिट के आस पास ही ठहरता है।

इसी तरह तारे का आकार जितना बडा होता है, उतनी ही जल्‍दी वह ऊर्जा खोता है और उसी तेजी के साथ उसका आकार भी घटता है।

माना जा रहा है कि इस नए तारे का आकार शुरू में अपने सूरज से 320 गुणा अधिक था, लेकिन कुछ करोड सालों के सफर में इसने अपना आकार कुछ खोया है और फिलहाल यह अपने सूरज से मात्र 265 गुणा बडा ही रह गया है।

इधर अपना सूरज पिछले 4 अरब 57 करो्ड सालों में सिर्फ 0.03 फीसदी घनत्‍त्‍व ही खोया है, लेकिन विशालतम तारा आर136ए1 एडींगटन लिमिट के आस पास ठहरता है, इसलिए इसने काफी तेजी के साथ्‍ा अपना आकार और घनत्‍त्‍व खोया है।

माना जा रहा है कि इस तारे की सतह का तापमान 40 हजार डिग्री सेल्सियस है और यह सूरज से एक करोड गुणा अधिक तेज चमता है।

अब तक विशालतम तारों में पिस्‍टल स्‍टार और एटा कैरिने का नाम आता था, जो अपने सूरज से क्रमश: 150 और 100 गुणा अधिक बडे हैं। अपना सूरज एक साल में जितनी ऊर्जा खोता है, उतना पिस्‍टल स्‍टार सिर्फ 20 सैकेंड में खोता है।

प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका एस्‍ट्रॉनोमी नाउ के मुताबिक आर136ए1 से जितनी ऊर्जा मिलती है, वह ओरियन निहारिका के सभी तारों से मिलने वाली ऊर्जा से अधिक है। और यदि यह अपने सौरमंडल में होता, तो सूरज से उतना ही अधिक चमकता, जितना कि सूरज चांद की तुलना में अधिक चमकता है।

इस खोज से जुडे प्रमुख वैज्ञानिक क्राउदर ने कहा कि अब इससे अधिक बडे तारे की कल्‍पना नहीं की जा सकती है। या इस रिकार्ड को टूटने में काफी समय लग जाएगा।

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Posted by on Jul 23 2010. Filed under टेक्नॉलोजी, सुर्ख़ियां, स्पेशल रिपोर्ट. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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