प्रधानमंत्री के चुनाव में फिर फेल हुआ नेपाल

नेपाल इस मामले में तीसरी बार अभागा साबित हुआ है, क्योंकि नेपाली संसद लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री का चुनाव कर पाने में विफल साबित हुई है। लिहाजा प्रधानमंत्री के चुनाव का चौथा चक्र अब गुरुवार को आयोजित होगा।

पार्टियों ने उन चेतावनियों को दरकिनार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नेपाली संसद देश में और देश के बाहर एक नए प्रधानमंत्री के निर्वाचन में अपनी विफलता के लिए मजाक का विषय बन रहा है। इसके साथ ही पार्टियों ने अपने अड़ियल रुख छोड़ने से इंकार कर दिया, परिणामस्वरूप सोमवार को भी प्रधानमंत्री का चुनाव गतिरोध के बीच उलझ कर रह गया।

तो माओवादियों के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री, पुष्प कमल दहाल प्रचंड 599 सदस्यीय संसद में साधारण बहुमत जुटा पाए और न तो उनके एक मात्र प्रतिद्वंद्वी, पूर्व उपप्रधानमंत्री नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के राम चंद पौडेल ही।

माधव कुमार नेपाल के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के एक महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उनके उत्तराधिकारी का चयन न हो पाने का संकेत मिलते ही सदन के अध्यक्ष सुभाष नेम्बांग ने चुनाव के चौथे दौर की नई तारीख तय करने के लिए तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों-माओवादियों, नेपाली कांग्रेस (एनसी) और कम्युनिस्टों के मुख्य सचेतकों की बैठक बुलाई।

सोमवार को सांसद, जैसे ही प्रचंड और पौडेल में से किसी एक को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के रूप में चुनने के लिए मतदान को तैयार हुए, तभी कम्युनिस्टों और करीब 10 दलों ने मतदान न करने का ऐलान कर दिया। जिससे एक और विफलता के आसार दिखने लगे।

सोमवार के चुनाव से पूर्व तराई की चारों राजनीतिक पार्टियों के ब्लॉक और माओवादियों में कोई सहमति न बन पाई और इसके बाद उन्होंने माओवादियों को समर्थन देने के मसले पर विचार के लिए अपने गठबंधन सहयोगियों की बैठक शुरू कर दी।

नेपाल की संसद में माओवादियों की पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है और प्रचंड को साधारण बहुमत हासिल करने के लिए महज 70 मतों की जरूरत है। लेकिन माओवादी पार्टी मात्र 259 वोट ही हासिल कर पाई। जबकि 114 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट दिया और 208 सांसदों ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। लगभग 20 सांसद तो सोमवार के चुनाव में हिस्सा लेने के लिए आए ही नहीं।

प्रचंड ने हालांकि सोमवार को अपनी स्थिति थोड़ी मजबूत जरूर कर ली। पिछली बार के चुनाव के बनिस्बत इस बार उन्हें 18 वोट अधिक प्राप्त हुए। इसके साथ ही तराई की चार प्रमुख पार्टियों ने कहा कि माओवादियों के साथ उनकी एक जैसी पृष्ठभूमि है। लिहाजा गुरुवार के चुनाव में प्रचंड की स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।

माओवादियों ने दो वर्ष पूर्व हुए चुनाव में 237 सीटें जीती थी और नेपाल के इतिहास में पहली बार माओवादी सत्ता पर काबिज हुए थे। सोमवार के चुनाव के लिए एक छोटी कम्युनिस्ट पार्टी, नेपाल वर्कर्स एंड पीजेंट्स पार्टी ने माओवादियों को समर्थन देने का आश्वासन दे दिया था। इस पार्टी के पास पांच सांसद हैं।

किसी समय नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी रही एनसी, 2008 के चुनाव में मात्र 114 सीटें हासिल कर पाई थी, लिहाजा सरकार बनाने के लिए उसे कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। सोमवार के चुनाव में उसे मात्र 124 सांसदों ने ही वोट दिया। 146 सांसदों ने खिलाफ में मतदान किया। 186 सांसद मतदान से अनुपस्थित रहे और 43 सांसदों ने मतदान नहीं किया।

चुनाव तय समय से चार घंटे देर से शुरू हुआ। इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस बार की कसरत भी जाया जाएगी। क्योंकि चुनावी दौड़ से बाहर दो बड़ी पार्टियों ने मतदान से अनुपस्थित रहने की घोषणा कर दी थी। पिछली बार भी इन दोनों पार्टियों ने ऐसा ही किया था।

दूसरी ओर नेपाल के एक टेबलायड अखबार ने सोमवार को राजनीतिक पार्टियों की जमकर खिंचाई की। अखबार ने पार्टियों को चेतावनी दी है कि नेपाली संसद और प्रधानमंत्री का चुनाव नेपाली जनता और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरों में एक मजाक बन गया है।

समाचार पत्र ‘नया पत्रिका’ ने प्रथम पृष्ठ पर अपनी संपादकीय में लिखा है, “यदि संसद इस देश को एक प्रधानमंत्री भी नहीं दे सकती, तो सभी सांसदों (599) को बेकार घोषित कर दिया जाना चाहिए।”(आईएएनएस)।

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Posted by on Aug 3 2010. Filed under देश - दुनिया. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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