विभूति के वैभव से मोहित “जसम” वाले अब धमकाने लगे हैं…
यह बहुत शर्मनाक है। विभूति के बचाव की व्यूह रचना करने वाले जसम के लोग अब डराने-धमकाने लगे हैं। आज दोपहर जसम के सुधीर सुमन ने मोहल्ला लाइव के मॉडरेटर अविनाश को फोन किया और धमकी दी। यह सारा ब्योरा उन्होंने अपनी वेबसाइट पर दिया है। यह एक बहुत ही घृणित सोच है और यह सोच जाहिर करती है कि जसम में अब स्वार्थों की दीमक इस हद तक लग चुकी है कि उसका पतन होना तय है। अगर लोग इस संस्था को जीवित रखना चाहते हैं तो उन्हें सुधीर सुमन जैसे लोगों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। यहां एक बात और साफ कर दी जाए कि जसम की तरफ से दो प्रेस विज्ञप्तियां जारी की गई हैं। पहली राष्ट्रीय महासचिव प्रणय कृष्ण की तरफ से और दूसरी विज्ञप्ति सचिव भाषा सिंह की तरफ से। दोनों विज्ञप्तियों की भाषा का अंतर बहुत कुछ कहता है। प्रणय कृष्ण की भाषा एक भोकुस मर्द की भाषा है जो विभूति के बयान से उतना आहत नहीं हो सकता। जबकि भाषा सिंह की भाषा एक स्त्री की पीड़ा बयां करती है। अब जसम के बाकी लोगों को तय करना है कि विभूति प्रकरण पर वो कौन सी बोली बोलना चाहते हैं? एक सामंती, भोकुस, दलाल मर्द की या फिर एक संवेदनशील स्त्री की। आखिरी बात, यहां पर कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि भाषा सिंह ने कोई विज्ञप्ति नहीं भेजी है। यहां हम उनको बता दें कि उनकी तरफ से एक विज्ञप्ति भेजी गई है और खुद उनके ई-मेल से भेजी गई है। - मॉडरेटर
अभी थोड़ी देर पहले, 1 बजकर 36 मिनट पर, समकालीन जनमत के संपादक और जन संस्कृति मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी सुधीर सुमन ने बताया है कि भाषा सिंह के नाम से जो प्रेस विज्ञप्ति छापी गयी है, वह उन्होंने नहीं जारी की है। न ही ऐसा कोई बयान उन्होंने दिया है। उन्होंने लगभग चीखते हुए कहा कि मोहल्ला पर जो तुम कर रहे हो, अगर तुमने ये हरकत बंद नहीं की – तो इसका अंजाम बुरा होगा। तुम देख लेना। उन्होंने भोपाल के “बलात्कार प्रसंग” की घुड़की दी और कहा कि तुमने तो उसके लिए माफी भी नहीं मांगी।
सुधीर सुमन को उक्त प्रसंग में मोहल्ला ब्लॉग के आर्काइव पलटने चाहिए और देश के, भोपाल के किसी भी थाने से निकाल कर कोई शिकायत भी पाठकों के सामने रखना चाहिए। आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाने की विक्षिप्तता में मामूली मर्यादा से भी ऊपर उठ कर बात करने की अगर उनकी शैली है और अगर वो एक ताकतवर संगठन के अहंकार संचालित हो रही है – तो माफ कीजिएगा मैं एक दौ कौड़ी का आदमी, उससे डरने वाला नहीं हूं। यह जानते हुए कि दुष्प्रचार के मलबे जुटा कर आप इतिहास क्या, वर्तमान से भी किसी को उठा कर फेंकने में सक्षम हैं।
सुधीर सुमन की तसल्ली के लिए मैं भाषा सिंह के नाम से जारी जनसंस्कृति मंच की प्रेस विज्ञप्ति की स्कैन कॉपी सार्वजनिक कर रहा हूं।
दूसरे किन्हीं अवधेश ने टिप्पणी की है…
प्रिय अविनाश,
तुमने मॉडरेटर के बतौर जो टिप्पणी लगायी है, वे तथ्यतः गलत हैं। प्रणय कृष्ण के वर्धा जाने और वहां के छात्रो के आंदोलन की तारीखें RTI के जरिये तुम्हे मिल सकती हैं। उन्हें हासिल कर अपने ब्लॉग पर लगाओ तो बात सामने आये। उम्मीद है तुम ऐसा करोगे। यदि जरा सा भी नैतिकता है तो गलत प्रचार करके चरित्र हनन के लिए माफ़ी मांगो, नहीं तो इसका करार जवाब दिया जाएगा।रामजी राय जब 13 को वहां आतिथ्य ग्रहण कर लें तो तुम्हारी जय-जय, नहीं तो तुम्हें इसके लिए भी माफ़ी मांगनी चाहिए। जन संस्कृति मंच से तुम्हारी जो भी दुश्मनी है, उसे व्यक्तिगत स्तर पर चरित्र हनन के जरिये हल करने की कोशिश मत करो। वैसे तो किसी भी व्यक्ति के किसी जगह जाने या उसके रहते अन्य लोगों द्वारा के घटनाएं होती हैं, उस पर उस व्यक्ति का क्या बस। चूंकि तुम्हारी जानकारियां पूरी तरह गलत हैं, इसलिए आगाह करना जरूरी था।
मैं झूठे नाम पते से मेल करने में यकीन नहीं रखता, इसलिए मेरा नाम पता ये रहा – अवधेश, 152/6, हरी नगर आश्रम
अवधेश भाई, तारीखें निकल भी जाएंगी और आंदोलन के डेट्स भी सामने आ जाएंगे – लेकिन मेरी जिज्ञासा ये है कि वर्धा के छात्रों के आंदोलन और वहां के दलित शिक्षक कारुण्यकारा के वीएन राय द्वारा उत्पीड़न की खबरें सामने आने के बाद जन संस्कृति मंच का कहीं कोई बयान सामने आया या नहीं। आया, तो कृपया हमारे पास भेजने की कृपा करें – हम उसे सार्वजनिक करेंगे। अव्वल, सूचना तो ये है कि विभूति नारायण राय के कृत्यों का महज आभासी जिक्र आ जाने से ही अनिल चमड़िया के एक लेख को जनमत ने छापने से मना कर दिया था। इस बारे में भी आपके स्पष्टीकरण का इंतजार रहेगा।
यह तथ्यत: सही है कि अगले हफ्ते रामजी राय और हिरावल की टीम के वर्धा जाने का कार्यक्रम बना हुआ था (है या नहीं, पता नहीं – कमेंट बॉक्स में इस बारे में कोई भी जानकारी शेयर की जा सकती है…), लेकिन अगर इस पूरे प्रकरण के बाद वहां जाने का कार्यक्रम रद्द किया जाता है – तो यह सराहनीय कदम होगा। इस कार्यक्रम की सूचना मुझे रामजी भाई के अभिन्न मित्र और वरिष्ठ हिंदी कवि दिनेश कुमार शुक्ल के माध्यम से मिली थी। बहरहाल…
आदित्यनाथ नाम के एक सज्जन, जो पता नहीं क्यों अपने असल नाम से नहीं आ रहे हैं, भोपाल प्रसंग में दुष्प्रचार की फेहरिस्त पर फेहरिस्त हर जगह चस्पां कर रहे हैं। एक ब्लॉग का लिंक भी उन्होंने लगाया है, जिसमें सिर्फ एक ही पोस्ट है और लगता है कि इसी पोस्ट के लिए इस ब्लॉग का निर्माण किया गया है। पोस्ट क्या, एक सवाल है – जो मैं यहां रख ही देता हूं…
वी एन राय और अविनाश में से कौन है राठौर?
मोहल्ला ने ताजा पोस्ट का शीर्षक दिया है ‘राठौर की मुस्कान लेकर वी एन राय ने दिया चैनलों को बाइट’। आपकी समझ से कौन है राठौर के नजदीक?
नाम : वीएन राय
करतूत : छिनाल अपशब्द बोलना
अंजाम : माफी मांगी
अभी की स्थिति : पूर्व-पुलिस अधिकारी और वीसीनाम : एसपीएस राठौर
करतूत : बलात्कार का आरोपी
अंजाम : जेल में
अभी की स्थिति : पूर्व पुलिस अधिकारीनाम : अविनाश
करतूत : बलात्कार का आरोपी
अंजाम : कोई कार्रवाई नहीं
अभी की स्थिति : मोहल्ला ब्लॉग के मॉडरेटर
ये सवाल बहुत क्रिएटिव है और जन संस्कृति मंच के सिपहसालारों से इसी क्रिएटिविटी की उम्मीद बाकी रह गयी थी। जिन्हें भोपाल प्रसंग का किस्सा नहीं पता है, उन्हें बता दें कि वहां डेली टेबलॉयड के आक्रामक तेवर की धूप में घटित उस प्रसंग में कहीं कोई शिकायत नहीं है, कहीं कोई एफआईआर नहीं है – कुछ अफवाहें हैं, कुछ गॉशिप्स हैं, कुछ दुष्प्रचार है और इन लिजलिजे हमलों के लिए नैतिकता के तहत दिया गया एक इस्तीफा है। तब से लेकर आज तक किसी भी सांस्थानिक या कॉरपोरट घरानों का हिस्सा नहीं बनने की जिद और संकल्प को चाहें भी, तो जन संस्कृति मंच के लोग हमसे छीन नहीं सकते।
शुक्रिया साथियो!
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Short URL: http://www.janatantra.com/news/?p=15637







jan sanskriti manch ko hum log bahut achchha samajhate rahe, lekin ab theek nahi lag raha. VN Rai ko inhe bahar ka raasta dikhana chahiye. Saath hi Sudhir Suman ko Avinash se maufi mangani chahiye. Virodh ka bahut hi ochha tareeka hai.
सुधीरजी,आपको जितना मन हो अविनाश को पुरानी बातों की याद दिलाकर घुड़की दें,बस आपसे अपील है कि मामले को डायवर्ट न करें-यहां मुद्दा वी.एन.राय की आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल और बेशर्मी से माफी मांग लेने का है,अविनाश का अतीत नहीं। आगे जो भी बातें करें। आप ही जैसे लोग दिन-रात वर्चुअल स्पेस की बहस को कोसते हैं,उसकी भाषा को लेकर सवाल पैदा करते हैं लेकिन जब जेनुइन सवाल यहां उठाए जाते हैं तो उसे वेवजह कुचलने की कोशिशें करते हैं। यहां मैं देख रहा हूं कि अब तक वी.एन राय को लेकर जो गंभीर बहस हो रही थी, एक भी पोस्ट में हल्की बातें नहीं है। जिस मुद्दे को उठाने का माद्दा न तो मेनस्ट्रीम मीडिया को है( अभी के लिए हिन्दी मीडिया), न तो साहित्यिक मंचों को और न ही ब्लॉगरों की भ्रष्ट भाषा की दुहाई देनेवाले हिन्दी के तथाकथित बुद्धिजीवियों को, उसे आप जैसे लोग इरादतन डायवर्ट करने का कुचक्र रच रहे हैं। मुझे समझ नहीं आता कि आप बुद्धिजीवियों की नेकनियती और सलाहियत तब कहां चली जाती है जब अपने पाले लोग के फंसते नजर आते हैं। आपलोगों को एक लेखक की हैसियत से इस पूरे मामले का विरोध नहीं किया जाना चाहिए था कि ये काम सिर्फ महिला लेखिकाओं का ही है..। सच्चाई ये है कि मामले की गंभीरता के बजाय सब चमकाने चले आते हैं।
बहुत शर्मनाक है. बहुत शर्मनाक!!
विभूति जी के छिनाल प्रकरण से जहाँ उनका स्त्री-विरोधी चरित्र उजागर हुआ है, वहीं इस बीच उनकी इस बात से हमलोगों का ध्यान थोड़ा हट गया है कि उन्होंने हंस की गोष्ठी में यह भी कहा कि राज्य की हिंसा जायज है ! पता नहीं यह बात उन्होंने लेखक के बतौर कही, या वीसी के बतौर या दारोगा के बतौर. यह जसम तय करे और अगर उन्होंने लेखक के बतौर कही हो तो उनसे सॉरी बुलवाए, वैसे इस बीच कृष्णमोहन जी जसम से निकाले गए थे एक लेखक के बतौर. शायद वे भी सॉरी बोल लें तो वापस बुला लिए जाएँ. और अगर नीरो वाजपेयी जी यह घोषित कर दें कि वे कविता एक कवि बतौर करते थे तो उनका भी स्वागत है .
हद है. यह सब तब, जब जसम की शुरुआत ही साहित्य और सामाजिक संघर्षों के बीच की दूरी पाटने और राज्य की हिंसा के वर्गीय आधार के भंडाफोड़ के लिए हुई थी.
मोहल्ला पर इस मुद्दे पर जसम के एक तरफदार ने एक जगह लिखा है “राजीव कुमार सुमन उर्फ चमड़िया गिरोह” !!!!
सर जी आप जसम की तारीफ़ कर रहें हैं और अनिल चमडिया को गिरोह कह रहें हैं तो उनके मामले में जसम की भूमिका वैसे ही स्पष्ट हो जाती है. अब प्रणय जी को आपके जैसे शीर्षासन रत तो मशालची मिले हैं जो अपना ही झोंटा फूंक दें !!
आदित्यनाथ अगले कुछ दिन इंतज़ार करो। दूध का दूध पानी का पानी सब साफ हो जाएगा। पता चल जाएगा कि जसम के कौन-कौन से दलालों ने विभूति से क्या-क्या हासिल किया है? कितने कार्ड होल्डर, कहां-कहां तैनात हैं. बस थोड़ा इंतज़ार करो। अब घर फूंकने पर आमादा हो तो यही सही। पूरी दुनिया तमाशा देखेगी। फिर देखते हैं कि ये सारे सवर्ण मिलकर किस तरह किस तरह की साजिश रचते हैं। रामजी राय ने कहां जमीन ली है। तुम्हारा किससे कैसा रिश्ता है? प्रणय कृष्ण ने क्या खेल किया है? जसम के कौन कौन से पदाधिकारी और कार्यकर्ता कहां-कहां पद हासिल कर चुके हैं? सारी दलाली सबके सामने होगी। चिंता मत करो। अब तुमने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। मधुमक्खी के साथ एक बुरी बात होती है। जब जान पर बन आए तो वो हमला करके मरती है। क्योंकि डंक मारने के बाद वो जिंदा नहीं बचती। इसलिए अब तुम इंतजार करो। तुम सबके सब बेनकाब होओगे। मैं यह भी जानता हूं कि तुम लोग बच जाओगे। लेकिन तुम लोगों के घिनौने चेहरों से पर्दा उठ चुका होगा।