नक्सलियों ने बंधक पुलिसकर्मियों को छोड़ा
बिहार में एक इमोशनल ड्रामे के बाद नक्सलियों ने पुलिस के तीनों बंधकों को रिहा कर दिया है। ये तीनों बीते नौ दिन से नक्सलियों के कब्जे में थे और इनकी रिहाई के एवज में नक्सली अपने साथियों को छोड़ने की मांग कर रहे थे। दबाव बनाने के चक्कर में उन्होंने बंधक बनाए गए चौथे पुलिसकर्मी लुकास टेटे की हत्या भी कर दी थी। जिसके बाद सभी ने उनकी घोर आलोचना की। उसी दबाव में उन्होंने तीनों पुलिसकर्मियों को रिहा किया है। पुलिस के आला अधिकारियों ने भी इस ख़बर की पुष्टि कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि अंत भला तो सब भला।
ख़बरों के मुताबिक ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर अभय यादव, सब-इंस्पेक्टर रूपेश कुमार और बिहार मिलिट्री पुलिस के हवलदार एहसान ख़ान को नक्सलियों ने लखीसराय के करीब लाखोचक गांव में रिहा किया। नक्सलियों ने इसकी सूचना उनके घरवालों को दी। जिसके बाद पुलिस की एक टीम उन तीनों पुलिसकर्मियों को लाने गई। सूत्रों के मुताबिक वो सभी अच्छी स्थिति में हैं। उन्हें दोपहर बाद पटना लाया जाएगा।
बीते कुछ दिनों में बंधकों को छुड़ाने के लिए चालू किए गए तलाशी अभियान में सात माओवादी पकड़े गए हैं और इसमें एक एरिया कमांडर भी है।
माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने कहा है कि तीनों को उनके कुछ परिजनों को सौंप दिया गया। रिहाई में हुई देरी के बारे में अविनाश का कहना था कि पुलिसकर्मियों को परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने की कोशिशों में देर हुई है।
Last 5 posts by डेस्क
- फिर से शुरु हो रहा है जनतंत्र - July 2nd, 2011
- अब ब्लड कैंसर नहीं रहेगी लाइलाज बीमारी - February 20th, 2011
- स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन की खोज - February 20th, 2011
- जी-20:आर्थिक असंतुलन से निपटने पर सदस्य देशों के बीच उभरे मतभेद - February 20th, 2011
- राहत को नहीं मिली 'राहत', फेमा और कस्टम एक्ट के तहत आरोप तय - February 19th, 2011
Short URL: http://www.janatantra.com/news/?p=17561







From this fiasco whose end is not clear in site, it is very clear that a state can be put to ransom by group of ppl which thrives on the propaganda of being well wisher of exploited section of society. Very likely it seems to be a political vehicle. it remains to be seen if Nitish babu or some one else uses it to reach CM house at Patna. I just hope that gud sense prevail to Maoists to release those police personnel. Such ploy on their part will only strengthen the hands of opportunists.