नीतीश ने माओवादियों से की हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील

बिहार में बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संतोष प्रकट हुए नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

पुलिसकर्मियों की रिहाई के बाद पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने सोमवार को कहा कि इस रिहाई में बुद्घिजीवियों, पत्रकारों, सभी राजनीतिक दलों के लोगों, अधिकारी तथा पुलिस सभी ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई। यही कारण है कि बंधक बनाए गए पुलिसकर्मी रिहा हो सके।

इस बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद ने बंधक पुलिसकर्मियों की रिहाई के बाद नीतीश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए सोमवार को कहा कि इसका श्रेय किसी को नहीं लेना चाहिए।

लालू ने पटना में कहा, ”इस मामले में कोई क्रेडिट ना ले। इसके लिए पुलिस, सभी दलों के सदस्यों, मीडिया और बुद्घिजीवियों ने अपील की थी जिसके कारण मानवता के हित में नक्सलियों ने बंधकों को रिहा किया। इसमें सरकार और पुलिस का कोई रोल नहीं है। ”

उन्होंने कहा, ”आज सुबह भी लोग निराश थे परंतु कुछ ही देर बाद यह सुकून देने वाला समाचार आया। आज खुशी का दिन है। मैं नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने की अपील करता हूं। हिंसा से नहीं, अहिंसा से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।

उधर बिहार में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिहार के चुनावों में हर बूथ पर केंद्रीय बल तैनात हों क्योंकि नक्सली चुप नहीं बैठेंगे। साथ ही उन्होंने नक्सलियों से भी चुनाव में भाग लेने का आह्वान किया।

उनका कहना था, “मेरा ये विनम्र निवेदन है बल्कि मेरी केंद्र से ये मांग है कि शत-प्रतिशत बूथ पर केंद्रीय बल तैनात हों क्योंकि राज्य पुलिस के पास और भी कई काम हैं। देश में उस समय कोई और चुनाव भी नहीं है और इस तैनाती का खर्च राज्य सरकार उठाएगा।

नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार और लोगों को चेताया और कहा कि उन्हें यह भूलना नहीं चाहिए कि ये नक्सली कार्रवाई चुनाव से ठीक पहले हुई है और फिर से हो सकती है।

उनका कहना था कि इसलिए ये ज़रूरी है कि चुनाव भयमुक्त माहौल में संपन्न हों।

मुख्यमंत्री ने माओवादियों से भी अपील की है कि वो हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं। उन्होंने कहा कि मैं आज नक्सलियों से अपील करता हूं कि हिंसा से कोई कुछ हासिल नहीं कर सकता। भारत जैसे देश में हिंसा के जरिए सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता।भारत में लोकतंत्र के अलावा कुछ कामयाब नहीं होगा। नक्सलियों को हिंसा त्यागने में देरी नहीं करनी चाहिए।

उनका कहना था,इसमें देर क्यों? अभी बिहार के चुनाव में शामिल हो जाएं और जिनके प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं खुलकर उनका नेतृत्व करें। और सरकार तथा व्यवस्था के अंदर रहकर अपनी आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वे उनलोगों की बेहतर भलाई कर सकते हैं जिनके लिए वो लड़ाई लड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने राज्य के पुलिसकर्मियों के धैर्य और संयम की भी प्रशंसा की। इसके साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मी लुकस टेटे की हत्या पर दुख भी प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने बिहार की जनता को एकजुटता दिखाने के लिए भी धन्यवाद दिया।

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Posted by on Sep 6 2010. Filed under तीर-ए-नज़र, देश - दुनिया. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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