राम जन्म भूमि,बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक पर फैसला 24 सितम्बर को
देश की सबसे विवादित और संवेदनशील अयोध्या में राम जन्म भूमि, बाबरी मस्जिद परिसर के मालिकाना हक संबंधी दीवानी दावों पर चल रहे मुकदमे का फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ आगामी 24 सितम्बर को सुनाएगी।
इस मुकदमे में एक पक्ष सेन्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने इसकी पुष्टि की। इस मुकदमे की सुनवाई गत 26 जुलाई को पूरी हुई थी। अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था और सितम्बर के दूसरे पखवाडे़ में निर्णय सुनाने की घोषणा की थी। न्यायालय ने कहा था कि फैसले की तिथि एक सप्ताह पहले बता दी जाएगी।
देश के ऐतिहासिक मुकदमों में एक श्रीराम जन्मभूमि, बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक के लिए 60 साल से चल रहे मुकदमे की सुनवाई गत 26 जुलाई को पूरी हुई थी। न्यायमूर्ति एस यू खान, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति डीवी शर्मा की विशेष खण्डपीठ ने गत फरवरी से प्रतिदिन इस मुकदमे की सुनवाई की।
अदालत को मुख्य रूप से यह तय करना है कि जिस स्थान पर विवादित बाबरी मस्जिद स्थित थी वह किसकी संपत्ति है। यह जमीन लगभग 1250 वर्ग मीटर है।
मालिकाना हक को लेकर मुकदमा 16 जनवरी 1950 से शुरू हुआ था। इस मामले में 1996 से शुरू हुई बहस 14 वर्षों तक चली। इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट की तीन खंडपीठों में रिकार्ड किया गया।
गौरतलब है कि अयोध्या विवाद भारत के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और देश की राजनीति को एक लंबे अरसे से प्रभावित करता रहा है।
विश्व हिंदू परिषद की मांग है कि सरकार संसद में कानून बनाकर विवादित ज़मीन उसे एक विशाल राम मंदिर बनाने के लिए दे दे।
विवाद को बातचीत से हल करने की कोशिश भी अब तक सफल नही हुई हैं।
इस फैसले को लेकर पूरे देश में सरगर्मी है और केंद्र तथा राज्य सरकार कोर्ट के फैसले के बाद संभावित चुनौतियों से निबटने की तैयारी कर रही हैं. मुख्य चुनौती शांति व्यवस्था बनाए रखने की है, क्योंकि हिंदू ओर मुस्लिम दोनों समुदाय भावनात्मक रूप से इससे जुड़े हैं।
माना जाता है कि अंतिम फैसला अपील के जरिये सुप्रीम कोर्ट में तय होगा।
भारतीय जनता पार्टी और विश्वहिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों का दावा है कि हिंदुओं के आराध्यदेव राम का जन्म ठीक वहीं हुआ जहाँ बाबरी मस्जिद थी।
उनका दावा है कि बाबरी मस्जिद दरअसल एक मंदिर को तोड़कर बनवाई गई थी और इसी दावे के चलते छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई।
इसके अलावा वहाँ ज़मीन के मालिकाना कब्ज़े का विवाद भी है।
मुकदमे में फैसला आने के पहले ही राजनीति शुरू हो गई है। विश्व हिन्दू परिषद राममंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने के लिए 16 अगस्त से 17 दिसम्बर तक पूरे देश में हनुमत शक्ति जागरण अभियान चला रखा है।
इसके तहत अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए जनजागरण किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत संसद में कानून बनाकर राममंदिर निर्माण के लिए जनमत तैयार करने की भी घोषणा की गई है।
Last 5 posts by डेस्क
- फिर से शुरु हो रहा है जनतंत्र - July 2nd, 2011
- अब ब्लड कैंसर नहीं रहेगी लाइलाज बीमारी - February 20th, 2011
- स्तन कैंसर के लिए जिम्मेदार जीन की खोज - February 20th, 2011
- जी-20:आर्थिक असंतुलन से निपटने पर सदस्य देशों के बीच उभरे मतभेद - February 20th, 2011
- राहत को नहीं मिली 'राहत', फेमा और कस्टम एक्ट के तहत आरोप तय - February 19th, 2011
Short URL: http://www.janatantra.com/news/?p=17743






