जाति आधारित जनगनणा को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी,अगले साल जून से होगी शुरू

आखिर लंबे कशमकश तथा विपक्षी दलों के कड़ी आपत्ति के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने आखिर विपक्षी दलों के मांगों के आगे झुकते हुए कहा है कि अब जाति जनगणना को बायोमैट्रिक्स प्रक्रिया से अलग कर दिया है और अगले साल जून से सितंबर के बीच घर-घर जाकर अलग से जाति जनगणना होगी।

मंत्रिमंडल के फ़ैसलों की जानकारी देते हुए गृहमंत्री पी चिदंबरम ने बताया कि सरकार ने अब जाति आधारित जनगणना को बायोमैट्रिक्स प्रक्रिया से अलग कर दिया है जिसे लेकर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। आब सामान्य जनगमणा और जाति आधारित जनगनणा अलग-अलग होगी।

बायोमिट्रिक जनगणना का दौर दिसंबर से शुरु होने की उम्मीद है। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की फ़ोटो, उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों की तस्वीरें ली जाएँगी।.

इस बीच सामान्य जनगणना की प्रक्रिया चलती रहेगी।

इससे पहले कई महीनों की बहस और अनिश्चितता तथा विपक्षी दलों की कड़ी आपत्ति के बाद आख़िर केंद्र के मंत्रिमंडल समूह ने जाति आधारित जनगणना को अगस्त में मंजूरी दे दी थी।

सरकार ने जाति आधारित जनगनणा पर विपक्षी दलों के कड़े तेवर और विरोध तथा मंत्रिमंडल के अंदर ही विरोध को देखने के बाद इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने के लिए एक मंत्रिमंडल समिति बनायी थी।

इस मंत्रिमंडलीय समिति ने सिफारिश की थी कि जाति आधारित जनगणना बायोमिट्रिक जनगणना का दौर शुरु होने के साथ ही शुरु होगी।

चिदंबरम ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह विचार किया गया कि जाति जनगणना इस तरह से की जाए कि नियमित जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता बनी रहे। इसलिए जाति आधारित जनगणना अलग से कराने का फैसला किया गया है।

मंत्रिमंडल के फ़ैसले के अनुसार अब जनगणना के दो अलग-अलग आँकड़े मिलेंगे। एक तो हर दशक में होने वाले सामान्य जनगणना के और दूसरा 2011 में होने वाली जाति जनगणना के।

अधिकारियों का कहना है कि इस जाति आधारित जनगनणा में जो लोग अपनी जाति के बारे में जानकारी नहीं देना चाहते, उन्हें इसकी छूट होगी।

चिंदबरम ने ने फिलहाल जाति आधारित जनगणना में आने वाले खर्च के बारे में अनुमानित राशि के बारे में नहीं बताया।लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें खर्च तो अवश्य होगा क्योंकि यह एक अलग प्रकिया होगी। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री के नेतृत्व में यह आकलन बाद में किया जाएगा।

गौरतलब है कि हर दस साल में होने वाली जनगणना पहली अप्रैल से शुरु हुई है। विपक्षी दलों ने इस जनगणना में जाति आधारित जनगणना को शामिल किए जाने की मांग की थी और इसे लगभग सभी विपक्षी दलों का समर्थन था।

कांग्रेस के भीतर इसे लेकर मतभेद था लेकिन बाद में मंत्रिमंडलीय समिति ने इसे मंजूरी दे दी थी।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद,मुलायम और शरद यादव ने जाति आधारित जनगनणा का समर्थन किया था। जबकि कई दलों ने इसका विरोध किया था।

उल्लेखनीय है कि 1931 के बाद पहली बार जाति आधारित जनगनणा कराई जा रही है।

एजेंसियां

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Posted by on Sep 9 2010. Filed under देश - दुनिया, सुर्ख़ियां, स्पेशल रिपोर्ट. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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