पत्रकार पराजित महसूस कर रहे हैं और मठाधीश बचाव में जुटे हैं

पत्रकारिता और नीरा राडिया कांड पर चर्चा करने के लिए दिल्ली प्रेस क्लब में शुक्रवार की सुबह हुई बैठक में बहुत कुछ कहा गया। लेकिन सहमति के बिंदु कम थे। एक छोर पर सीएनएन आईबीएन के मालिको में एक राजदीप सरदेसाई थे तो दूसरी छोर पर आउटलुक के संपादक विनोद मेहता। एक और छोर उन पत्रकारों का था, जो पत्रकारिता के कथित महारथियों के नंगे होने को लेकर आहत थे और अपनी साख को लेकर चिंतित थे। उस साख को लेकर, जिसे तार-तार करने का काम पत्रकारिता के शिखर पर बैठे लोगों ने किया था। बीच में कहीं मृणाल पांडे जैसी शख्सियतें भी थीं, जो ब्लॉग की वजह से हुए निजी कष्ट को जाहिर करने के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर रही थीं और कुलदीप नैयर जैसे लोग भी, जो अपने स्वर्णिम दौर को याद करके समस्या का समाधान वहीं कही ढूंढने की कोशिश कर रहे थे।

इस कार्यक्रम में राजदीप सरदेसाई ही एकमात्र उपस्थित शख्सियत थे, जिनके साथ नीरा राडिया की बातचीत का टेप सामने आया है। जाहिर है पूरे कार्यक्रम में लगभग सभी हमले उनके खिलाफ हुए। निंदा के निशाने पर मुख्यरूप से वही थे। राजदीप का तर्क यह है कि जिस समय इस बात का जश्न मनाया जाना चाहिए कि मीडिया के अभियान की वजह से ए. राजा को पद छोड़ना पड़ा, उस समय हम मीडिया के लोग अपनी ही पिटाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बहस की दिशा सही नहीं है। वे खास तौर पर आउटलुक पत्रिका से नाराज दिखे कि पत्रिका ने इस तरह नीरा राडिया कांड से पर्दा क्यों उठाया। राजदीप के हिसाब से ऐसा करते हुए पत्रिकाओं (ओपन और आउटलुक) ने खुद भी पत्रकारीय नैतिकता के नियम तोड़े और सबंधित लोगों के उपलब्ध होने के बावजूद उनका पक्ष नहीं रखा।

हालांकि राजदीप बार-बार यह कहते रहे कि पत्रकारिता में बहुत कुछ अच्छा हो रहा है लेकिन सत्ता के दलालों, नेताओं और मीडियाकर्मियों के बीच करीबी चिंता का कारण है। उनकी दृष्टि में पत्रकारिता में कुछ गंभीर समस्याएं आ गई हैं जिनका मिल-बैठकर समाधान निकालना होगा। संपादकों की भूमिका को लेकर भी राजदीप ने कहा कि वे समझौतापरस्त हो गए हैं। लेकिन राडिया कांड को लेकर राजदीप बार बार यह कहते रहे कि राडिया के सामने पत्रकार बेशक तमाम तरह के दावे करते रहे हों, लेकिन क्या वास्तविकता में उन्होंने वह किया, जिसका दावा वे राडिया के सामने कर रहे थे।

विनोद मेहता ने राजदीप से पहले अपनी बात रखी थी और उनका पक्ष यह है कि यह कुछ अनहोनी नहीं है। इस तरह के वाकये न हों, और इनसे कैसे निबटा जाए, जैसे सवालों पर उनका कहना है कि इसके लिए नियम-कायदे पहले से मौजूद है। किसी नए कोड की जरूरत नहीं है। इस वाकये को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर देखने की भी जरूरत नहीं है। राजदीप के आरोपों के बाद हस्तक्षेप करते हुए विनोद मेहता ने कहा कि पत्रकारिता मे कई बार अंतिम तौर पर पुष्टि से पहले खबर छापने की जरूरत होती है। अगर अंतिम पुष्टि का इंतजार किया गया होता तो न विएतनाम युद्ध की सच्चाई सामने आती और न ही वाटरगेट जैसे कांड से पर्दा उठता। उन्होंने यह भी कहा कि राजदीप अगर यह पूछ रहे हैं कि राडिया से बातचीत के बाद पत्रकारों ने दरअसल क्या किया, तो इसका जवाब यह है कि राडिया की पत्रकारो से बार-बार हो रही बातचीत के बाद इसमे शक नहीं रह जाता कि पत्रकार वही कर रहे थे, जो राडिया कह रही थीं।

सवाल-जवाब के क्रम मे राजदीप से बार-बार यह कहा गया कि वे पत्रकारो के पतन का बचाव कर रहे हैं, जो न तो संभव है और न ही उचित। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने ऐतिहासिक संदर्भो में इस समस्या को देखने की जरूरत बताई और कहा कि पत्रकारों को ठेके पर रखने की प्रथा गलत है क्योंकि इससे पत्रकार की आवाज कमजोर पड़ती है।

पत्रकार पूर्णिमा जोशी ने कहा कि मैं बरखा दत्त नहीं बनना चाहती। उन्होंने राजदीप सरदेसाई के रुख को आपत्तिजनक बताया और कहा कि वे गलत लोगो के पक्ष मे तर्क दे रहे हैं।

प्रभात शुंगलू ने सवाल उठाया कि मीडिया लालू प्रसाद, नरेद्र मोदी और मधु कोड़ा को टांग देने से पहले उनका पक्ष जानने की कोशिश कहां करता है। उन्होंने मीडिया के उच्च पदो पर बैठे लोगों द्वारा संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा की जरूरत बताई।

दिलीप मंडल ने राजदीप से यह पूछा कि पत्रकार यह जिद क्यों करते हैं कि अपनी बुराइयों से पत्रकार खुद निबट लेंगे, जबकि किसी भी और तबके और समुदाय को ऐसी छूट हासिल नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की निगरानी के लिए संसद और न्यायपालिका की भूमिका हमें स्वीकार करनी चाहिए।

Last 5 posts by अविनाश दास

Short URL: http://www.janatantra.com/news/?p=20897

Posted by on Dec 4 2010. Filed under स्पेशल रिपोर्ट. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

Leave a Reply

300x250 ad code [Inner pages]

Search Archive

Search by Date
Search by Category
Search with Google
120x600 ad code [Inner pages]
Log in | Designed by Gabfire themes