बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आडवाणी,जोशी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई
सीबीआई ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी सहित भाजपा के विभिन्न वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र संबंधी आरोप हटा लिए गए थे।
एजेंसी ने अपनी अपील में कहा कि हाईकोर्ट अपने फैसले में सही निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा और उन लोगों के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के आरोप बहाल किए जाने चाहिए।
हाईकोर्ट ने पिछले साल 20 मई को सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें भाजपा और संघ परिवार के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के आरोप बहाल किए जाने की मांग की गई थी। इन नेताओं में अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विनय कटियार, विष्णु हरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा और महंत अवैद्यनाथ भी शामिल हैं।
इन नेताओं के अलावा मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और शिवसेना प्रमुख बालासाहब ठाकरे भी शामिल हैं। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश आलोक कुमार सिंह ने अपने 44 पृष्ठों के फैसले में कहा था कि विशेष अदालत के चार मई 2001 के फैसले के खिलाफ सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका में कोई गुण नहीं है। उस फैसले में उन लोगों के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र के आरोप हटाने का निर्देश दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि इस संबंध में कुल दो मामले हैं। एक आडवाणी और अन्य के खिलाफ है जो छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में रामकथा कुंज मंच पर मौजूद थे, जब बाबरी मस्जिद गिराई गई। दूसरा मामला लाखों अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ है जो विवादित ढांचा के आसपास मौजूद थे।
न्यायमूर्ति सिंह ने सीबीआई की विशेष अदालत के 2001 के फैसले को बरकरार रखा था। इस मामले में 21 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी और 505 के तहत आरोप लगाए गए थे। सीबीआई ने मई 2003 में आडवाणी और सात अन्य नेताओं के खिलाफ धारा 147 और 149 के तहत पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। इस मामले की सुनवाई राय बरेली की एक अदालत में चल रही है।
न्यायाधीश ने कहा था कि सीबीआई जो अब दलील दे रही है, उसने रायबरेली में सुनवाई के दौरान या अपनी पुनरीक्षण याचिका में किसी भी वक्त यह नहीं कहा कि नेताओं के खिलाफ आपराधिक षडयंत्र का आरोप है। अदालत के अनुसार अगर इसमें कोई तथ्य होता तो सीबीआई निश्चित तौर पर रायबरेली की अदालत में दाखिल पूरक आरोपपत्र में इसे शामिल करती। अदालत ने कहा कि एजेंसी ने इस संबंध में कमजोर दलीलें पेश की। न्यायाधीश विशेष अदालत के इस निष्कर्ष से सहमत थे कि शिवसेना सुप्रीमो बालासाहब ठाकरे, कल्याण सिंह और सतीश प्रधान मंच पर मौजूद नहीं थे।
एजेंसियां
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