2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच जेपीसी से संभव पर सीमित दायरों के साथ:केंद्र सरकार
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित किए जाने का संकेत देते हुए सरकार ने शुक्रवार को अन्य मामलों को इसके तहत लाने के लिए इसका दायरा बढ़ाए जाने की संभावना से इनकार किया।
संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने सोमवार से शुरू होकर तीन महीने चलने वाले संसद के बजट सत्र से पूर्व एक संवाददाता सम्मेलन में इस प्रकार का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि जेपीसी गठित करने के संबंध में बुधवार तक फैसला लिया जाएगा।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए सरकार द्वारा जेपीसी गठित किए जाने का संकेत मिलने के बाद भाजपा राष्ट्रमंडल खेल घोटाले तथा आदर्श हाउसिंग घोटाले को भी इसके दायरे में लाए जाने की बात कर रही है। संसद का बीता पूरा शीतकालीन सत्र 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की भेंट चढ़ गया था।
बंसल ने कहा कि जेपीसी के मुद्दे पर विपक्ष के साथ विचार-विमर्श आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बजट सत्र सुचारु रूप से चलेगा। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार ने जेपीसी गठित करने का फैसला किया है, बंसल ने कहा, फिलहाल यह समय से पहले पूछा गया सवाल है, हम अभी भी अन्य राजनीतिक दलों से बातचीत की प्रक्रिया में हैं, बुधवार तक कोई फैसला किया जाएगा।
जेपीसी का दायरा बढ़ाए जाने की मांग स्वीकार किए जाने की संभावना बहुत कम है क्योंकि संसदीय प्रक्रिया एक प्रस्ताव के तहत विभिन्न मुद्दों को शामिल किए जाने की अनुमति नहीं देती। बंसल 2जी स्पेक्ट्रम, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और आदर्श हाउसिंग घोटाले के लिए संयुक्त जेपीसी की मांग को अस्वीकार करते दिखे। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, प्रस्ताव में एक निश्चित मुद्दा देना पड़ता है और भ्रष्टाचार के सामान्य मुद्दे पर जांच नहीं हो सकती।
जेपीसी द्वारा पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री को तलब किए जाने की संभावना के बारे में किए गए सवाल पर बंसल ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के पास इसकी अनुमति देने या नहीं देने का फैसला करने का अधिकार होगा। अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा।
बंसल ने कहा कि वाम दलों को जेपीसी में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है क्योंकि चार दलों ने सरकार को लिखित में दिया है कि उन्हें एक समूह के तौर पर लिया जाए। मौजूदा लोकसभा में वाम दलों की संख्या काफी कम हो गई है जो कि पिछली लोकसभा में करीब 60 थी।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि जेपीसी में 30 सदस्य हो सकते हैं जिनमें लोकसभा से 20 और राज्यसभा से दस शामिल हैं। यदि 21 सदस्यों की समिति गठित की जाती है तो ऐसी स्थिति में 14 निचले सदन से और सात ऊपरी सदन से होंगे। जेपीसी में सात से नौ प्रमुख बड़े दलों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस, भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, जनता दल यू और द्रमुक को इसकी सदस्यता मिल सकती है।
जेपीसी की मांग करने में सबसे आगे रही अन्नाद्रमुक को संसद में उसकी कम संख्या के कारण समिति में कोई जगह मिलने की संभावना नहीं है और यही स्थिति सत्तारूढ़ यूपीए का घटक होने के बावजूद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस तथा मुस्लिम लीग की होगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जेपीसी संबंधी प्रस्ताव के चर्चा के लिए आने पर लोकसभा में संक्षिप्त बयान दे सकते हैं। 90 के दशक की शुरुआत में जब हर्षद मेहता मामले में जब जेपीसी गठित की गई थी तो उस समय पीवी नरसिंह राव ने बयान दिया था। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल द्वारा प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है जिसके बाद इस पर बहस होगी। बहस की मांग पर कांग्रेस काफी जोर दे रही है।
बंसल की टिप्पणियां वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की टिप्पणी की पृष्ठभूमि में काफी महत्वपूर्ण लग रही है। मुखर्जी ने कहा था कि संसद के सुचारु संचालन से अधिक कुछ महत्वपूर्ण नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कह चुके हैं कि वह जेपीसी का सामना करने से डरते नहीं हैं। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज मांग कर चुकी हैं कि सरकार को जेपीसी संबंधी घोषणा मंगलवार 22 फरवरी तक करनी होगी।
एजेंसियां
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