राशन आपूर्ति घोटाला:लेफ्टिनेंट जनरल साहनी को तीन साल कैद

जम्मू-कश्मीर के सियाचिन और अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर तैनात सैनिकों के लिए घटिया राशन आपूर्ति कराने के आरोप में जनरल कोर्ट मार्शल का सामना कर रहे सेना के अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल एसके साहनी को शुक्रवार को यहां तीन साल के कठोर कारावास की सजा के साथ साथ उनके मेडल और स्टार आदि वापस ले लेने के आदेश दिए गए हैं। सैन्य सूत्रों ने शुक्रवार को यहां बताया कि अवकाश प्राप्त पूर्व सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एसके साहनी (65) जीसीएम का सामना करने वाले इस रैंक के पहले ऐसे अधिकारी हैं।

उन्होंने बताया कि जालंधर स्थित वज्र कॉर्प में पूर्व सैन्य अधिकारी के खिलाफ राशन घोटाले के आरोप में जीसीएम की कार्रवाई चल रही थी। जीसीएम ने शुक्रवार को उन्हें दोषी पाते हुए तीन साल के कठोर कारावास एवं मेडल और स्टार छीन लेने की सजा सुनाई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जीसीएम ने सुनवाई पूरी होने के बाद पूर्व सैन्य अधिकारी को सजा सुनाते हुए इस मामले की रिपोर्ट नयी दिल्ली स्थित सैन्य मुख्यालय को भेज दी गई है।

सेना की नौकरी से 2006 में अवकाश लेने वाले लेफ्टिनेंट जनरल एसके साहनी के खिलाफ वर्ष 2005 में जम्मू और कश्मीर के सियाचिन और अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर तैनात सैनिकों के लिए घटिया मांस एवं अन्य सूखा राशन आपूर्ति कराने का आरोप था।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2005 में जिस समय लेफ्टिनेंट जनरल सहानी के खिलाफ राशन की खरीद में अनियमितता बरतने का आरोप है। उस समय वह सेना के आपूर्ति एवं परिवहन विभाग के महानिदेशक के रूप में तैनात थे।

उन्होंने बताया कि पिछले साल जुलाई में पूर्व सैन्य अधिकारी के खिलाफ जालंधर स्थित 11 वें वज्र कॉर्प के मुख्यालय में जीसीएम की कार्रवाई शुरू हुई थी। लेफ्टिनेंट जनरल जतिंदर पाल सिंह की अगुवाई वाली जीसीएम की कार्रवाई शुक्रवार को यहां देर शाम समाप्त हुई।

साहनी के खिलाफ पेशेवराना अनौचित्य का मामला चल रहा था। सैन्य अधिनियम की धारा 52 एवं 63 के अधीन उनके खिलाफ आठ मामले थे जिनमें फर्जीवाडा़ और सूखे राशन की खरीद में अनियमितता का मामला भी शामिल था।

सूत्रों के अनुसार लगभग सात महीने पहले जीसीएम की कार्रवाई यहां शुरू हुई थी। उसी समय से वह गिरफ्तार हैं। बीच में हालांकि एक बार स्वास्थ्य का हवाला देते हुए साहनी ने जमानत की अपील की थी लेकिन आम्र्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल ने एक नवंबर को जमानत देने से इनकार करते हुए सेना को दो महीने के भीतर जीसीएम की कार्रवाई पूरा करने का निर्देश दिया था।

एजेंसियां

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Posted by on Feb 19 2011. Filed under तीर-ए-नज़र, देश - दुनिया. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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