कुछ रहस्य खुलने के लिए बनाए जाते हैं। कुछ खुलने के बाद और ज्यादा रहस्यमय वातावरण बनाकर चले जाते हैं। रहस्यों का होना इतना रहस्यमय है, कि जो चाहे वह रहस्यमय ढंग से साधारण चीज को भी रहस्य में बदल सकता है। महान चीजों को सरल ढंग से प्रस्तुत करने के पीछे रहस्य यह होता [...]
नया-नया पत्रकार बना था। दोस्त की शादी में गया था। दोस्त ने अपने एक ब्यूरोक्रेट रिश्तेदार से मिलवाया। अच्छा आप पत्रकार हैं? पत्रकार तो पचास रुपये में बिक जाते हैं। काटो तो खून नहीं। क्या कहता? पिछले दिनों जब राडिया का टेप सामने आया तो उन बुजुर्ग की याद हो आई। बुजुर्गवार एक छोटे शहर [...]
सबको खबर देने और सबकी खबर लेने का दावा करने वाला, अपने को जनता का पक्षधर और सबसे तेज, निर्भीक व निष्पक्ष बताने वाला मीडिया राडिया टेपों के प्रकाश में आने के बाद जनता के बीच खुद सवालों के कठघरे में खड़ा है। देर से ही सही, तीन शीर्ष संस्थाओं ने हमपेशा लोगों के साथ [...]
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-340 में कहा गया है कि ‘राष्ट्रपति भारत के सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की दशाओं व कठिनाइयों के अन्वेषण के लिए और उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए और उनकी दशा सुधारने के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा जो उपाय किये जाने चाहिए, उनके बारे में और [...]
Dec 8 2010 | Posted in
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दिल्ली में रहने वालों को महान नेताओं की समाधियों के बारे में खासी जानकारी रहती है। लगभग हर महीने ही सरकारी तौर पर समाधियों पर फूल माला चढ़ती रहती है। यह अलग बात है कि महात्मा गांधी के अलावा और किसी समाधि पर आम आदमी शायद ही कभी जाता हो। अवाम की श्रद्धा के स्थान [...]
Dec 7 2010 | Posted in
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भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें क्या इतने गहरे पैठ गई हैं कि अब उनसे पार पाना नामुमकिन हो गया है? क्या इसके लिए सिर्फ राजनेता, गठबंधन की राजनीति और लोलुप नौकरशाहों का गिरोह ही दोषी है? बहुत जल्दी किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाना नाइंसाफी होगी। चलिए, इस समस्या की वजहें परत-दर-परत खंगालते हैं।
Dec 5 2010 | Posted in
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मीडिया इंडस्ट्री में सबसे कमजोर, लाचार और निरीह कोई है, तो वो हैं राजदीप सरदेसाई। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि सैलरी, शख्सीयत और शोहरत के लिहाज से जिस टेलीविजन पत्रकार को सबसे मजबूत माना जाता है, जिनकी लोगों के बीच इसी तरह की इमेज है, वो अपने को पिछले एक साल से सबसे मजबूर [...]
चुनाव के दौरान लालू यादव से मिलने गया था। अभी बैठा ही था कि लालू बोल उठे, अरे वो चैनल वाला आया था। पैसे मांग रहा था। मैंने मना कर दिया, तो मेरे खिलाफ ओपिनियन पोल करवा दिया। बड़े दंभ से कहा था, सरकार बनते ही मैं चैनल बंद करवा दूंगा। पूरी बातचीत से लगा [...]
अहमदाबाद के उन अनाम युवा छात्र-छात्राओं ने राहुल गांधी से बिल्कुल सही व जरूरी सवाल पूछे और पूरी विनम्रता से पूछे। उन्होंने इस बात का भी सबूत दिया कि आज के छात्र वह काम कर रहे हैं, जो पत्रकार या तो कर नहीं सकते या नहीं करेंगे। वह काम है : सही और प्रासंगिक सवाल [...]
Nov 28 2010 | Posted in
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आजादी के बाद भारत ने राजकाज के लिए संसदीय लोकतंत्र प्रणाली को चुना और इस नाते देश के लोगों की इच्छाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का सबसे प्रमुख मंच हमारे देश की संसद है। जनता द्वारा सीधे चुने प्रतिनिधियों की संस्था होने के नाते लोकसभा को संसद के दोनों सदनों में ऊंचा दर्जा हासिल है। [...]