Category archives for: ब्लॉग

बिहार के नतीजों से कूप-मंडूक पत्रकार सबक लें, निजी कुंठाओं से ऊपर उठें

बुजुर्ग युगेश्वर पांडेय बिहार वाणिज्य मंडल और मगध स्टॉक एक्सचेज के अध्यक्ष रह चुके हैं। इन पंक्तियों का लेखक उनके ही गांव के बगल का मूल निवासी है। मेरे दिवंगत पिता के साथ बैठ कर बातें करते उन्हें मैंने कई बार अपने बचपन में देखा है। अब भी मेरा उनसे मिलना-जुलना है। उनसे राजनीतिक हवा-बयार [...]

नीतीश की जीत के मायने बहुत गहरे हैं

बिहार में नीतीश कुमार और भाजपा की चमत्कारी जीत ने हर जागरूक को बहुत कुछ सोचने-समझने का मौका दिया है। इस बात को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं होनी चाहिए कि यह जनादेश विकास के पक्ष में और जातिवाद तथा सांप्रदायिकता के खिलाफ है। लेकिन इस नतीजे से जुड़े कई तथ्य ऐसे हैं, जिनके उपेक्षित [...]

सुरक्षा + विकास + सपना = नीतीश की लहर

फरवरी, 2010 के आरंभिक दिन. होली के ठीक पहले. नीतीश कुमार सारण और सीवान की यात्रा पर गये थे. उनके साथ जाना हुआ. पहली बार बिहार के किसी मुख्यमंत्री के साथ यह यात्रा थी. बिहार के मुख्यमंत्री के सरकारी उड़ान की जगह भी पहली बार देखी. लगभग ढाई दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ रहना [...]

नीतीश की जीत वंशवादी राजनीति के अंत की शुरुआत है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधानसभा के लिए हुए चुनाव नतीजे आ जाने के बाद ऐलान किया कि यह जीत बिहार की जनता की है। यह अलग बात है कि उनके साथ चुनाव लड़ने वाली बीजेपी इसे अपनी जीत मान रही है। और एनडीए की नीतियों का डंका पीट रही है लेकिन सच्चाई [...]

नीतीश भरोसे का प्रतीक और लालू-पासवान वादा तोड़ने में माहिर

लालटेन सिर्फ राजद का चुनाव चिह्न् ही नहीं है, बल्कि एक खास तरह की राजनीतिक शैली का प्रतीक है। यह लालू की शैली है। बिहार में लालू शैली की यह निर्णायक हार है। देश के अन्य हिस्से में भी लालू की शैली की राजनीति करने वालों के लिए भी यह एक चेतावनी भी है। बिहार [...]

टीम कुंबले की जीत से जगी क्रिकेट से कचरा साफ होने की उम्मीद

भारतीय क्रिकेट में रविवार का दिन खास था, इसलिए नहीं कि सचिन रमेश तेंदुलकर 50 शतक के करीब थे और अगले दिन मास्टर ब्लास्टर के दीवानों का इंतेजार थोड़ा और लंबा हो गया। 21 नवंबर का दिन इसलिए अहम था क्योंकि टीम अनिल कुंबले ने पूरी तरह से कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन पर कब्जा कर लिया। [...]

साथी हाथ बढाना

मैंने कुछ हफ्ते पहले भड़ास के आर्थिक संकट के बारे में लिखा था । आज पता लगा है कि मोहल्ला भी उसी संकट से गुज़र रहा है। उसके करता धरता, अविनाश ने एक रेवेन्यू मोडल सोच निकाला है । फरमाते हैं कि अगर सारे साथी और मोहल्ला परिवार के लोग एक सौ रूपये महीने के [...]

रेणु तो हार गये थे,क्या उनके पुत्र जीतेंगे चुनाव ?

चलित्तर कर्मकार उर्फ नक्षत्र मालाकार, फणीश्वर नाथ रेणु की कालजयी रचना मैला आंचल के एक पात्र थे। यह संयोग ही था कि फणीश्वर नाथ रेणु और नक्षत्र मालाकार ने सन 1972 में अलग -अलग चुनाव क्षेत्रों से बिहार विधान सभा का चुनाव लड़ा।वे दोनों हारे। अब फणीश्वर नाथ रेणु की एक अन्य रचना पदम पराग [...]

अमरीका से दोस्ती करने के पहले इतिहास पर भी नज़र डालना ज़रूरी

आजकल अमरीका से भारत के रिश्ते सुधारने की कोशिश चल रही है। लेकिन ज़रूरी यह है कि इस बात की जानकारी रखी जाय कि अमरीका कभी भी भारत के बुरे वक़्त में काम नहीं आया है । अमरीका की जे एफ के लाइब्रेरी में नेहरू-केनेडी पत्र व्यवहार को सार्वजनिक किये जाने के बाद कुछ ऐसे [...]

बिहार में नीतीश का कोई विकल्प नहीं

राजदीप सरदेसाई चुनावों के बारे में पूर्वानुमान लगाना जोखिमभरा काम है और यह किसी पत्रकार की सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। भारतीय चुनावों की बेहद प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में हम जिस ‘हवा’ की बुनियाद पर विश्लेषण करते हैं, वह कभी भी अपनी दिशा बदल सकती है। लेकिन तमाम वैधानिक चेतावनियों के बावजूद मैं [...]

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