Category archives for: सुर्ख़ियां

फिर से शुरु हो रहा है जनतंत्र

करीब पांच महीने हो गए. जनतंत्र पर कोई भी अपडेट नहीं हुआ. पाठकों को हमसे शिकायत रही कि बिना किसी नोटिस के इसे अचानक लावारिस की तरह छोड़ दिया गया. खुद जनतंत्र की टीम को इसका इफसोस है. यह हमारे लिए बेहद मुश्किल दौर था. कई मोर्चों पर एक साथ संघर्ष ने हमें इस कदर [...]

भोजपुरी सिनेमा के पचास साल पर पटना में होगी बहस

16 फरवरी को भोजपुरी सिनेमा के पचास साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर एफएमसीसीए (फाउंडेशन फॉर मीडिया कल्‍चर एंड सिनेमा अवेयरनेस) पटना में तीन दिनों का भोजपुरी फिल्‍म और सांस्‍कृतिक समारोह आयोजित करने जा रहा है। 14, 15 और 16 फरवरी को एएन सिन्‍हा इंस्‍टीच्‍यूट और श्रीकृष्‍ण मेमोरियल हॉल में आयोजित इस समारोह [...]

जन-मजूरों, हलवाहों-चरवाहों के गायक थे बालेस्‍सर यादव

प्रभात रंजन ♦लेकिन कल जब पढ़ा कि बालेश्‍वर नहीं रहे तब जाकर यह लगा कि भोजपुरी की एक बड़ी लोक-परंपरा का सचमुच अंत हो गया। वह परंपरा भोजपुरी के ‘बाजार’ बनने से पहले खेतों-खलिहानों तक में फैली थी। मेरे अपने जीवन के उस छोटे-से अंतराल का भी जिसे बालेश्‍वर के गीतों ने धडकाया था।

दलित नेता सुधीर ढवले को बिनायक सेन बनाने की तैयारी

इस सिलसिले में दलित अधिकारों के चैम्पियन और मराठी पत्रिका, ‘विद्रोही ‘ के संपादक सुधीर ढवले को गोंदिया पुलिस ने देशद्रोह और अनलॉफुल एक्टिविटीज़ प्रेवेंशन एक्ट की धारा 17, 20 और 30 लगाकर गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप है कि वे आतंकवादी काम के लिए धन जमा कर रहे थे और किसी आतंकवादी संगठन के सदस्य थे।

देश को फिलॉस्फर मनमोहन की नहीं, पॉलिटिकल मनमोहन की दरकार है

सखि सैंया तो बहुते कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है। वर्ष 2009 के चुनाव से ही महंगाई डायन खाए जा रही है। मौजूदा हफ्ते में इसका आंकड़ा 18 प्रतिशत से भी आगे निकल गया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु फरमा रहे हैं कि सरकार के पास इससे निपटने का कोई उपाय नहीं है। [...]

ये नेता महिलाओं को इस्तेमाल की चीज क्यों मानते हैं?

बिहार में सत्ताधारी दल के एक विधायक को उसके घर पर ही चाकू घोंप कर मार डाला गया। जिस महिला ने उनके ऊपर जानलेवा हमला किया, उसने आरोप लगाया है कि विधायक ने उसका यौन शोषण किया था, उसके परिवार को मारा पीटा था, उसको जान से मारने की धमकी दी थी और उसके परिवार [...]

बम का जवाब बम से देने के लिए विस्फोट : असीमानंद

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के गिरफ्तार नेता स्वामी असीमानंद ने मजिस्ट्रेट के समक्ष कबूला है कि वह और हिंदू कार्यकर्ता मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, अजमेर और मक्का मस्जिद विस्फोटों में शामिल थे। साप्ताहिक पत्रिका तहलका ने दावा किया है कि उसके पास असीमानंद द्वारा हस्ताक्षरित 42 पन्नों वाले कबूलनामे की प्रति है। पत्रिका के मुताबिक [...]

“आखिर क्यों हर हिंदू आतंकवादी का रिश्ता आरएसएस से है”

दिसंबर में हुई कांग्रेस की सालाना बैठक में जब से तय हुआ कि आरएसएस के उस रूप को उजागर किया जाए जिसमें वह आतंकवादी गतिविधियों के प्रायोजक के रूप में पहचाना जाता है, तब से ही संघ के अधीन काम करने वाले संगठनों और नेताओं में परेशानी का आलम है। जब से आरएसएस के ऊपर [...]

भ्रष्टाचार को समर्पित साल और राजनीति की उतरती आबरू

देश की राजनीतिक स्थिति बहुत ही गड़बड़झाले से गुज़र रही है। कांग्रेस की ढिलाई और हालात पर पकड़ के कमजोर होने की वजह से अगर आज चुनाव हो जाएं तो यूपीए सरकार की हार लगभग पक्की मानी जा रही है। यह बात बहुत सारे कांग्रेसियों को भी पता है। बीजेपी वालों को यह बात सबसे [...]

बहुत हुआ, अब भोजपुरी सिनेमा को बदलना ही होगा!

अगर आप बिहार के रहने वाले हैं, या भोजपुरी भाषी हैं और देश के किसी भी कोने में आप इंजीनियर, डाक्टर, वकील, बैंक अफसर, नौकरशाह, मंत्री, नेता, मुख्यमंत्री, राज्यसभा सदस्य, छात्र, घूसखोर किरानी, कालाबाजारू कारोबारी, समाज सेवक, दिल्लीवाला बनने के लिए आतुर हैं, अपने आपको बिहारी कहने से शर्माती हुई लड़की या घुट-घुट के जीने वाले कोई भी व्यक्ति हैं, तो मैं ये बता दूं की ये भोजपुरी फिल्‍में आप ही की कहानी बता रही हैं, और आप हैं कि कहते है की हम देखते नहीं, वो तो बहुत गंदी होती हैं। गंदी तो होती हैं, लेकिन क्यों? क्या इसका आप पर कोई असर होता है?

300x250 ad code [Inner pages]

Search Archive

Search by Date
Search by Category
Search with Google
120x600 ad code [Inner pages]
Log in | Designed by Gabfire themes