Category archives for: साहित्य

मलयाली कवि कुरूप को ज्ञानपीठ पुरस्कार

मलयाली कवि और गीतकार ओ एन वी कुरूप को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा गया है। मलयाली साहित्य में अमूल्य योगदान के लिये सुप्रसिद्ध कवि एवं गीतकार ओ एन वी कुरूप को शुक्रवार को तिरूवनंतपुरम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2007 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदानमंत्री ने कहा कि केरल ने [...]

कवि दिनेश कुमार शुक्ल को पहला सीता स्मृति सम्मान

हिंदी लेखन के लिए प्रथम सीता स्मृति सम्मान जाने-माने हिंदी कवि दिनेश कुमार शुक्ल को मिला है। उन्हें यह सम्मान कविता संग्रह “ललमुनिया की दुनिया” के लिए मिला है। डॉ सीता श्रीवास्तव मशहूर शिक्षाविद और राजनीतिशास्त्र की विद्वान थीं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय की मैत्रेयी कॉलेज की 15 वर्ष से ज्यादा समय तक प्रधानाचार्य रहीं। वाशिंगटन [...]

जब हिंदी में खूब पैसा आ जायेगा तो आत्मविश्वास भी बढ जायेगा

इस बार हिन्दी दिवस पर गृहमंत्री पी.चिदम्बरम ने कुछ देर तक हिन्दी में भाषण दिया। खूब तालियां बजीं।चिदम्बरम हिन्दी भाषी क्षेत्र से नहीं आते इसलिए साल में एक दिन उन्होंने जो प्रयास किए उसके लिए उनका हौसला अफजाई करना वाजिब है। हर साल सितम्बर महीने में भारत सरकार के कार्यालयों औऱ स्कूलों में हिन्दी पखवाड़ा [...]

मैं लज्जित हूं, देश भी लज्जित है, अभी तक उसे हटाया क्यों नहीं?

रघुवंश प्रसाद सिंह ♦ मैं लज्जित हूं उस शब्द का सदन में उच्चारण करने में कि उन्होंने क्‍या कहा। … ((व्यवधान)) … सारा देश लाज्जित है। देश भर के 150 लेखकों ने एक साथ कहा कि उसको हटाया जाए। अभी तक सरकार ने क्‍यों नहीं हटाया है? महिला लेखिका के प्रति किन शब्दों का उच्चारण किया है? एक वाइस चांसलर ने ऐसा किया और क्‍यों उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है?

“हिंदी प्रोफेसरों ने हिंदी का खाना खराब किया है”

हिंदी समाज का कोई संगठित चेहरा हमारे सामने नहीं है, इसलिए उसकी कोई बड़ी पहल हमें कभी नजर नहीं आती। इसलिए हमारी साहित्यि पत्रिकाओं और हमारे साहित्‍य के गुनीजन बड़ी तादाद में हमें नजर नहीं आते। कवि मंगलेश डबराल ने मंगलावार की शाम, इंडिया हैबिटैट सेंटर के गुलमोहर सभागार में बहसतलब चार के मंच से [...]

स्कूली लड़कों सी फब्तियां और “डैडी कूल” दिखने की चाहत

उत्कट सामाजिक तथा राजनीतिक आलोड़नों से भरपूर उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के भारतीय लेखक-लेखिकाओं की जिंदगी कई बार उनके साहित्य से अधिक दिलचस्प लगने लगती है और वह है भी। लेकिन किसी भी लेखक या लेखिका का मूल्यांकन करते हुए उसके जीवन को साहित्य से अलग करके उसके कुल अवदान का अधकचरा ऐतिहासिक-मनोवैज्ञानिक विवेचन कई [...]

गिरिराज और प्रियंवद के बाद अशोक वाजपेयी भी ज्ञानपीठ से अलग हुए

♦ अशोक वाजपेयी ♦
मैं ‘कभी-कभार’ स्तंभ में दूसरे लेखकों से भारतीय ज्ञानपीठ का बहिष्कार करने की मांग करने के साथ ही, ज्ञानपीठ से अपनी दोनों पुस्तकें ‘शहर अब भी संभावना है’ और ‘कवि कह गया है’ वापस ले चुका हूं।

विभूति-कालिया का बचाव कर रहे हैं तीन तरह के लोग

नया ज्ञानोदय के बेवफाई सुपर विशेषांक-2 में विभूतिनारायण राय की स्त्री लेखकों के बारे में की गई अश्लील टिप्पणी के मद्देनजर उनकी और रवींद्र कालिया की बर्खास्तगी को लेकर आंदोलन का रूप ले चुके लेखकीय-पाठकीय प्रतिरोध के बीच कुछ लोगों के पर्दे के पीछे से उनके बचाव में आ खड़े होने की कोशिश ने हिंदी [...]

काशी विद्यापीठ में विभूति को बर्खास्त करने की मांग

विजय विनीत ♦
छिनाल प्रकरण पर अब पूर्वांचल में भी विरोध तेज हो गया है। वाराणसी में ढाई सौ लेखकों ने विभूति नारायण राय के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया। बैठक की और राष्ट्रपति से इस मामले में न्यायिक जांच करा कर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की। नया ज्ञानोदय पत्रिका के सुपर बेवफाई विशेषांक में महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय साक्षात्कार पर काशी विद्यापीठ के सभा कक्ष में काशी के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों साहित्यिक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन हुआ। हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो श्रद्धानन्द ने लेखिकाओं को लेकर विभूति नारायण राय की टिप्पणी को अमर्यादित तथा अशोभनीय करार दिया। उन्होंने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की। सभा में संचालन का दायित्व प्रो सत्यदेव त्रिपाठी को दिया गया। उन्होंने इस विषय पर चर्चा की शुरुआत कराई।

“छिनाल” विभूति कांड में राष्ट्रपति भवन तक जुड़ते तार!

यह दौरा इतना गुप्त रखा गया कि राष्ट्रपति के पति होने के नाते यह दौरा जिले के पब्लिसिटी ऑफिसर को भी नहीं पता था। दूसरे दिन अखबारों से खबर मिली। शेखावत साहब का यह दौरा अत्यंत चालाकी से संपन्न करवाया गया ताकि विश्वविद्यालय के ढांचागत विकास में खायी गयी रकमों की जानकारी उन्हें न मिले, अब सारी निगाहें मैडम राष्ट्रपति पर टिकी हैं कि वे हिंदी के तमाम मूर्धन्य लेखकों का सम्मान करते हुए राय को अपदस्थ करती हैं या नहीं। हिंदी के अधिकांश चिंतक यदि इस कुलपति के खिलाफ हैं, तो उन्‍हें बनाये रखना किये जा रहे घोटालों को प्रश्रय देना होगा।

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