Category archives for: छिनाल “विभूति” कांड

मैं लज्जित हूं, देश भी लज्जित है, अभी तक उसे हटाया क्यों नहीं?

रघुवंश प्रसाद सिंह ♦ मैं लज्जित हूं उस शब्द का सदन में उच्चारण करने में कि उन्होंने क्‍या कहा। … ((व्यवधान)) … सारा देश लाज्जित है। देश भर के 150 लेखकों ने एक साथ कहा कि उसको हटाया जाए। अभी तक सरकार ने क्‍यों नहीं हटाया है? महिला लेखिका के प्रति किन शब्दों का उच्चारण किया है? एक वाइस चांसलर ने ऐसा किया और क्‍यों उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है?

स्कूली लड़कों सी फब्तियां और “डैडी कूल” दिखने की चाहत

उत्कट सामाजिक तथा राजनीतिक आलोड़नों से भरपूर उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के भारतीय लेखक-लेखिकाओं की जिंदगी कई बार उनके साहित्य से अधिक दिलचस्प लगने लगती है और वह है भी। लेकिन किसी भी लेखक या लेखिका का मूल्यांकन करते हुए उसके जीवन को साहित्य से अलग करके उसके कुल अवदान का अधकचरा ऐतिहासिक-मनोवैज्ञानिक विवेचन कई [...]

गिरिराज और प्रियंवद के बाद अशोक वाजपेयी भी ज्ञानपीठ से अलग हुए

♦ अशोक वाजपेयी ♦
मैं ‘कभी-कभार’ स्तंभ में दूसरे लेखकों से भारतीय ज्ञानपीठ का बहिष्कार करने की मांग करने के साथ ही, ज्ञानपीठ से अपनी दोनों पुस्तकें ‘शहर अब भी संभावना है’ और ‘कवि कह गया है’ वापस ले चुका हूं।

विभूति-कालिया का बचाव कर रहे हैं तीन तरह के लोग

नया ज्ञानोदय के बेवफाई सुपर विशेषांक-2 में विभूतिनारायण राय की स्त्री लेखकों के बारे में की गई अश्लील टिप्पणी के मद्देनजर उनकी और रवींद्र कालिया की बर्खास्तगी को लेकर आंदोलन का रूप ले चुके लेखकीय-पाठकीय प्रतिरोध के बीच कुछ लोगों के पर्दे के पीछे से उनके बचाव में आ खड़े होने की कोशिश ने हिंदी [...]

काशी विद्यापीठ में विभूति को बर्खास्त करने की मांग

विजय विनीत ♦
छिनाल प्रकरण पर अब पूर्वांचल में भी विरोध तेज हो गया है। वाराणसी में ढाई सौ लेखकों ने विभूति नारायण राय के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया। बैठक की और राष्ट्रपति से इस मामले में न्यायिक जांच करा कर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की। नया ज्ञानोदय पत्रिका के सुपर बेवफाई विशेषांक में महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय साक्षात्कार पर काशी विद्यापीठ के सभा कक्ष में काशी के सभी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों साहित्यिक सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन हुआ। हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो श्रद्धानन्द ने लेखिकाओं को लेकर विभूति नारायण राय की टिप्पणी को अमर्यादित तथा अशोभनीय करार दिया। उन्होंने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की। सभा में संचालन का दायित्व प्रो सत्यदेव त्रिपाठी को दिया गया। उन्होंने इस विषय पर चर्चा की शुरुआत कराई।

“छिनाल” विभूति कांड में राष्ट्रपति भवन तक जुड़ते तार!

यह दौरा इतना गुप्त रखा गया कि राष्ट्रपति के पति होने के नाते यह दौरा जिले के पब्लिसिटी ऑफिसर को भी नहीं पता था। दूसरे दिन अखबारों से खबर मिली। शेखावत साहब का यह दौरा अत्यंत चालाकी से संपन्न करवाया गया ताकि विश्वविद्यालय के ढांचागत विकास में खायी गयी रकमों की जानकारी उन्हें न मिले, अब सारी निगाहें मैडम राष्ट्रपति पर टिकी हैं कि वे हिंदी के तमाम मूर्धन्य लेखकों का सम्मान करते हुए राय को अपदस्थ करती हैं या नहीं। हिंदी के अधिकांश चिंतक यदि इस कुलपति के खिलाफ हैं, तो उन्‍हें बनाये रखना किये जा रहे घोटालों को प्रश्रय देना होगा।

मैं, राज्य की हिंसा का समर्थक विभूति नारायण राय बोल रहा हूं…

मैं साफ तौर पर कह सकता हूं कि कश्मीर में इस्लामिक आतंकवाद और भारतीय राज्य के बीच मुकाबला है। और मैं हमेशा राज्य की हिंसा का समर्थन करुंगा। राज्य की हिंसा से हम मुक्त हो सकते हैं। इस्लामिक आतंकवाद से हम मुक्त नहीं हो सकते। वहां पर जो भी लोग उनसे असहमति रखते थे, उन सबको आतंकवादियों ने धीरे-धीरे मार दिया। खत्म कर दिया। तो हम जब यहां खड़े हों और माओवाद जैसी चीज पर बात करें, हिंसा पर बात करें तो हमें इक्सट्रीम पर नहीं जाना चाहिए। हमें दोनों हिंसा का विरोध करना होगा। अगर वैदिकी हिंसा… हिंसा है तो अवैदिकी हिंसा… भी हिंसा है।

राठौर भी पुरस्कृत था, राय की तरह माफ क्यों नहीं कर देते?

महात्मा गांधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय द्वारा महिलाओं के लिए प्रयुक्त शब्दों को लेकर जब भी उन पर कार्रवाई करने की बात आती है, हर बार उनका बचाव करने वाले लोग यह कहते हुए सामने आ जाते हैं कि विभूति नारायण राय बहुत ही धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति हैं। इसके बाद सारा कुछ [...]

“कायर” कालिया ने मांगी माफी, मगर गुनाह “दूसरों” पर थोपा

((नया ज्ञानोदय के संपादकरवींद्र कालिया ने माफी मांगी है। इसी सिलसिले में उन्होंने एक चिट्ठी जनसत्ता को भेजी है। माफी इसलिए नहीं कि उनसे भूल हुई। वो छिनाल कांड से हिंदी साहित्य जगत को कितनी शर्मिंदगी होगी इसका अंदाजा नहीं लगा सके। बल्कि माफी इसलिए कि विभूति नारायण राय का इंटरव्यू उन्होंने पढ़ा नहीं था [...]

क्या साहित्यकारों की हालत वेश्याओं से भी ख़राब है?

विभूति नारायण राय और रवींद्र कालिया के कलुषित गठबंधन के विरुद्ध हिंदी में जो कार्रवाई हुई उसने हिंदी लेखक-लेखिकाओं की ताकतों, कमजोरियों और विरोधाभासों को भी उजागर करने में ‘मदद’ की। लेखिकाएं कपिल सिब्बल से मिलीं लेकिन कोई लिखित ज्ञापन नहीं ले गर्इं जिसमें विभूति नारायण के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग की गई होती। [...]

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