<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जनतंत्र &#187; टेलीविजन</title>
	<atom:link href="http://www.janatantra.com/news/category/raagrang/television/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.janatantra.com/news</link>
	<description>बोल के लब आज़ाद हैं तेरे</description>
	<lastBuildDate>Sat, 02 Jul 2011 08:15:52 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.2.1</generator>
		<item>
		<title>बिग बॉस-4 में बिग बी की जगह लेंगे सलमान</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/08/03/salman-khan-will-be-in-bigboss-4-in-place-of-big-b/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/08/03/salman-khan-will-be-in-bigboss-4-in-place-of-big-b/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 03 Aug 2010 10:13:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[akshay kumar]]></category>
		<category><![CDATA[amitabh bachchan]]></category>
		<category><![CDATA[bigBoss]]></category>
		<category><![CDATA[salman khan]]></category>
		<category><![CDATA[sharkukh khan]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षय कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[अमिताभ बच्चन]]></category>
		<category><![CDATA[बिग बॉस]]></category>
		<category><![CDATA[शाहरुख खान]]></category>
		<category><![CDATA[सलमान खान]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=15452</guid>
		<description><![CDATA[बिग बॉस के अगले संस्करण में शाहरुख खान के नजर आने की चर्चाओं के बीच यह बाजी उनके प्रतिद्वंद्वी सलमान खान ने मार ली है। अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि बिग बॉस के चौथे संस्करण में वह अमिताभ बच्चन की जगह लेंगे। मनोरंजन चैनल कलर्स के एक सूत्र ने आईएएनएस को [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/08/salman-khan.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/08/salman-khan-216x300.jpg" alt="" title="salman-khan" width="216" height="300" class="alignright size-medium wp-image-15460" /></a><strong>बिग </strong>बॉस के अगले संस्करण में शाहरुख खान के नजर आने की चर्चाओं के बीच यह बाजी उनके प्रतिद्वंद्वी सलमान खान ने मार ली है। अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि बिग बॉस के चौथे संस्करण में वह अमिताभ बच्चन की जगह लेंगे।</p>
<p><strong>मनोरंजन </strong>चैनल कलर्स के एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, &#8220;अगले संस्करण के संचालन के लिए सलमान के नाम पर मुहर लग चुकी है। हम जल्द ही आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा करेंगे।&#8221;</p>
<p><strong>इससे </strong>पहले बिग बॉस-4 के संचालन की जिम्मेदारी शाहरुख खान या अक्षय कुमार को मिलने की चर्चा थी जबकि अमिताभ बच्चन टीवी इतिहास में अब तक के सबसे लोकप्रिय शो &#8216;कौन बनेगा करोड़पति&#8217; में वापसी कर रहे हैं।</p>
<p><strong>चैनल </strong>की योजना बिग बॉस-4 को अक्टूबर में लोगों के बीच लाने की है। इसकी &#8216;कौन बनेगा करोड़पति-4&#8242; के साथ टक्कर होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>सूत्र </strong>ने कहा, &#8220;हम हालांकि निश्चितरूप से नहीं कह सकते कि यह कार्यक्रम दर्शकों के बीच दोबारा कब आएगा लेकिन अक्टूबर में इसे शुरू करने की हमारी योजना है। तारीखों को लेकर अब भी काम चल रहा है।&#8221;</p>
<p>&#8216;<strong>बिग </strong>बॉस&#8217; ब्रिटेन के लोकप्रिय शो &#8216;बिग ब्रदर&#8217; का भारतीय संस्करण है। इसमें भाग लेने वाले प्रतिभागियों को तीन महीने के लिए एक मकान के भीतर रहना पड़ता है जहां कई निगरानी कैमरे लगे होते हैं और इन लोगों का बाहर की दुनिया से कोई संपर्क नहीं रह जाता है।</p>
<p><strong>बिग</strong> बॉस के पिछले तीन संस्करणों का संचालन क्रमश: अरशद वारसी, शिल्पा शेट्टी और अमिताभ बच्चन ने किया है।(आईएएनएस)। </p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/08/03/salman-khan-will-be-in-bigboss-4-in-place-of-big-b/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>अलग अंदाज में टीवी पर दिखेंगी प्रियंका</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/29/priyanka-will-be-seen-in-new-role/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/29/priyanka-will-be-seen-in-new-role/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 29 Jul 2010 09:11:46 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA['फैशन' और 'दोस्ताना' जैसी फिल्मों]]></category>
		<category><![CDATA[कलर्स]]></category>
		<category><![CDATA[बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[बॉलीवुड की फैशन डिजायनर अनीता श्रौफ अदाजानिया ने]]></category>
		<category><![CDATA[रोमांचक रिएलिटी शो 'फीयर फैक्टर-खतरों के खिलाड़ी-3']]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=14682</guid>
		<description><![CDATA[&#8216;फैशन&#8216; और &#8216;दोस्ताना&#8217; जैसी फिल्मों में अपनी छरहरी काया दिखाने के बाद अब बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा कलर्स पर प्रसारित होने वाले रोमांचक रिएलिटी शो &#8216;फीयर फैक्टर-खतरों के खिलाड़ी-3&#8242; में नए अंदाज में नजर आएंगी। इस 28 वर्षीया अभिनेत्री ने इस धारावाहिक के लिए जारी पहले प्रोमो में चौड़े बेल्ट वाली जींस के साथ-साथ घुटनों [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/Priyanka_Chopra.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/Priyanka_Chopra-300x206.jpg" alt="" title="Priyanka_Chopra" width="300" height="206" class="alignright size-medium wp-image-14684" /></a>&#8216;<strong>फैशन</strong>&#8216; और &#8216;दोस्ताना&#8217; जैसी फिल्मों में अपनी छरहरी काया दिखाने के बाद अब बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा कलर्स पर प्रसारित होने वाले रोमांचक रिएलिटी शो &#8216;फीयर फैक्टर-खतरों के खिलाड़ी-3&#8242; में नए अंदाज में नजर आएंगी।</p>
<p><strong>इस </strong>28 वर्षीया अभिनेत्री ने इस धारावाहिक के लिए जारी पहले प्रोमो में चौड़े बेल्ट वाली जींस के साथ-साथ घुटनों तक लंबाई वाले बूट, पीले रंग का टॉप, काले रंग का चमड़े का जैकेट और दस्ताने पहन रखे हैं।</p>
<p><strong>प्रियंका </strong>को यह बदला हुआ अंदाज दिया है बॉलीवुड की फैशन डिजायनर अनीता श्रौफ अदाजानिया ने। इससे पहले वह &#8216;धूम&#8217; और &#8216;रेस&#8217; जैसी फिल्मों में कलाकारों को नए लुक दे चुकी हैं।</p>
<p><strong>प्रियंका </strong>ने हाल में धारावाहिक के प्रोमो की शूटिंग के लिए बैंकाक का दौरा किया था। दर्शकों को उनकी नई वेशभूषा की पहली छवि अगले सप्ताह टेलीविजन पर देखने को मिलेगी।</p>
<p><strong>इस</strong> प्रोमो में प्रियंका को पुरुष बाइकर्स के साथ रेस में हिस्सा लेते दिखाया गया है। धारावाहिक &#8216;फीयर फैक्टर-खतरों के खिलाड़ी-3&#8242; के पहले दो संस्करणों को अभिनेता अक्षय कुमार ने पेश किया था। (आईएएनएस)।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/29/priyanka-will-be-seen-in-new-role/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>&#8216;डांस इंडिया डांस&#8217; के लिए आईएएस का सपना त्यागा</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/04/24/dance-india-dance-dream/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/04/24/dance-india-dance-dream/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 24 Apr 2010 12:58:15 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[रागरंग]]></category>
		<category><![CDATA[DANCE]]></category>
		<category><![CDATA[IAS]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[आईएएस]]></category>
		<category><![CDATA[इंडिया]]></category>
		<category><![CDATA[डांस]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=6841</guid>
		<description><![CDATA[शक्ति मोहन हमेशा से एक नौकरशाह बनना चाहती थीं लेकिन अब वह देश की एक नई नृत्य सनसनी बन गई हैं। &#8216;डांस इंडिया डांस 2&#8242; की विजेता शक्ति कहती हैं कि अब वह अपने दिल की सुनेंगी और अपने नृत्य के जुनून को पूरा करने की दिशा में काम करेंगी। उन्होंने आईएएनएस से एक साक्षात्कार [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/shakti-mohan-dance400.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/shakti-mohan-dance400-300x225.jpg" alt="" title="shakti-mohan-dance400" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-6844" /></a><strong>शक्ति</strong> मोहन हमेशा से एक नौकरशाह बनना चाहती थीं लेकिन अब वह देश की एक नई नृत्य सनसनी बन गई हैं। &#8216;डांस इंडिया डांस 2&#8242; की विजेता शक्ति कहती हैं कि अब वह अपने दिल की सुनेंगी और अपने नृत्य के जुनून को पूरा करने की दिशा में काम करेंगी।</p>
<p><strong>उन्होंने</strong> आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, &#8220;मैं स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई-लिखाई में हमेशा अव्वल रहती थी और मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाने के लिए दृढ़ थी लेकिन तभी &#8216;डांस इंडिया डांस&#8217; का पता चला और अब जब मैंने इसे जीत लिया है तो पीछे मुड़कर नहीं देखूंगी।&#8221;<span id="more-6841"></span></p>
<p><strong>राजनीति</strong> शास्त्र में स्नातकोत्तर शक्ति कहती हैं, &#8220;मेरे पिता चाहते थे कि मैं प्रशासनिक सेवा की परीक्षा की तैयारी करूं और कहते थे कि 30 वर्ष की होने तक मैं इस दिशा में कोशिश करती रहूं लेकिन अब मैं उस दिशा में आगे नहीं बढ़ूंगी। अब मैं नृत्य की शिक्षा लेने जा रही हूं।&#8221;</p>
<p><strong>चौबीस</strong> वर्षीय शक्ति छह महीने पहले जी टीवी के शो &#8216;डांस इंडिया डांस&#8217; में शामिल होने के लिए ऑडिशन देने आए हजारों प्रतिभागियों में शामिल थीं।</p>
<p><strong>ऑडीशन</strong> से पहले उन्होंने नृत्य निर्देशक टेरेंस लिवाइज के संस्थान से नृत्य में तीन साल का डिप्लोमा किया था। वहीं से उन्हें इस शो में शामिल होने की प्रेरणा मिली।</p>
<p><strong>शक्ति</strong> कहती हैं कि वह हमेशा से ही नृत्य के अध्ययन के लिए विदेश जाना चाहती थीं लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी के कारण ऐसा नहीं हो सका। अब उन्हें उम्मीद है कि वह बाहर जा सकेंगी और नृत्य निर्देशक बनने के काम में निखार ला सकेंगी और भारत में समकालीन नृत्य को बढ़ावा दे सकेंगी।</p>
<p><strong>उन्होंने</strong> कहा कि उन्हें इस शो के जरिए जो भी पैसा मिलेगा उससे वह बाहर और खासकर लंदन में नृत्य का प्रशिक्षण लेंगी। शक्ति कहती हैं कि वह समकालीन नृत्य के अलावा अन्य शैलियों के नृत्य जैसे कथक और हिप-हॉप भी सीखना चाहती हैं।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/04/24/dance-india-dance-dream/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>टीवी धारावाहिक &#8216;ग्ली&#8217; में काम करना चाहती हैं लोपेज</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/04/23/lopez-for-tv-serial/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/04/23/lopez-for-tv-serial/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 23 Apr 2010 12:20:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[रागरंग]]></category>
		<category><![CDATA[hollywood]]></category>
		<category><![CDATA[ग्‍ली]]></category>
		<category><![CDATA[लोपेज]]></category>
		<category><![CDATA[हॉलीवुड]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=6742</guid>
		<description><![CDATA[हॉलीवुड अभिनेत्री जेनिफर लोपेज अमेरिका में प्रसारित होने वाले हास्यप्रधान टेलीविजन धारावाहिक &#8216;ग्ली&#8217; की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और इस धारावाहिक में काम भी करना चाहती हैं। वेबसाइट &#8216;द इनसाइडर डॉट कॉम&#8217; के मुताबिक लोपेज ने अपनी यह इच्छा &#8216;एलेन डीजेनेरेस शो&#8217; के माध्यम से जाहिर की। लोपेज ने कार्यक्रम के दौरान कहा, &#8220;मैं एक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Lopez400.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Lopez400-300x225.jpg" alt="" title="Lopez400" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-6743" /></a><strong>हॉलीवुड </strong>अभिनेत्री जेनिफर लोपेज अमेरिका में प्रसारित होने वाले हास्यप्रधान टेलीविजन धारावाहिक &#8216;ग्ली&#8217; की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और इस धारावाहिक में काम भी करना चाहती हैं।</p>
<p><strong>वेबसाइट </strong>&#8216;द इनसाइडर डॉट कॉम&#8217; के मुताबिक लोपेज ने अपनी यह इच्छा &#8216;एलेन डीजेनेरेस शो&#8217; के माध्यम से जाहिर की।<span id="more-6742"></span></p>
<p><strong>लोपेज </strong>ने कार्यक्रम के दौरान कहा, &#8220;मैं एक दिन &#8216;ग्ली&#8217; के सहायक निर्माता रेयान मर्फी के साथ बैठी थी। मैंने उनसे कहा कि मैं इस धारावाहिक को लेकर कुछ करना चाहती हूं।&#8221;</p>
<p><strong>लोपेज </strong>ने कहा कि धारावाहिक के आठ अंकों की शूटिंग पूरी हो चुकी है और इस कारण उन्हें इस धारावाहिक का हिस्सा बनने के लिए कुछ समय तक इंतजार करना होगा।</p>
<p><strong>लोपेज </strong>ने कहा, &#8220;मैं इस अवसर के लिए इंतजार करने को तैयार हूं। मैं इस धारावाहिक की प्रशंसक हूं और जब बुलाया जाए, इसमें काम करने के लिए तैयार हूं।&#8221;</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/04/23/lopez-for-tv-serial/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>पूरे देश को “पप्पू” बना रहा है मीडिया</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2009/05/11/media-and-pappu-campaign/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2009/05/11/media-and-pappu-campaign/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 11 May 2009 15:42:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>समरेंद्र</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[थियेटर]]></category>
		<category><![CDATA[campaign]]></category>
		<category><![CDATA[election]]></category>
		<category><![CDATA[ethics]]></category>
		<category><![CDATA[pappu]]></category>
		<category><![CDATA[voting]]></category>
		<category><![CDATA[मीडिया]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=263</guid>
		<description><![CDATA[इस चुनाव में एक खास बात रही। मतदान को लेकर नेताओं और सियासी दलों से कहीं ज्यादा उत्साह मीडिया में नज़र आया। सभी चैनलों पर और अख़बारों में दिग्गज पत्रकार देश की जनता से वोट डालने की अपील करते नज़र आए। वोटरों को रिझाने के लिए हर तरकीब आजमाते दिखे। निजी कंपनियों के साथ मिल [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft" src="http://img3.orkut.com/images/milieu/1242050057/1242076489501/245893198/ep/Zut8huw.jpg?sig=1qde5zj" alt="" width="160" height="120" />इस चुनाव में एक खास बात रही। मतदान को लेकर नेताओं और सियासी दलों से कहीं ज्यादा उत्साह मीडिया में नज़र आया। सभी चैनलों पर और अख़बारों में दिग्गज पत्रकार देश की जनता से वोट डालने की अपील करते नज़र आए। वोटरों को रिझाने के लिए हर तरकीब आजमाते दिखे। निजी कंपनियों के साथ मिल कर कुछ मीडिया संस्थानों ने वोटरों को ललकारा तो कुछ ने वोट ना देने का फैसला करने वालों का मजाक भी उड़ाया। ऐसा लग रहा था जैसे चुनाव आयोग ने इस बार मीडिया को अपना एजेंट नियुक्त कर लिया हो। सवाल उठता है कि क्या मतदान कराना मीडिया की जिम्मेदारी है? और क्या वोट नहीं देने वालों को मूर्ख (पप्पू) बताना मीडिया का हक़ है?<span id="more-263"></span></p>
<p>इन दोनों सवालों के जवाब बहुत सीधे और सरल हैं। ये मीडिया की जिम्मेदारी नहीं है कि वो चुनाव आयोग के एजेंट की भूमिका निभाए। उसे ये हक़ भी नहीं है कि वो वोट नहीं देने वाले भारतीय नागरिकों को पप्पू (मूर्ख) कहे। उसका काम जनता तक सही ख़बरें पहुंचाना है। जनता को सूचनाओं से इस कदर लैस करना है कि वो सही और ग़लत का फ़ैसला ले सकें। अपने अधिकार का अपनी और देश की बेहतरी के लिए इस्तेमाल कर सकें। मीडिया का काम राजनीतिक दलों और नेताओं पर नज़र रखना था। ताकि कहीं कोई लोकतंत्र के महापर्व में गड़बड़ी फैलाने की साजिश ना करे। जनता के अधिकारों में सेंध लगाने की कोशिश ना करे। मगर इस चुनाव में ऐसा कुछ नहीं हुआ। मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया साथ ही अपने अधिकारों की सीमारेखा का उल्लंघन भी किया।</p>
<p>पूरे चुनाव के दौरान सभी बड़े चैनलों में मोटे-मोटे शब्दों में ये लिखा हुआ देखने को मिला कि “मत बनिये पप्पू, वोट दीजिये” या फिर “पप्पू फिर फेल हो गया” या “पप्पू पास हुआ, मगर कम नंबर से”. लेकिन किसी चैनल ने उतनी ही शिद्दत से चुनाव सुधारों के मुद्दे को नहीं उठाया। ये नहीं कहा कि हमारी चुनावी व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधारों का वक़्त आ गया है। वोटरों को वो तमाम अधिकार चाहिए, जिससे नेताओं की लगाम उनके हाथ में रहे। धांधली करने पर या फिर विश्वासघात करने पर नेता को सबक सिखाने के लिए उन्हें पांच साल तक इंतज़ार नहीं करना पड़े। वोटरों को तमाम अधिकारों से लैस कराने के लिए बुनियादी सवाल उठाने जरूरी थे। सियासी दलों से पूछना था कि चुनाव सुधारों को वो क्यों टाल रहे हैं? लेकिन मीडिया नेताओं की नीयत पर सवाल उठाने की जगह वोटरों को ही पप्पू साबित करने में जुटा रहा।</p>
<p>मीडिया ने ये सब किया तो आखिर क्यों? इसकी दो वजहें हैं। अनिश्चितता का भय और सामंती सोच। आज मीडिया बीते कई दशकों में सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कई बड़े संस्थान घाटे में हैं। बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है। हालात इतने बुरे हैं कि मीडिया संस्थान नेताओं के तलवे चाट रहे हैं। ख़बरों का सौदा कर रहे हैं। ईमान बेच रहे हैं। इन बुरे हालात में सबकी नज़रें चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं। अगर सरकार कांग्रेस या बीजेपी की अगुवाई में बनी, तो कई मीडिया संस्थानों का काम भी बन जाएगा। चुनाव से ठीक पहले ही यूपीए सरकार ने विज्ञापनों का बजट बढ़ाकर मीडिया कंपनियों की मदद की है। सत्ता फिर से मनमोहन सिंह के हाथ लगी तो ये कंपनियां बेलआउट पैकेज के लिए दबाव बनाएंगी। इन्हें उम्मीद है कि आर्थिक उदारीकरण के प्रणेता और आज के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनकी मांग को मान लेंगे।</p>
<p>कांग्रेस के बाद इन मीडिया संस्थानों की दूसरी पसंद बीजेपी है। इस पसंद का सबसे बड़ा आधार ये है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आर्थिक उदारीकरण में यकीन रखती है। यहां तक कि स्वयंसेवक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कई सरकारी कंपनियां औने-पौने दामों पर बेच दी गईं। इसके अलावा बीजेपी का मीडिया से काफी गहरा रिश्ता रहा है। कई संपादक बीजेपी के सांसद हैं। बीजेपी चाहेगी कि ज्यादा से ज्यादा मीडिया कंपनियों को एहसान के बोझ तले दबा कर नैतिक तौर पर भ्रष्ट किया जा सके।</p>
<p>इससे मीडिया संस्थानों को एक नुकसान भी होगा। उनकी आज़ादी छिन जाएगी। सरकारी मदद लेने वाले अख़बार और न्यूज़ चैनल सरकार के किसी ग़लत फैसले को चुनौती देने का साहस नहीं कर सकेंगे। लेकिन आज के दौर में ये साहस कर भी कौन रहा है? अभी मीडिया संस्थान कांग्रेस और बीजेपी दोनों को साधने में जुटे हैं। अनिश्चितता का भय इतना अधिक है कि लम्बे समय से बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति की आलोचना करने वाले एक बड़े न्यूज़ चैनल ने आडवाणी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। वो भी जूरी को भरोसे में लिये बगैर।</p>
<p>अब बात मीडिया की सामाजिक सोच की। आज ज्यादातर अख़बारों और न्यूज़ चैनलों में ऊंचे पदों पर बैठे पत्रकार ऊंची जाति से हैं। इनकी सोच सामंती है। यही सोच इन्हें व्यवस्था के तमाम अंगों का पिछलग्गू बना देती है। साथ ही व्यवस्था में किसी भी तरह के बुनियादी बदलाव का विरोधी भी। इनमें से ज्यादातर तीसरे और चौथे मोर्चे के घटकों को हिकारत की नज़र से देखते हैं। लेकिन ये जानते हैं कि उन दलों का खुलकर विरोध करने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए वो खुल कर छोटे दलों का विरोध करने की बजाय, दोनों बड़े दलों के समर्थन का रास्ता चुनते हैं। मतदान देने के लिए प्रेरित करने की मुहिम भी उसी समर्थन का हिस्सा है। उनकी कोशिश है कि वोटिंग के दिन घरों में दुबक कर बैठने वाले मध्य वर्ग को ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे सबसे अधिक फायदा कांग्रेस और बीजेपी को ही होगा। कुल मिला कर, आज अगर ये कहा जाए कि मीडिया अपने स्वार्थ के लिए पूरे देश को “पप्पू” बना रहा है तो ग़लत नहीं होगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2009/05/11/media-and-pappu-campaign/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>लोकतंत्र को मीडिया ने बनाया बंधक</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2009/05/05/shame-on-media/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2009/05/05/shame-on-media/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 05 May 2009 02:59:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>समरेंद्र</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
		<category><![CDATA[indian]]></category>
		<category><![CDATA[news]]></category>
		<category><![CDATA[selling]]></category>
		<category><![CDATA[shame]]></category>
		<category><![CDATA[मीडिया]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://janatantra.com/?p=85</guid>
		<description><![CDATA[हमारे अख़बार और संपादक देश का नाम कितना रोशन कर रहे हैं वो वॉल स्ट्रीट जरनल में छपी एक रिपोर्ट से जाहिर होता है। इस रिपोर्ट की हेडिंग है “वांट प्रेस कवरेज, गिव में सम मनी” यानी “प्रेस कवरेज चाहते हो तो मुझे कुछ पैसे दो”. इसे लिखा है दिल्ली में मौजूद उसके चीफ ऑफ [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a href="/wp-content/uploads/2009/05/cash-rs-200.jpg"><img class="alignleft size-full wp-image-88" title="cash-rs-200" src="http://janatantra.com/wp-content/uploads/2009/05/cash-rs-200.jpg" alt="cash-rs-200" width="200" height="150" /></a>हमारे अख़बार और संपादक देश का नाम कितना रोशन कर रहे हैं वो वॉल स्ट्रीट जरनल में छपी एक रिपोर्ट से जाहिर होता है। इस रिपोर्ट की हेडिंग है <a href="http://online.wsj.com/article/SB124158152250690795.html">“वांट प्रेस कवरेज, गिव में सम मनी” </a>यानी “प्रेस कवरेज चाहते हो तो मुझे कुछ पैसे दो”. इसे लिखा है दिल्ली में मौजूद उसके चीफ ऑफ ब्यूरो पॉल बैकेट ने। रिपोर्ट की हेडिंग से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसमें भारतीय मीडिया के किस चेहरे का ब्योरा होगा? <span id="more-85"></span></p>
<p>रिपोर्ट में चंडीगढ़ से किस्मत आजमा रहे निर्दलीय उम्मीदवार अजय गोयल का जिक्र है। अजय गोयल का कहना है कि कम से कम दस अख़बारों के दलालों ने उनसे कवरेज के लिए पैसे मांगे हैं। पैसे नहीं देने पर उनके बारे में एक भी ख़बर अख़बारों ने नहीं छापी है। अजय गोयल पूछ रहे हैं कि जहां मीडिया में दलाली इस कदर हावी है तो फिर जनता के पढ़े लिखे होने का क्या फायदा? जब लोगों को सही और सच्ची जानकारी नहीं मिलेगी तो फिर वो सही फैसला कैसे करेंगे? सवाल जायज हैं और आरोप भी सही। अजय गोयल पहले और आखिरी शख़्स नहीं हैं जिसने मीडिया पर दलाली का आरोप लगाया है। उनसे पहले कई और नेता ये आरोप लगा चुके हैं। रही सही कसर इस रिपोर्ट ने पूरी कर दी है। भारतीय मीडिया का ये घिनौना चेहरा अब पूरी दुनिया के सामने है।</p>
<p>भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। उसे ये स्थान संविधान ने नहीं दिया है। संविधान के मुताबिक तो लोकतंत्र के सिर्फ तीन ही स्तंभ हैं। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। अगर प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने का गौरव मिला तो ये गौरव उसने काम से हासिल किया था। उसका कर्म और धर्म तो तीनों स्तंभों के चाल-चलन और चरित्र पर नज़र रखना है। ताकि जनता को वक़्त रहते आगाह किया जा सके कि उसके साथ कहां और कौन विश्वासघात कर रहा है। लेकिन अब लगता है कि मीडिया का कर्म और धर्म दलाली के सिवाय कुछ नहीं। आज उसमें बाकी तीनों स्तंभों से कहीं ज्यादा गंदगी है। और ये गंदगी सिर्फ अख़बारों में नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के न्यूज चैनलों में भी है।</p>
<p>कुछ दिन पहले एक वरिष्ठ पत्रकार ने देश के सबसे सम्मानित चैनल का सच बयां किया। उन्होंने बताया कि उस चैनल को कुछ पार्टियों ने कवरेज के लिए मोटी रकम दी है। मुझे उस वक़्त तो उनकी बात पर यकीन नहीं हुआ। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मैं उस चैनल को लगातार देख रहा हूं और अब वरिष्ठ पत्रकार के आरोप में दम नज़र आ रहा है। इस सम्मानित चैनल पर गिने-चुने चेहरे ही नज़र आते हैं और उनमें से ज्यादातर उन्हीं पार्टियों के हैं। यही नहीं चाटूकारिता का आलम तो ऐसा है कि ये सम्मानित चैनल सत्तारूढ़ पार्टी का माउथ पीस नज़र आ रहा है।</p>
<p>ये सच बस एक चैनल का नहीं है। हाल ही में मुझे एक और वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के एक बड़े नेता के प्रचार के लिए दो चैनलों के नुमाइंदो से बात कराई है। उन दोनों चैनलों में से एक ने कवरेज के लिए उस नेता से 40 लाख रुपये मांगे और दूसरे ने 20 लाख रुपये। अगर एक नेता से इतने पैसे वसूले जा रहे हैं तो इस चुनावी महापर्व में भ्रष्ट चैनलों की काली कमाई का आप अंदाजा लगा सकते हैं। ये समझ सकते हैं कि आज मीडिया जनता को कितना ख़बरदार करती है और कितना गुमराह।</p>
<p>तीन चैनलों के सच के बाद अब दिल्ली के एक बड़े अख़बार का सच। राष्ट्रीय स्तर के इस अख़बार में सीरीज चलाई जा रही है। सीरीज में दिल्ली में हर संसदीय क्षेत्र के कांग्रेस और बीजेपी उम्मीदवार पाठकों के सवालों का जवाब देते हैं। एक दिन अख़बार में तीसरी पार्टी के एक रईस उम्मीदवार का चेहरा देख, मैं सोच में पड़ गया। जब बाकी संसदीय क्षेत्रों से सिर्फ दो दलों के उम्मीदवारों से सवाल-जवाब हुए तो इस संसदीय क्षेत्र के तीन दलों के उम्मीदवार क्यों? मेरे सोचने की एक वजह भी है। बीते हफ्ते मेरे एक परिचित के हवाले से उसी उम्मीदवार के एक करीबी कारोबारी ने मुझे फोन किया था। वो चाहता था कि मैं जिस चैनल से जुड़ा था उस चैनल में कवरेज के लिए उसकी बात करा दूं। मैंने तो टाल दिया, लेकिन लगता है कि उसे कई जगहों पर कामयाबी मिल गई थी।</p>
<p>अंत में, मैं, आपका ध्यान फिर से पॉल बैकेट के रिपोर्ट की कुछ पंक्तियों की तरफ खींचना चाहता हूं। वो लिखते हैं कि भारत में पहले भी पत्रकारों की दलाली की ख़बरें सामने आती रही हैं, “लेकिन इस बार ये सबकुछ इतने बड़े स्तर पर हुआ है कि रिपोर्टरों, संपादकों और अख़बार मालिकों ने फिरौती के लिए पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही बंधक बना लिया है। स्वतंत्र प्रेस (हर पहलू में) किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र का बुनियादी हिस्सा है। उसी तरह एक भ्रष्ट प्रेस न केवल सड़े-गले लोकतंत्र की निशानी है बल्कि उसकी वजह भी”।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2009/05/05/shame-on-media/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
