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	<title>जनतंत्र &#187; थियेटर</title>
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	<description>बोल के लब आज़ाद हैं तेरे</description>
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		<title>फैशन सप्ताह में छा गईं श्वेता नंदा</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Jul 2010 13:15:50 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[कॉरपोरेट]]></category>
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		<description><![CDATA[&#8216;पर्ल्स इंफ्रास्ट्रक्चर देहली काउचर वीक&#8217; में डिजाइनर द्वय अबू जानी-संदीप खोसला के लिए रैंप पर उतरीं बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की सुपुत्री श्वेता नंदा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। यही नहीं उनकी मौजूदगी ने इसी शो के लिए मॉडलिंग कर रहे आस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी ब्रेट ली की चमक भी फीकी कर दी। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/shweta.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/shweta.jpg" alt="" title="shweta" width="210" height="170" class="alignright size-full wp-image-14369" /></a>&#8216;<strong>पर्ल्स </strong>इंफ्रास्ट्रक्चर देहली काउचर वीक&#8217; में डिजाइनर द्वय अबू जानी-संदीप खोसला के लिए रैंप पर उतरीं बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की सुपुत्री श्वेता नंदा ने सभी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। यही नहीं उनकी मौजूदगी ने इसी शो के लिए मॉडलिंग कर रहे आस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी ब्रेट ली की चमक भी फीकी कर दी।</p>
<p><strong>मुंबई </strong>का यह डिजाइनर द्वय बच्चन परिवार का पसंदीदा है और उम्मीद की जा रही थी कि रविवार को समाप्त होने जा रहे फैशन सप्ताह में इस परिवार को कोई न कोई सदस्य अबू-खोसला के लिए रैंप पर उतरेगा।</p>
<p><strong>श्वेता </strong>कमल के आकार की त्रिआयामी पोशाक में रैंप पर चलती हुई प्रफुल्लित दिख रही थीं तो बैगीनुमा धोती और शेरवानी पहने ब्रेट ली शर्मीले नजर आ रहे थे।</p>
<p><strong>डिजाइनर </strong>द्वय ने अपनी इस परिधान श्रृंखला के माध्यम से गायिका मैडोना, लेडी गागा और काइली मिनॉग को सम्मानित किया और शो के दौरान उनकी एलबमों के लोकप्रिय गीत बजाए।</p>
<p><strong>उनके </strong>वस्त्र संग्रह में आधुनिक पोशाकें भी थीं तो पारंपरिक साड़ी को भी नए रूप में पेश किया गया था। (आईएएनएस)</p>
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		<title>&#8216;द नेक्स्ट बिग थिंग&#8217; चुने गए अंसारी</title>
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		<pubDate>Tue, 06 Jul 2010 08:22:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
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		<category><![CDATA[अजीज अंसारी]]></category>
		<category><![CDATA[दि नेक्‍स्‍ट बिग थिंग]]></category>

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		<description><![CDATA[अमेरिकी व्यापार पत्रिका फोर्ब्स ने 17 हस्तियों के बीच भारतीय मूल के अमेरिकी अभिनेता और हास्य कलाकार अजीज अंसारी को &#8216;द नेक्स्ट बिग थिंग&#8217; चुना है। सत्ताईस वर्षीय अंसारी की फिल्म &#8216;फनी पीपल&#8217; ने पिछले साल दुनियाभर में बॉक्सऑफिस पर सात करोड़ डॉलर का व्यवसाय किया था। अंसारी के माता-पिता तमिलनाडु से यहां आकर बस [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/ansari.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/ansari-300x168.jpg" alt="" title="ansari" width="300" height="168" class="alignright size-medium wp-image-12771" /></a><strong>अमेरिकी </strong>व्यापार पत्रिका फोर्ब्स ने 17 हस्तियों के बीच भारतीय मूल के अमेरिकी अभिनेता और हास्य कलाकार अजीज अंसारी को &#8216;द नेक्स्ट बिग थिंग&#8217; चुना है।</p>
<p><strong>सत्ताईस </strong>वर्षीय अंसारी की फिल्म &#8216;फनी पीपल&#8217; ने पिछले साल दुनियाभर में बॉक्सऑफिस पर सात करोड़ डॉलर का व्यवसाय किया था। अंसारी के माता-पिता तमिलनाडु से यहां आकर बस गए थे।<span id="more-12769"></span></p>
<p><strong>अंसारी</strong> एपोटो और जीई यूनीवर्सल पिक्चर्स के साथ तीन फिल्में बना रहे हैं। इसके अलावा वह एनबीसी के कॉमेडी शो &#8216;पार्क्‍स एंड रीक्रिएशन&#8217; में अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में टॉम क्रूज और सांड्रा बुलॉक के साथ एमटीवी मूवी अवार्ड्स कार्यक्रम की मेजबानी की थी।</p>
<p>अंसारी अपने प्रशंसकों के बीच खासे मशहूर हैं। ट्विटर पर उनके 260,000 प्रशंसक हैं।</p>
<p>फोर्ब्स ने जिन 17 लोगों की सूची तैयार की थी उनमें जस्टिन बीबर, &#8216;किंग्स ऑफ लियोन&#8217; समूह, &#8216;ट्वाइलाइट&#8217; अभिनेता टेलर लॉटनर और जो साल्डाना जैसी हस्तियां शामिल थीं। (आईएएनएस)</p>
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		<title>गंभीर भूमिकाओं से उकता गई हैं सीमा बिस्वास</title>
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		<pubDate>Wed, 23 Jun 2010 08:00:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
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		<category><![CDATA[गंभीर भूमिकाओं से उकता गई हैं सीमा बिस्वास]]></category>
		<category><![CDATA[सीमा विस्‍वास]]></category>

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		<description><![CDATA[अभिनेत्री सीमा बिस्वास हमेशा गंभीर भूमिकाएं मिलने से उकता चुकी हैं। ‘बैंडिट क्वीन’, ‘खामोशी’ और ‘वाटर’ जैसी फिल्मों में गंभीर चरित्र भूमिकाएं करने के बाद यह प्रतिभाशाली अभिनेत्री कुछ हल्की-फुल्की और मनोरंजक भूमिकाएं भी करना चाहती है। बिस्वास ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस से कहा, &#8220;मैं गंभीर भूमिकाएं करके बहुत उकता चुकी हूं। मुझे हमेशा [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/06/seema.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/06/seema-300x225.jpg" alt="" title="seema" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-11735" /></a><strong>अभिनेत्री </strong>सीमा बिस्वास हमेशा गंभीर भूमिकाएं मिलने से उकता चुकी हैं। ‘बैंडिट क्वीन’, ‘खामोशी’ और ‘वाटर’ जैसी फिल्मों में गंभीर चरित्र भूमिकाएं करने के बाद यह प्रतिभाशाली अभिनेत्री कुछ हल्की-फुल्की और मनोरंजक भूमिकाएं भी करना चाहती है।</p>
<p><strong>बिस्वास </strong>ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस से कहा, &#8220;मैं गंभीर भूमिकाएं करके बहुत उकता चुकी हूं। मुझे हमेशा इसी तरह की भूमिकाओं के प्रस्ताव मिलते हैं और मैं हर बार समर्पण और ईमानदारी से इस तरह की भूमिकाएं करती हूं लेकिन अब मैं इस सब से उकता चुकी हूं।&#8221;</p>
<p><strong>उन्होंने </strong>कहा, &#8220;यही एक वजह है जिसके कारण मैं अब चुनने लगी हूं। ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ के दिनों में मैं मंच पर हास्य भूमिकाएं करने की आदी थी और यह बहुत मजेदार होता था।&#8221;</p>
<p><strong>बिस्वास</strong> ने दीपा मेहता की फिल्म ‘कुकिंग विद स्टेला’ में हास्य भूमिका की है और अब उन्हें इसी तरह की भूमिकाओं की तलाश है।</p>
<p><strong>उन्होंने </strong>बताया, &#8220;‘कुकिंग विद स्टेला’ जल्दी ही भारत में प्रदर्शित होगी। मैं इस तरह की और भूमिकाएं करना चाहती हूं।&#8221;</p>
<p><strong>बिस्वास </strong>ने शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में मुख्य भूमिका से हिंदी फिल्मोद्योग में अपने अभिनय की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने ‘हजार चौरासी की मां’, ‘एक हसीना थी’ और ‘पिंजर’ जैसी कई फिल्मों में अभिनय किया।</p>
<p><strong>रंगमंच </strong>में अपनी जड़ें जमा चुकी बिस्वास ने कई मराठी, मलयालम और तमिल फिल्मों में भी अभिनय किया है।</p>
<p><strong>हास्य </strong>भूमिकाएं तलाश रहीं बिस्वास को अब अपनी नई फिल्म ‘रेड अलर्ट-द वार विदइन’ का बेसब्री से इंतजार है। इस फिल्म में उन्होंने एक नक्सली की भूमिका निभाई है।</p>
<p>‘<strong>रेड </strong>अलर्ट-द वार विदइन’ में नक्सली की भूमिका पर बिस्वास कहती हैं, &#8220;यह बहुत चुनौतीपूर्ण भूमिका है और मुझे इसमें यही अच्छा लगा। फिल्म की कहानी बहुत मजबूत है। मैंने एक ऐसी महिला की भूमिका की है जो दबंग है और जिसे किसी का डर नहीं है।&#8221;</p>
<p><strong>अनंत </strong>महादेवन के निर्देशन में बनी ‘रेड अलर्ट-द वार विदइन’ का नौ जुलाई को बड़े पर्दे पर प्रदर्शन होगा। (आईएएनएस)</p>
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		<title>केली अभी रहेगी अकेली</title>
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		<pubDate>Fri, 30 Apr 2010 07:29:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[पॉप गायिका केली अभी अकेली ही रहना चाहती है। केली ऑस्बर्न का कहना है कि उनका अपने मंगेतर ल्यूक वोरेल से फिलहाल शादी करने का कोई इरादा नहीं है। वेबसाइट &#8216;फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके&#8217; ने केली के हवाले से बताया, &#8220;मेरा शादी करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। मैं फिलहाल शादी नहीं करना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Kelly+Luke4002.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-7403" title="Kelly+Luke400" src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Kelly+Luke4002-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a>पॉप </strong>गायिका केली अभी अकेली ही रहना चाहती है। केली ऑस्बर्न का कहना है कि उनका अपने मंगेतर ल्यूक वोरेल से फिलहाल शादी करने का कोई इरादा नहीं है।</p>
<p><strong>वेबसाइट </strong>&#8216;फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके&#8217; ने केली के हवाले से बताया, &#8220;मेरा शादी करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। मैं फिलहाल शादी नहीं करना चाहती हूं। मेरी उम्र 30 साल है। मेरी मां अभी शादी नहीं करने देगी।&#8221;<span id="more-7402"></span></p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के बीच मजबूत संबंधों में कोई दरार न पड़े, इसलिए दोनों ने सगाई करना बेहतर समझा। (आईएएनएस)</p>
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		<title>रोजाना टूथब्रश इस्तेमाल नहीं करतीं सिम्पसन</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Apr 2010 11:52:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[गायिका जेसिका सिम्पसन कहती हैं कि वह सप्ताह में केवल तीन बार ही अपने दांत टूथब्रश से साफ करती हैं। वह कहती है कि वह अपने दांतों की सफेदी को खराब नहीं करना चाहतीं। वेबसाइट &#8216;कांटेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम&#8217; के मुताबिक सिम्पसन कहती हैं, &#8220;मेरे दांत बहुत सफेद हैं और मैं उन्हें बहुत अधिक चिकना [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Jessica-Simpson400.jpg"><img class="alignright size-medium wp-image-7229" title="Jessica-Simpson400" src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/04/Jessica-Simpson400-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a>गायिका </strong>जेसिका सिम्पसन कहती हैं कि वह सप्ताह में केवल तीन बार ही अपने दांत टूथब्रश से साफ करती हैं। वह कहती है कि वह अपने दांतों की सफेदी को खराब नहीं करना चाहतीं।</p>
<p><strong>वेबसाइट</strong> &#8216;कांटेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम&#8217; के मुताबिक सिम्पसन कहती हैं, &#8220;मेरे दांत बहुत सफेद हैं और मैं उन्हें बहुत अधिक चिकना नहीं बनाना चाहती हूं लेकिन मैं लिस्ट्रीन (माउथवॉश) का इस्तेमाल जरूरी करती हूं और रोजाना धागे से दांत साफ करती हूं।&#8221;<span id="more-7228"></span></p>
<p><strong>उनतीस</strong> वर्षीय सिम्पसन अपनी सांसों को तरोताजा रखने के लिए हर रोज माउथवॉश का इस्तेमाल करती हैं और धागे से दांत साफ करती हैं लेकिन वह रोज टूथपेस्ट से ब्रश करने से बचती हैं। (आईएएनएस)</p>
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		<title>पूरे देश को “पप्पू” बना रहा है मीडिया</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2009 15:42:31 +0000</pubDate>
		<dc:creator>समरेंद्र</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेलीविजन]]></category>
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		<description><![CDATA[इस चुनाव में एक खास बात रही। मतदान को लेकर नेताओं और सियासी दलों से कहीं ज्यादा उत्साह मीडिया में नज़र आया। सभी चैनलों पर और अख़बारों में दिग्गज पत्रकार देश की जनता से वोट डालने की अपील करते नज़र आए। वोटरों को रिझाने के लिए हर तरकीब आजमाते दिखे। निजी कंपनियों के साथ मिल [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><img class="alignleft" src="http://img3.orkut.com/images/milieu/1242050057/1242076489501/245893198/ep/Zut8huw.jpg?sig=1qde5zj" alt="" width="160" height="120" />इस चुनाव में एक खास बात रही। मतदान को लेकर नेताओं और सियासी दलों से कहीं ज्यादा उत्साह मीडिया में नज़र आया। सभी चैनलों पर और अख़बारों में दिग्गज पत्रकार देश की जनता से वोट डालने की अपील करते नज़र आए। वोटरों को रिझाने के लिए हर तरकीब आजमाते दिखे। निजी कंपनियों के साथ मिल कर कुछ मीडिया संस्थानों ने वोटरों को ललकारा तो कुछ ने वोट ना देने का फैसला करने वालों का मजाक भी उड़ाया। ऐसा लग रहा था जैसे चुनाव आयोग ने इस बार मीडिया को अपना एजेंट नियुक्त कर लिया हो। सवाल उठता है कि क्या मतदान कराना मीडिया की जिम्मेदारी है? और क्या वोट नहीं देने वालों को मूर्ख (पप्पू) बताना मीडिया का हक़ है?<span id="more-263"></span></p>
<p>इन दोनों सवालों के जवाब बहुत सीधे और सरल हैं। ये मीडिया की जिम्मेदारी नहीं है कि वो चुनाव आयोग के एजेंट की भूमिका निभाए। उसे ये हक़ भी नहीं है कि वो वोट नहीं देने वाले भारतीय नागरिकों को पप्पू (मूर्ख) कहे। उसका काम जनता तक सही ख़बरें पहुंचाना है। जनता को सूचनाओं से इस कदर लैस करना है कि वो सही और ग़लत का फ़ैसला ले सकें। अपने अधिकार का अपनी और देश की बेहतरी के लिए इस्तेमाल कर सकें। मीडिया का काम राजनीतिक दलों और नेताओं पर नज़र रखना था। ताकि कहीं कोई लोकतंत्र के महापर्व में गड़बड़ी फैलाने की साजिश ना करे। जनता के अधिकारों में सेंध लगाने की कोशिश ना करे। मगर इस चुनाव में ऐसा कुछ नहीं हुआ। मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लिया साथ ही अपने अधिकारों की सीमारेखा का उल्लंघन भी किया।</p>
<p>पूरे चुनाव के दौरान सभी बड़े चैनलों में मोटे-मोटे शब्दों में ये लिखा हुआ देखने को मिला कि “मत बनिये पप्पू, वोट दीजिये” या फिर “पप्पू फिर फेल हो गया” या “पप्पू पास हुआ, मगर कम नंबर से”. लेकिन किसी चैनल ने उतनी ही शिद्दत से चुनाव सुधारों के मुद्दे को नहीं उठाया। ये नहीं कहा कि हमारी चुनावी व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधारों का वक़्त आ गया है। वोटरों को वो तमाम अधिकार चाहिए, जिससे नेताओं की लगाम उनके हाथ में रहे। धांधली करने पर या फिर विश्वासघात करने पर नेता को सबक सिखाने के लिए उन्हें पांच साल तक इंतज़ार नहीं करना पड़े। वोटरों को तमाम अधिकारों से लैस कराने के लिए बुनियादी सवाल उठाने जरूरी थे। सियासी दलों से पूछना था कि चुनाव सुधारों को वो क्यों टाल रहे हैं? लेकिन मीडिया नेताओं की नीयत पर सवाल उठाने की जगह वोटरों को ही पप्पू साबित करने में जुटा रहा।</p>
<p>मीडिया ने ये सब किया तो आखिर क्यों? इसकी दो वजहें हैं। अनिश्चितता का भय और सामंती सोच। आज मीडिया बीते कई दशकों में सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। कई बड़े संस्थान घाटे में हैं। बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है। हालात इतने बुरे हैं कि मीडिया संस्थान नेताओं के तलवे चाट रहे हैं। ख़बरों का सौदा कर रहे हैं। ईमान बेच रहे हैं। इन बुरे हालात में सबकी नज़रें चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं। अगर सरकार कांग्रेस या बीजेपी की अगुवाई में बनी, तो कई मीडिया संस्थानों का काम भी बन जाएगा। चुनाव से ठीक पहले ही यूपीए सरकार ने विज्ञापनों का बजट बढ़ाकर मीडिया कंपनियों की मदद की है। सत्ता फिर से मनमोहन सिंह के हाथ लगी तो ये कंपनियां बेलआउट पैकेज के लिए दबाव बनाएंगी। इन्हें उम्मीद है कि आर्थिक उदारीकरण के प्रणेता और आज के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनकी मांग को मान लेंगे।</p>
<p>कांग्रेस के बाद इन मीडिया संस्थानों की दूसरी पसंद बीजेपी है। इस पसंद का सबसे बड़ा आधार ये है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आर्थिक उदारीकरण में यकीन रखती है। यहां तक कि स्वयंसेवक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में कई सरकारी कंपनियां औने-पौने दामों पर बेच दी गईं। इसके अलावा बीजेपी का मीडिया से काफी गहरा रिश्ता रहा है। कई संपादक बीजेपी के सांसद हैं। बीजेपी चाहेगी कि ज्यादा से ज्यादा मीडिया कंपनियों को एहसान के बोझ तले दबा कर नैतिक तौर पर भ्रष्ट किया जा सके।</p>
<p>इससे मीडिया संस्थानों को एक नुकसान भी होगा। उनकी आज़ादी छिन जाएगी। सरकारी मदद लेने वाले अख़बार और न्यूज़ चैनल सरकार के किसी ग़लत फैसले को चुनौती देने का साहस नहीं कर सकेंगे। लेकिन आज के दौर में ये साहस कर भी कौन रहा है? अभी मीडिया संस्थान कांग्रेस और बीजेपी दोनों को साधने में जुटे हैं। अनिश्चितता का भय इतना अधिक है कि लम्बे समय से बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति की आलोचना करने वाले एक बड़े न्यूज़ चैनल ने आडवाणी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। वो भी जूरी को भरोसे में लिये बगैर।</p>
<p>अब बात मीडिया की सामाजिक सोच की। आज ज्यादातर अख़बारों और न्यूज़ चैनलों में ऊंचे पदों पर बैठे पत्रकार ऊंची जाति से हैं। इनकी सोच सामंती है। यही सोच इन्हें व्यवस्था के तमाम अंगों का पिछलग्गू बना देती है। साथ ही व्यवस्था में किसी भी तरह के बुनियादी बदलाव का विरोधी भी। इनमें से ज्यादातर तीसरे और चौथे मोर्चे के घटकों को हिकारत की नज़र से देखते हैं। लेकिन ये जानते हैं कि उन दलों का खुलकर विरोध करने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए वो खुल कर छोटे दलों का विरोध करने की बजाय, दोनों बड़े दलों के समर्थन का रास्ता चुनते हैं। मतदान देने के लिए प्रेरित करने की मुहिम भी उसी समर्थन का हिस्सा है। उनकी कोशिश है कि वोटिंग के दिन घरों में दुबक कर बैठने वाले मध्य वर्ग को ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे सबसे अधिक फायदा कांग्रेस और बीजेपी को ही होगा। कुल मिला कर, आज अगर ये कहा जाए कि मीडिया अपने स्वार्थ के लिए पूरे देश को “पप्पू” बना रहा है तो ग़लत नहीं होगा।</p>
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