<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जनतंत्र &#187; टेक्नॉलोजी</title>
	<atom:link href="http://www.janatantra.com/news/category/technology/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.janatantra.com/news</link>
	<description>बोल के लब आज़ाद हैं तेरे</description>
	<lastBuildDate>Sat, 02 Jul 2011 08:15:52 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.2.1</generator>
		<item>
		<title>13 अप्रैल 2036,क्षुद्र ग्रह के टकराने से तबाह हो सकती है धरती</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2011/02/12/2036due-to-the-collision-of-a-asteroid-the-earth-may-get-vanished/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2011/02/12/2036due-to-the-collision-of-a-asteroid-the-earth-may-get-vanished/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 12 Feb 2011 08:28:34 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA[देश - दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[asteroid]]></category>
		<category><![CDATA[NASA]]></category>
		<category><![CDATA[उल्का]]></category>
		<category><![CDATA[उल्का ‘एपोफिस’]]></category>
		<category><![CDATA[नासा]]></category>
		<category><![CDATA[पृथ्वी से टकराने]]></category>
		<category><![CDATA[विशालकाय क्षुद्र ग्रह]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=21566</guid>
		<description><![CDATA[करीब 40 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही उल्का के 13 अप्रैल 2036 को पृथ्वी से टकराने की आशंका रूसी वैज्ञानिकों ने जताई है।वैज्ञानिकों की माने तो 40,000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से आ रहे विशालकाय क्षुद्र ग्रह के टकराने से धरती तबाह हो सकती है। करीब ढाई सौ मीटर चौड़ी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2011/02/earth.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2011/02/earth.jpg" alt="" title="earth" width="265" height="230" class="alignright size-full wp-image-21567" /></a><strong>करीब </strong>40 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही उल्का के 13 अप्रैल 2036 को पृथ्वी से टकराने की आशंका रूसी वैज्ञानिकों ने जताई है।वैज्ञानिकों की माने तो 40,000 मील प्रति घंटा की रफ्तार से आ रहे विशालकाय क्षुद्र ग्रह के टकराने से धरती तबाह हो सकती है। करीब ढाई सौ मीटर चौड़ी यह उल्का 2029 में पृथ्वी के करीब से गुजरेगी। इसे चेतावनी का समय माना जा रहा है, जब यह पता चलेगा कि उल्का का रुख क्या होगा।</p>
<p><strong>वैज्ञानिकों </strong>के अनुसार धरती के काफी निकट स्थित 275 मीटर चौड़ा क्षुद्रग्रह धरती के काफी शक्तिशाली गुरूत्वीय केंद्र की होल से अप्रैल 2029 में गुजरेगा और सात साल बाद लगभग 13 अप्रैल 2036 को यह धरती से टकरायेगा।</p>
<p><strong>उल्का </strong>‘एपोफिस’ के बारे में कहा जा रहा है कि वह अप्रैल 2029 में पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगी। यदि उस पर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का असर हो गया, तो उल्का सात साल बाद वापस लौटकर पृथ्वी से टकरा सकती है। वैज्ञानिक इसे ‘की-होल’ असर बता रहे हैं। हालांकि, नासा ने इसके टकराने की संभावना ढाई लाख बार में एक बताई है।</p>
<p><strong>गौरतलब </strong>है कि धरती के गुरूत्वाकषर्ण के काफी शक्तिशाली होने के कारण जब यह क्षुद्र ग्रह इसके काफी निकट से गुजरेगा तो इस बल की वजह से यह क्षुद्रग्रह अपने रास्ते से विचलित हो जायेगा।</p>
<p><strong>नासा </strong>के नीयर अर्थ आब्जेक्ट प्रोग्राम कार्यालय के निदेशक डोनाल्ड योमांस ने बताया कि धरती के गुरूत्वाकर्षण की वजह से यह क्षुद्र अपने रास्ते से विचलित होगा और इस बात की संभावना बनती है कि यह धरती से टकरा जाये।</p>
<p><strong>डेली </strong>मेल ने डोनाल्ड के हवाले से बताया कि यह स्थिति 13 अप्रैल 2029 को हो सकती है। क्षुद्र ग्रह के धरती के काफी निकट होने के कारण ऐसा हो सकता है लेकिन हमनें इस समय धरती के टकराने संबंधी संभावनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है।</p>
<p><strong>उन्होंने </strong>बताया कि अगर यह धरती के काफी करीब यानी की होल के पास से गुजरता है तो यह अपने रास्ते से विचलित होगा और 13 अप्रैल 2036 को सीधा धरती से आ टकरायेगा।</p>
<p><strong>नासा</strong> वैज्ञानिक ने कहा कि यह टक्कर वैसी नहीं होगी जिस तरह 2036 में क्षुद्र ग्रह के टकराने की भविष्यवाणी रूस के वैज्ञानिक कर रहे है।</p>
<p><strong>गौरतलब </strong>है कि सेंट पीटसबर्ग सरकारी विविद्यालय के प्रोफेसर लियोनिड सोकोलोव पहले ही भविष्यवाणी कर चुके है कि 3,7000 से 3,8000 किलोमीटर की रफ्तार से चल रहा क्षुद्र ग्रह 13 अप्रैल 2029 को धरती से टकरा सकता है।</p>
<p><strong>प्रोफेसर</strong> सोकोलोव ने कहा कि यह संभव है कि 13 अप्रैल 2036 को धरती से यह क्षुद्र ग्रह टकरा जाये। हमारा काम इसके विकल्पों पर विचार करना है और इस क्षुद्र ग्रह में भविष्य में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर वैसी स्थिति का निर्माण करना है।</p>
<p><strong>रूसी </strong>वैज्ञानिकों ने उल्का के टकराने की स्थिति से बचने के लिए 14 महीने पहले एक ऑपरेशन शुरू किया है। इसमें उल्का को उसके रास्ते से भटकाना शामिल है। नासा ने भी उल्का को रास्ते से हटाने के लिए अभियान शुरू किया है। ऐसा मानवरहित अंतरिक्ष यान को उल्का से टकराकर किया जा सकता है। इस विकल्प पर प्रयोग के लिए पिछले सप्ताह नासा ने प्रशांत महासागर के करीब 50 हजार किमी ऊपर उल्का ‘2011सीक्यू1’ को यान से टकराकर नष्ट किया।</p>
<p>एजेंसियां</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2011/02/12/2036due-to-the-collision-of-a-asteroid-the-earth-may-get-vanished/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>फेसबुक पर फोटो डिलीट कर निश्चिंत न रहें</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/10/16/face-book-keeps-deleted-photo-save-atleast-30-month/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/10/16/face-book-keeps-deleted-photo-save-atleast-30-month/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 16 Oct 2010 08:58:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[delete]]></category>
		<category><![CDATA[face boo]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[know the process]]></category>
		<category><![CDATA[networking site]]></category>
		<category><![CDATA[photo]]></category>
		<category><![CDATA[users]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=19437</guid>
		<description><![CDATA[सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के बारे में एक नया खुलासा किया गया है।हो सकता है यह जानकारी आपको ज्यादा सतर्क कर दे। यदि आप फेसबुक एकांउट से अपने फोटो डिलीट करने के बाद निश्चिंत हो गए हैं तो सावधान हो जाइए। सिडनी मॉर्निग हेराल्ड अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया है किफेसबुक डिलीट किए [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/10/facebook.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/10/facebook-300x225.jpg" alt="" title="facebook" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-19438" /></a><strong>सोशल </strong>नेटवर्किंग साइट फेसबुक के बारे में एक नया खुलासा किया गया है।हो सकता है यह जानकारी आपको ज्यादा सतर्क कर दे।   यदि आप फेसबुक एकांउट से अपने फोटो डिलीट करने के बाद निश्चिंत हो गए हैं तो सावधान हो जाइए। सिडनी मॉर्निग हेराल्ड अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया है किफेसबुक डिलीट किए हुए फोटो को कम से कम 30 महीने तक सेव रखता है। </p>
<p><strong>कुछ </strong>यूजर्स ने फोटो के डायरेक्ट लिंक को सेव कर रखा था। वे इस फोटो को डिलीट करने के लंबे अरसे बाद भी डायरेक्ट लिंक के सहारे देख सकते थे। ऐसे ही एक यूजर ने बताया कि उसने 30 महीने पहले साइट से एक फोटो डिलीट किया था। लेकिन वह उसे अभी भी देख सकता है। एक अन्य यूजर ने बताया कि 2009 में डिलीट की गई एक फोटो अभी भी दिख रही है।</p>
<p><strong>यह </strong>इस साइट की कमी हो सकती है। एक यूजर ने कहा कि फेसबुक को जल्द ही इस बारे में कुछ आवश्यक कदम उठाना चाहिए या कुछ दिशा निर्देश तय करना चाहिए</p>
<p>एजेंसी</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/10/16/face-book-keeps-deleted-photo-save-atleast-30-month/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>गूगल जल्द ही शुरू करेगा अपना म्यूजिक सेवा और म्यूजिक स्टोर</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/09/09/google-will-start-music-service-and-music-store/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/09/09/google-will-start-music-service-and-music-store/#comments</comments>
		<pubDate>Thu, 09 Sep 2010 10:29:08 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA[apple]]></category>
		<category><![CDATA[digital search engine]]></category>
		<category><![CDATA[google]]></category>
		<category><![CDATA[music service]]></category>
		<category><![CDATA[music store]]></category>
		<category><![CDATA[online music]]></category>
		<category><![CDATA[एप्पल]]></category>
		<category><![CDATA[ऑनलाइन म्यूजिक]]></category>
		<category><![CDATA[गूगल]]></category>
		<category><![CDATA[डिजिटलसर्च इंजन]]></category>
		<category><![CDATA[म्यूजिक सर्विस]]></category>
		<category><![CDATA[म्यूजिक स्टोर]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=17815</guid>
		<description><![CDATA[डिजिटलसर्च इंजन की दुनिया का महारथी गूगल अब म्यूजिक की दुनिया में भी अपना हाथ आजमाने जा रहा है। गूगल इस साल क्रिसमस से अपने म्यूजिक सर्विस की शुरुआत करेगा। साथ ही म्यूजिक के क्षेत्र में एप्पल के आईट्यून के बढ़ते दबदबे एवं वर्चस्व को देखते हुए गूगल ने अपना म्यूजिक स्टोर भी खड़ा करने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/09/google.png"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/09/google-300x225.png" alt="" title="google" width="300" height="225" class="alignright size-medium wp-image-17817" /></a><strong>डिजिटलसर्च </strong>इंजन की दुनिया का महारथी गूगल अब म्यूजिक की दुनिया में भी अपना हाथ आजमाने जा रहा है।</p>
<p><strong>गूगल </strong>इस साल क्रिसमस से अपने म्यूजिक सर्विस की शुरुआत करेगा। साथ ही म्यूजिक के क्षेत्र में एप्पल के आईट्यून के बढ़ते दबदबे एवं वर्चस्व को देखते हुए गूगल ने अपना म्यूजिक स्टोर भी खड़ा करने का फैसला किया है।</p>
<p><strong>म्यूजिक </strong>सर्विस के लिए कंपनी बड़े म्यूजिक स्टोर्स और कंपनियों से लाइसेंस हासिल करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, ऑनलाइन म्यूजिक पर एप्पल का दबदबा है। </p>
<p><strong>एप्पल</strong> के आईट्यून्स में हजारों गाने मौजूद हैं। इन्हें कुछ शुल्क चुकाकर आईपॉड या स्मार्टफोन में सुना जा सकता है।</p>
<p><strong>गूगल </strong>की नई सेवा से एंड्रॉइड स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे लोगों को ऑनलाइन म्यूजिक डाउनलोड करने में आसानी होगी। इसके अलावा इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि गूगल इस साल सितंबर या अक्टूबर तक म्यूजिक स्टोर खोल सकता है। इसमें एंड्रॉइड इंटरफेस वाले मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे यूजर्स को गाने डाउनलोड करने की सुविधा मिलेगी।</p>
<p><strong>गूगल</strong> की योजना इस म्यूजिक स्टोर को अपने नंबर वन सर्च इंजन से जोड़ने की भी है। इससे यूजर्स गूगल पर अपने पसंदीदा गाने के बोल या फिल्म अथवा एलबम का नाम डालकर डाउनलोड की सुविधा पा सकते हैं।</p>
<p><strong>सूत्रों </strong>के अनुसार,गूगल इस म्यूजिक सर्विस को एंड्रॉइड के वर्जन 3.0 से जोड़ सकता है। बाजार में अभी एंड्रॉइड 2.1 वर्जन चल रहा है। यूजर्स को इसके लिए वर्जन को अपग्रेड कराना होगा।</p>
<p>एजेंसियां</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/09/09/google-will-start-music-service-and-music-store/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>ईश्वर नहीं, भौतिकी है सृष्टि रचयिता:स्टीफन हॉकिंग</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/09/03/god-did-not-create-universe/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/09/03/god-did-not-create-universe/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 03 Sep 2010 05:50:44 +0000</pubDate>
		<dc:creator>राकेश कुमार</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[britain]]></category>
		<category><![CDATA[stephen hawking]]></category>
		<category><![CDATA[किताब 'द ग्रांड डिजाइन']]></category>
		<category><![CDATA[ब्रिटेन]]></category>
		<category><![CDATA[भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग]]></category>
		<category><![CDATA[समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ']]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=17416</guid>
		<description><![CDATA[ब्रिटेन के भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने कहा कि ब्रह्मांड की संरचना भौतिक विज्ञान के निश्चित नियमों की वजह से हुआ है और इसके निर्माण में ईश्वर की कोई भूमिका नहीं है। समाचार पत्र &#8216;द टेलीग्राफ&#8217; के अनुसार हाल ही में आई अपनी किताब &#8216;द ग्रांड डिजाइन&#8217; में हॉकिंग ने लिखा है, &#8220;गुरुत्वाकर्षण के नियम [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/09/stephen-hawking-.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/09/stephen-hawking--300x198.jpg" alt="" title="stephen-hawking-" width="300" height="198" class="alignright size-medium wp-image-17428" /></a><strong>ब्रिटेन </strong>के भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने कहा कि ब्रह्मांड की संरचना भौतिक विज्ञान के निश्चित नियमों की वजह से हुआ है और इसके निर्माण में ईश्वर की कोई भूमिका नहीं है।</p>
<p><strong>समाचार </strong>पत्र &#8216;द टेलीग्राफ&#8217; के अनुसार हाल ही में आई अपनी किताब &#8216;द ग्रांड डिजाइन&#8217; में हॉकिंग ने लिखा है, &#8220;गुरुत्वाकर्षण के नियम के मौजूद होने की वजह से ब्रह्मांड बिना किसी की मदद के खुद को तैयार कर सकता है। ब्रह्मांड के स्वाभाविक रचना का कोई कारण न होने के बजाय कुछ तो वजह है। आखिर ब्रह्मांड का अस्तित्व क्यों है? हमारा अस्तित्व क्यों हैं?&#8221;</p>
<p><strong>इससे </strong>पहले वे कहते रहे थे कि सृष्टि के रचयिता की अवधारणा विज्ञान के सिद्धांतों के विपरीत नहीं है लेकिन अब उनका कहना है कि जिस बड़े धमाके यानी बिग बैंग के बाद धरती और अन्य ग्रहों का जन्म हुआ वह वैज्ञानिक दृष्टि से अवश्यंभावी था।</p>
<p><strong>हॉकिंग</strong> ने 1992 में हुई एक खोज को अपने तर्क का आधार बनाया है जिसमें पाया गया था कि हमारा सौरमंडल अनूठा नहीं है बल्कि ऐसे कई सूरज हैं जिनके चारों ओर ग्रह चक्कर काटते हैं, जिस तरह हमारी पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है।</p>
<p><strong>हॉकिंग</strong> का कहना है, &#8220;अगर हमारे सौर मंडल जैसे दूसरे सौर मंडल मौजूद हैं तो यह तर्क गले नहीं उतरता कि ईश्वर ने मनुष्य के रहने के लिए पृथ्वी और उसके सौर मंडल की रचना की होगी&#8221;।</p>
<p><strong>हॉकिंग</strong> ने इसाक न्यूटन के उस सिद्धात को खारिज कर दिया। जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड की रचना स्वाभविक ही शुरू नहीं हुई थी, बल्कि ईश्वर ने इसको गति प्रदान की।</p>
<p><strong>किताब</strong> में हॉकिंग ने लिखा है, &#8220;नीले प्रकाश को जलाने के और ब्रह्मांड को चलाने के लिए भगवान के स्पर्श की जरूरत नहीं है।&#8221;</p>
<p><strong>अमेरिकी </strong>भौतिकविज्ञानी लियोनार्ड लोडिनो &#8216;द ग्रांड डिजाइन&#8217; के सह लेखक हैं। इस पुस्तक का 9 सितंबर को लोकार्पण किया जाएगा।</p>
<p><strong>इससे </strong>पहले स्टीफ़न हॉकिंग ने ए ब्रीफ़ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम नाम की किताब लिखी थी जिसकी लाखों प्रतियाँ दुनिया भर में बिकी थीं, इस किताब में उन्होंने सृष्टि के रचयिता के रूप में ईश्वर के अस्तित्व की संभावना से इनकार नहीं किया था।</p>
<p><strong>हॉकिंग </strong>का कहना है कि उनके पास कोई पक्का सिद्धांत नहीं है, अगर ईश्वर के बारे में कोई पक्का सिद्धांत बन सके तो वह विज्ञान की सबसे बड़ी कामयाबी होगी, तब हमारे पास ईश्वर के दिमाग़ को समझने का बच जाएगा।आईएएनएस)। </p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/09/03/god-did-not-create-universe/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>127 प्रकाश वर्ष दूर विशाल सौरमंडल की खोज</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/08/25/a-new-search-of-saurmandal/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/08/25/a-new-search-of-saurmandal/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 25 Aug 2010 14:09:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर-ए-नज़र]]></category>
		<category><![CDATA['एस्ट्रोनॉमी एण्ड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल']]></category>
		<category><![CDATA[earth]]></category>
		<category><![CDATA[धरती]]></category>
		<category><![CDATA[सौरमंडल की खोज]]></category>
		<category><![CDATA[स्थानीय समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ']]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=16889</guid>
		<description><![CDATA[धरती से 127 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक विशाल सौरमंडल की खोज की गई है। इस सौरमंडल में कई ग्रह सूरज जैसे एक तारे की परिक्रमा कर रहे हैं। नए खोजे गए इस सौरमंडल को अब तक खोजे गए सौरमंडलों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। स्थानीय समाचार पत्र &#8216;द टेलीग्राफ&#8217; के मुताबिक [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/08/solarsystem.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/08/solarsystem-300x209.jpg" alt="" title="solarsystem" width="300" height="209" class="alignright size-medium wp-image-16893" /></a><strong>धरती</strong> से 127 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक विशाल सौरमंडल की खोज की गई है। इस सौरमंडल में कई ग्रह सूरज जैसे एक तारे की परिक्रमा कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नए </strong>खोजे गए इस सौरमंडल को अब तक खोजे गए सौरमंडलों में सबसे बड़ा माना जा रहा है।</p>
<p><strong>स्थानीय </strong>समाचार पत्र &#8216;द टेलीग्राफ&#8217; के मुताबिक खगोलविदों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस नए खोजे गए सौरमंडल में पांच ग्रह हैं और दो और ग्रहों के खोजे जाने की संभावना है।</p>
<p><strong>इस </strong>सौरमंडल में ग्रहों के बीच की दूरी हमारे सौरमंडल में ग्रहों के बीच की दूरियों के समान ही है। इस खोज के विस्तृत परिणामों को &#8216;एस्ट्रोनॉमी एण्ड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल&#8217; में प्रकाशित किया जाना है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिकों </strong>की संस्था &#8216;यूरोपियन साउदर्न ऑब्जर्वेटरी&#8217; (ईएसओ) के प्रमुख क्रिस्टोफी लोविस ने कहा, &#8220;हमने पाया है कि इस सौरमंडल में ग्रहों के खोजे जाने की संभावना अधिक है।&#8221;</p>
<p><strong>उन्होंने </strong>कहा, &#8220;इस खोज से साबित हुआ है कि अब हम एकल ग्रहों के अध्ययन से आगे बढ़कर जटिल सौरमंडलों की खोज और उनके अध्ययन के युग में प्रवेश कर चुके हैं।&#8221;</p>
<p>&#8220;<strong>इस </strong>नए सौरमंडल में ग्रहों की गति के अध्ययन से ग्रहों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल के कुछ नए पक्षों का खुलासा हो सकता है।&#8221;</p>
<p><strong>इस</strong> सौरमंडल के मुख्य तारे को एचडी 10180 नाम से जाना जाता है और यह धरती से 127 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। इस सौरमंडल के ग्रह तारे की परिक्रमा छह से 600 दिनों की अवधि में पूरी करते हैं।(आईएएनएस)। </p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/08/25/a-new-search-of-saurmandal/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>इंटरसेप्टर बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/26/intercepter-missile-succesfully-testfired/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/26/intercepter-missile-succesfully-testfired/#comments</comments>
		<pubDate>Mon, 26 Jul 2010 09:41:18 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[उड़ीसा के भद्रक जिले में धामरा के निकट व्हीलर द्वीप]]></category>
		<category><![CDATA[बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=14308</guid>
		<description><![CDATA[भारत ने शत्रु के प्रक्षेपास्त्रों को रोककर नष्ट करने की क्षमता वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सोमवार को सफल परीक्षण किया। स्वदेशी इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण उड़ीसा के भद्रक जिले में धामरा के निकट व्हीलर द्वीप से किया गया। यह स्थान भुवनेश्वर से 170 किलोमीटर दूर है। इसने बालासोर जिले के चांदीपुर स्थित एकीकृत [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/interceptor.j400pg.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/interceptor.j400pg-277x300.jpg" alt="" title="interceptor.j400pg" width="277" height="300" class="alignright size-medium wp-image-14310" /></a><strong>भारत </strong>ने शत्रु के प्रक्षेपास्त्रों को रोककर नष्ट करने की क्षमता वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर का सोमवार को सफल परीक्षण किया।</p>
<p><strong>स्वदेशी </strong>इंटरसेप्टर मिसाइल का परीक्षण उड़ीसा के भद्रक जिले में धामरा के निकट व्हीलर द्वीप से किया गया। यह स्थान भुवनेश्वर से 170 किलोमीटर दूर है।</p>
<p><strong>इसने </strong>बालासोर जिले के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से छोड़ी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी-द्वितीय के एक परिवर्तित संस्करण को सफलतापूर्वक मार गिराया।</p>
<p><strong>लक्ष्य</strong> मिसाइल छोड़े जाने के कुछ मिनट बाद इंटरसेप्टर को छोड़ा गया।</p>
<p><strong>चांदीपुर </strong>स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के निदेशक एस. पी. दास ने आईएएनएस को बताया, &#8220;यह एक सफल परीक्षण था। इंटरसेप्टर ने लक्ष्य को नष्ट कर दिया।&#8221;(आईएएनएस)। </p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/26/intercepter-missile-succesfully-testfired/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>नासा ने बनाया मंगल का अब तक का सबसे अच्‍छा मानचित्र</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/24/nasa-produced-map-of-mars/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/24/nasa-produced-map-of-mars/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 24 Jul 2010 06:28:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[map]]></category>
		<category><![CDATA[Mars]]></category>
		<category><![CDATA[NASA]]></category>
		<category><![CDATA[नासा]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल]]></category>
		<category><![CDATA[मानचित्र]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=14122</guid>
		<description><![CDATA[नासा ने शुक्रवार को कहा कि उसके ओडिसी अंतरिक्ष यान में लगे एक कैमरे की मदद से मंगल ग्रह का ज्यादा स्पष्ट मानचित्र तैयार किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, शोधकर्ता और आम लोग कई वेबसाइटों के जरिए इसे देख सकते हैं और इस ग्रह के धरातल का पूरा सर्वेक्षण कर सकते हैं। [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/Mars-map.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/Mars-map-300x147.jpg" alt="" title="Mars map" width="300" height="147" class="alignright size-medium wp-image-14124" /></a><strong>नासा </strong>ने शुक्रवार को कहा कि उसके ओडिसी अंतरिक्ष यान में लगे एक कैमरे की मदद से मंगल ग्रह का ज्यादा स्पष्ट मानचित्र तैयार किया गया है।</p>
<p><strong>समाचार </strong>एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, शोधकर्ता और आम लोग कई वेबसाइटों के जरिए इसे देख सकते हैं और इस ग्रह के धरातल का पूरा सर्वेक्षण कर सकते हैं।</p>
<p><strong>ओडिसी </strong>अंतरिक्ष यान में &#8216;थर्मल एमीशन इमेजिंग सिस्टम&#8217; या &#8216;थेमिस&#8217; नामक एक मल्टी-बैंड इंफ्रारेड कैमरा लगा हुआ था। इसकी मदद से तस्वीरें ली गईं। इस मानचित्र को तैयार करने में करीब 21,000 तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p><strong>टेंपे </strong>स्थित &#8216;एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी&#8217; के मंगल अंतरिक्ष उड़ान सेवा के शोधकर्ताओं ने नासा के कैलिफोर्निया स्थित &#8216;जेट प्रणोदन प्रयोगशाला&#8217; (जेपीएल) के साथ मिलकर इन तस्वीरों का संयोजन करके मानचित्र तैयार किया। थेमिस ने आठ साल पहले ही तस्वीरें लेनी शुरू कर दी थी।</p>
<p><strong>मंगल </strong>अंतरिक्ष उड़ान सेवा के निदेशक और थेमिस के प्रमुख शोधकर्ता फिलिप क्रिस्टीसेन ने कहा, &#8220;हमने अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा प्राप्त काटरेग्राफिक नियंत्रण ग्रिड से तस्वीरों को जोड़ा।&#8221;</p>
<p><strong>ओडिसी </strong>परियोजना से जुड़े जेपीएल के वैज्ञानिक जेफरी प्लाउट ने कहा, &#8220;हमने एक बेहतरीन खोज की है जो मंगल ग्रह के शोधकर्ताओं के लिए आधार मानचित्र होगी।&#8221;</p>
<p><strong>मंगल </strong>ओडिसी को अप्रैल 2001 में छोड़ा गया था और यह मंगल ग्रह पर अक्टूबर 2001 में पहुंचा। इसका वैज्ञानिक अभियान फरवरी 2002 में शुरू हुआ।  (आईएएनएस)</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/24/nasa-produced-map-of-mars/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>विशालतम तारे की खोज, सूरज से 320 गुणा बड़ा</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/23/universe-largest-sun-discovered/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/23/universe-largest-sun-discovered/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 23 Jul 2010 03:57:28 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संजय कुमार साह</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[सुर्ख़ियां]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[largest sun]]></category>
		<category><![CDATA[universe]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रह्मांड]]></category>
		<category><![CDATA[सबसे बडा सूरज]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=14042</guid>
		<description><![CDATA[ब्रह्मांड का सबसे बडा सूरज सौर मंडल के अपने सूरज से 320 गुणा बडा है। ब्रिटेन के वज्ञानिक पॉल क्राउदर और उनके साथी वैज्ञानिकों ने इस सूरज यानी तारे की खोज की है। लंदन के समाचार पत्र में छपी खबरों के मुताबिक यह सूरज तरंतुला निहारिका में स्थित है। तरंतुला निहारिका लार्ज मैजिलैनिक क्‍लाउड का [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/sun.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/sun-300x220.jpg" alt="" title="sun" width="300" height="220" class="alignright size-medium wp-image-14046" /></a><strong>ब्रह्मांड </strong>का सबसे बडा सूरज सौर मंडल के अपने सूरज से 320 गुणा बडा है। ब्रिटेन के वज्ञानिक पॉल क्राउदर और उनके साथी वैज्ञानिकों ने इस सूरज यानी तारे की खोज की है।</p>
<p><strong>लंदन </strong>के समाचार पत्र में छपी खबरों के मुताबिक यह सूरज तरंतुला निहारिका में स्थित है। तरंतुला निहारिका लार्ज मैजिलैनिक क्‍लाउड का हिस्‍सा है &#8211; यह एक छोटी गैलेक्‍सी है और अपनी मिल्‍की वे का चक्‍कर लगा रही है।</p>
<p><strong>शेफील्‍ड </strong>विश्‍वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिकों ने यूरोपियन साउदर्न ऑब्‍जर्बेटरी के चीली में तैनात विशालकाय टैलीस्‍कोप और हब्‍बल स्‍पेस टेलीस्‍कोप से हासिल आंकडों को मिलाकर इस विशालतम तारे की खोज की है। इस तारे का नाम &#8216;आर 136ए1&#8242;  रखा गया है।</p>
<p><strong>इससे </strong>पहले ब्रह्मांड के जिन विशालतम तारों की खोज हुई थी, उनका आकार सूरज से करीब 150 गुणा बडा था।</p>
<p><strong>जैसे </strong>जैसे तारे का आकार बडा होता जाता है वैसे वैसे उसके केंद्र में पैदा होने वाली ऊर्जा बढती जाती है। एक सीमा के बाद यह ऊर्जा गुरुत्‍वाकर्षण बल को पार कर जाती है। जिससे तारे में विस्‍फोट या तारे के टूटने की घटना होती है। इस सीमा को एडींगटन लिमिट कहते हैं। यह तारा इस लिमिट के आस पास ही ठहरता है।</p>
<p><strong>इसी </strong>तरह तारे का आकार जितना बडा होता है, उतनी ही जल्‍दी वह ऊर्जा खोता है और उसी तेजी के साथ उसका आकार भी घटता है।</p>
<p><strong>माना </strong>जा रहा है कि इस नए तारे का आकार शुरू में अपने सूरज से 320 गुणा अधिक था, लेकिन कुछ करोड सालों के सफर में इसने अपना आकार कुछ खोया है और फिलहाल यह अपने सूरज से मात्र 265 गुणा बडा ही रह गया है।</p>
<p><strong>इधर </strong>अपना सूरज पिछले 4 अरब 57 करो्ड सालों में सिर्फ 0.03 फीसदी घनत्‍त्‍व ही खोया है, लेकिन विशालतम तारा आर136ए1 एडींगटन लिमिट के आस पास ठहरता है, इसलिए इसने काफी तेजी के साथ्‍ा अपना आकार और घनत्‍त्‍व खोया है।</p>
<p><strong>माना </strong>जा रहा  है कि इस तारे की सतह का तापमान 40 हजार डिग्री सेल्सियस है और यह सूरज से एक करोड गुणा अधिक तेज चमता है।</p>
<p><strong>अब </strong>तक विशालतम तारों में पिस्‍टल स्‍टार और एटा कैरिने का नाम आता था, जो अपने सूरज से क्रमश: 150 और 100 गुणा अधिक बडे हैं। अपना सूरज एक साल में जितनी ऊर्जा खोता है, उतना पिस्‍टल स्‍टार सिर्फ 20 सैकेंड में खोता है।</p>
<p><strong>प्रसिद्ध </strong>विज्ञान पत्रिका एस्‍ट्रॉनोमी नाउ के मुताबिक आर136ए1 से जितनी ऊर्जा मिलती है, वह ओरियन निहारिका के सभी तारों से मिलने वाली ऊर्जा से अधिक है। और यदि यह अपने सौरमंडल में होता, तो सूरज से उतना ही अधिक चमकता, जितना कि सूरज चांद की तुलना में अधिक चमकता है।</p>
<p><strong>इस </strong>खोज से जुडे प्रमुख वैज्ञानिक क्राउदर ने कहा कि अब इससे अधिक बडे तारे की कल्‍पना नहीं की जा सकती है। या इस रिकार्ड को टूटने में काफी समय लग जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/23/universe-largest-sun-discovered/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>नक्कालों से बचाएगा &#8216;ननक्लोनेबल&#8217; तकनीक</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/noneclonable-technique/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/noneclonable-technique/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 20 Jul 2010 09:48:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[noneclonable technique]]></category>
		<category><![CDATA[ननक्‍लोनेबल तकनीक]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=13839</guid>
		<description><![CDATA[नकली दवाइयां, नकली नोट, नकली पहचान पत्र और न जाने क्या-क्या नकली चीजें बाजारों में उपलब्ध हैं जिनसे रोजमर्रा की जिंदगी में हमारा सरोकार होता है। ये नकली चीजें ग्राहकों से लेकर निर्माता कपंनियां और सरकारों तक की परेशानी का सबब बनी हुई हैं। अब इनमें से किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/faque.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/faque-300x191.jpg" alt="" title="faque" width="300" height="191" class="alignright size-medium wp-image-13845" /></a><strong>नकली </strong>दवाइयां, नकली नोट, नकली पहचान पत्र और न जाने क्या-क्या नकली चीजें बाजारों में उपलब्ध हैं जिनसे रोजमर्रा की जिंदगी में हमारा सरोकार होता है। ये नकली चीजें ग्राहकों से लेकर निर्माता कपंनियां और सरकारों तक की परेशानी का सबब बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>अब </strong>इनमें से किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि देश में अब एक ऐसी तकनीक विकसित ही नहीं बल्कि क्रियान्वित हो गई है जो उत्पादों से लेकर नोटों और पहचान पत्रों तक की विश्वसनीयता पल भर में साबित कर देगी।<span id="more-13839"></span></p>
<p><strong>दरअसल</strong>, नैनो टेक्नॉलॉजी के माध्यम से &#8216;ननक्लोनेबल&#8217; नाम का एक ऐसा पहचान प्रबंधन तंत्र (आइडेंटिटी मैनेजमेंट सिस्टम) विकसित किया गया है जिससे नकली उत्पादों पर रोक लगाई जा सकती है। ऐसे तकनीक से लैस यदि किसी उत्पाद का नकली उत्पाद तैयार कर उसे बाजार में चलाने की कोशिश की गई और वह किसी जागरूक ग्राहक के हाथ लग जाए तो वह पल भर में पकड़ा भी जाएगा।</p>
<p>&#8216;<strong>ननक्लोनेबल</strong>&#8216; तकनीक माइक्रो और नैनो अवयवों से बने एक विशिष्ट फिंगरप्रिंट पर आधारित है। इस फिंगरप्रिंट से लेबल या टैग बना होता है। किसी उत्पाद पर अंकित होने के साथ-साथ यह एक केंद्रीकृत सुरक्षित सर्वर प्लेटफार्म से भी जुड़ा होता है। जो मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से उत्पाद की विश्वसनीयता से संबंधित संदेश प्रेषित करता है।</p>
<p><strong>फर्ज </strong>कीजिए आपने किसी दवा के दुकान से कोई दवाई ली। अब आप यदि यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि वह दवा असली है या नकली तो आप इसका आसानी से पता कर सकते हैं बशर्ते कि दवा निर्माता कंपनी ने &#8216;ननक्लोनेबल&#8217; तकनीक अपने उत्पाद में क्रियान्वित कर रखा हो।</p>
<p>इसका आसान तरीका यह है कि दवा पर अंकित लेबल या टैग को बिलकेयर द्वारा निर्मित एक रोबुस्ट रीडर पर स्वैप किया जाए। आप जैसे ही उसे स्वैप करेंगे, संबंधित जानकारी मोबाइल फोन या इंटरनेट नेटवर्क के जरिए आपके पास आ जाएगा कि उत्पाद असली है या नकली।</p>
<p>इसे संभव कर दिखाया है शोध व तकनीक के क्षेत्र की जानीमानी कंपनी बिलकेयर टेक्नॉलॉजीस ने। सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना उपयोगी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कंपनी दिल्ली पुलिस के 70,000 जवानों का पहचान पत्र तैयार करने जा रही है। इन पहचान पत्रों से यह तक पता लग जाएगा कि फलां वक्त फलां कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात था या नहीं। रैनबेक्सी, पानेसिया बायोटेक जैसी कई दवा उत्पाद कंपिनयां और कुछ एग्रोकेमिकल क्षेत्र की उत्पादक कंपनियों ने भी नक्कालों से बचने के लिए कंपनी से समझौता किया है।</p>
<p>सोमवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लोक सूचना, संसाधन और नवाचार संबंधी मामलों के सलाहकार सैम पित्रोदा और उनके प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार आर. चिदंबरम की उपस्थिति में इस तकनीक का अवलोकन किया।</p>
<p>इस अवसर पर पित्रोदा ने कहा कि यह बहुत ही नई, रोचक व रोमांचित करने वाली तकनीक है। यह बड़े काम की चीज है। पांच साल पहले तक यह कल्पना नहीं की जा सकती थी लेकिन बिलकेयर ने इसे संभव कर दिखाया है।</p>
<p>कंपनी के चैयरमेन और प्रबंध निदेशक मोहन भंडारी ने कहा, &#8220;इस तकनीक के उपयोग के बारे में ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि कंपनी में निर्मित उत्पाद वैसे ही रूप में ग्राहक तक पहुंचाना सुनिश्चित करना है। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह अहम है।&#8221; (आईएएनएस)</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/noneclonable-technique/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>एड्स के रोकथाम में एक बडी सफलता हाथ लगी</title>
		<link>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/a-big-step-in-curing-aids/</link>
		<comments>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/a-big-step-in-curing-aids/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 20 Jul 2010 07:09:02 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संजय कुमार साह</dc:creator>
				<category><![CDATA[टेक्नॉलोजी]]></category>
		<category><![CDATA[सुर्ख़ियां]]></category>
		<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल रिपोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[AIDS]]></category>
		<category><![CDATA[CAPRISA]]></category>
		<category><![CDATA[Centre for the AIDS Programme of Research in South Africa]]></category>
		<category><![CDATA[University of KwaZulu-Natal]]></category>
		<category><![CDATA[एड्स]]></category>
		<category><![CDATA[क्‍वाजुलू नटाल विश्‍वविद्यालय]]></category>
		<category><![CDATA[सीएपीआरआईएसए]]></category>
		<category><![CDATA[सेंटर फॉर एड्स प्रोग्राम ऑफ रीसर्च इन साउथ अफ्रीका]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janatantra.com/news/?p=13828</guid>
		<description><![CDATA[एड्स के रोकथाम के मामले में वैज्ञानिकों को एक बडी सफलता हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने एक कंडोम का निर्माण किया है। इसका उपयोग करने से एड्स के प्रसार में काफी गिरावट देखी गई है। इस कंडोम का उपयोग महिलाएं कर सकती हैं। दक्षिण अफ्रीका में संभोग के मामले में सक्रिय कुछ महिलाओं पर यह [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><div id="attachment_13829" class="wp-caption alignright" style="width: 310px"><a class="highslide" onclick="return vz.expand(this)" href="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/female-condom.jpg"><img src="http://www.janatantra.com/news/wp-content/uploads/2010/07/female-condom-300x196.jpg" alt="" title="female condom" width="300" height="196" class="size-medium wp-image-13829" /></a><p class="wp-caption-text">केप टाउन के निकट खाएलिस्‍था में ट्रीटमेंट एक्‍शन कैंपेन के ऑफिस में फीमेल कंडोम का उपयोग करने का तरीका समझाती दक्षिण अफ्रीका की एक्‍टीविस्‍ट नोक्‍सोलो बुनु</p></div><strong>एड्स </strong>के रोकथाम के मामले में वैज्ञानिकों को एक बडी सफलता हाथ लगी है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिकों </strong>ने एक कंडोम का निर्माण किया है। इसका उपयोग करने से एड्स के प्रसार में काफी गिरावट देखी गई है। इस कंडोम का उपयोग महिलाएं कर सकती हैं।<span id="more-13828"></span></p>
<p><strong>दक्षिण </strong>अफ्रीका में संभोग के मामले में सक्रिय कुछ महिलाओं पर यह प्रयोग किया गया। इन महिलाओं ने ढाई सालों तक इस कंडोम का इस्‍तेमाल किया।</p>
<p><strong>इस </strong>क्षेत्र में एड्स का काफी तेजी से प्रसार हो रहा है। लेकिन इस कंडोम का इस्‍तेमाल करने वाली महिलाओं के बीच एड्स के प्रसार में 39 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।</p>
<p><strong>एड्स </strong>का मामला पहली बार 1980 में सामने आया। उसके बाद इसका प्रसार इतनी तेजी से हुआ कि यह आज दुनिया की एक सबसे बडी महामारी बन चुका है। दुनिया भर में 3 करोड 30 लाख लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। और एड्स से अब तक ढाई करोड लोगों की मौत हो चुकी है।</p>
<p><strong>दक्षिण </strong>अफ्रीका के डर्बन में स्थित क्‍वाजुलू नटाल विश्‍वविद्यालय के सेंटर फॉर एड्स प्रोग्राम ऑफ रीसर्च इन साउथ अफ्रीका यानी सीएपीआरआईएसए में इस प्रयोग को अंजाम दिया गया।</p>
<p><strong>प्रयोग </strong>में 18 से 40 साल के बीच की दक्षिण अफ्रीका की 889 महिलाओं को शामिल किया गया था। ये महिलाएं संभोग में दूसरों के मुकाबले अधिक तत्‍पर थीं और इस क्षेत्र में एड्स काफी तेजी से फैल रहा है।</p>
<p><strong>प्रयोग </strong>में इस कंडोम का महिलाओं पर कोई खास बुरा असर भी नहीं देखा गया।</p>
<p>(इंटरनेट की दुनिया से)</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janatantra.com/news/2010/07/20/a-big-step-in-curing-aids/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
