पूरे देश से माफी मांगें अभिलाष खांडेकर
अभी मोहल्ला लाइव पर मौजूद एक ख़बर पर मेरी नज़र पड़ी। सोच कर हैरानी हुई। क्या किसी अख़बार का संपादक इतनी संकीर्ण सोच रख सकता है? और सपाट शब्दों में कहें तो क्या इतनी संकीर्ण सोच रखने वाले किसी भी शख़्स को हक़ है कि वो संपादक बने? दैनिक भास्कर के संपादक अभिलाष खांडेकर ने [...]
Jun 19 2009 | Posted in तीर-ए-नज़र | Read More »