अखबारों की खबरें, अगर सही हैं, तो बिहार की राजनीति में एक नयी संभावना की आहट है.बिहार से अधिक, भारत की दरुगध देती राजनीति के समानांतर, बिहार से ही पूरे मुल्क के लिए एक उम्मीद भरी सुबह की शुरुआत की तैयार पृष्ठभूमि के संकेत. बिहार, जो पूरे देश में व्यंग्य, हास्य और कटु बातों का [...]
बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जद यू-भाजपा गठबंधन को इस चुनाव में जबर्दस्त जनसमर्थन प्राप्त हुआ है। इस चुनाव में नीतीश कुमार के जनता दल(यू) को 115 सीटें और भाजपा को 91 सीटें प्राप्त हुईं हैं।जबकि लालू प्रसाद और राम विलास पासवान के राजद और लोजपा गठबंधन को 25 सीटें तथा कांग्रेस को [...]
बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए छह चरणों में होने वाले मतदान का आखिरी चरण आज है। पांच जिलों की 26 सीटों पर मतदान हो रहा है। नक्सलियों द्वारा चुनाव का बहिष्कार किए जाने के बीच कुछ मतदानों केंद्रों पर छिटपुट हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। गया जिले के बावनदेव क्षेत्र में माओवादियों [...]
सन 1949 के जीप घोटाले और 1958 में प्रताप सिंह कैरो से जुड़े घोटालों के आरोपितों को शह नहीं मिली होती तो आज इस देश में घोटालों की बाढ़ नहीं आती। कॉमनवेल्थ घोटाला, आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाला और स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपितों को सजा नहीं होगी तो भविष्य में इससे भी बड़े- बड़े घोटाले होंगे। [...]
Nov 14 2010 | Posted in
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बिहार के एक बड़े नेता ने कुछ दिन पहले एक चुनावी सभा में कहा कि अब इस राज्य में कोई सवर्ण नेता मुख्य मंत्री बनने के बारे में सोच भी नहीं सकता। पता नहीं इस नेता की भविष्यवाणी अंततः सही होगी या नहीं,,पर ऐसी भविष्यवाणी अकारण नहीं है।आजादी के बाद के कुछ वर्षों तक बिहार [...]
Nov 9 2010 | Posted in
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योगेंद्र यादव से किरण शाहीन की बातचीत आपने बिहार का भ्रमण किया है। पिछले चुनावों की अपेक्षा इस बार क्या फर्क नजर आता है? मैं समझता हूं कि बिहार लोकतंत्र का तीर्थ है, इसलिए अमूमन हर चुनाव में एक बार बिहार की तीर्थयात्रा जरूर कर लेता हूं। इस बार एक बात पहले से अलग है। [...]
Nov 6 2010 | Posted in
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लालू यादव से मिलना, उनसे बातें करना अपने आप में एक अनुभव है। हम उनके उड़नखटोले में उनसे मिले, लग रहा था कि वह निराश होंगे।खीझ रहे होंगे ,लेकिन ऐसा नहीं लगा कि वे परेशान है। लालू से मैंने पूछा कि क्या लगता है,तपाक से बोले,हमारी सरकार बन रही है। नीतीश का भी दावा है [...]
Nov 2 2010 | Posted in
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यदि सरदार बल्लभ भाई पटेल ने जिद्द नहीं की होती तो ‘रणछोड़’ राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति पद के लिए तैयार ही नहीं होते।उससे पहले जवाहर लाल नेहरू ने डा.राजेंद्र प्रसाद से यह लिखवा लिया था कि वे इस सर्वोच्च संवैधानिक पद के उम्मीदवार ही नहीं हैं।राजेंद्र बाबू के देश के प्रथम राष्ट्रपति बनने से बिहार का [...]
Nov 2 2010 | Posted in
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डॉ यशवंत कुमार– एक जमाने में दलित समुदाय कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था। दलित वोट बैंक का लंबे समय तक इस्तेमाल हुआ। बाद के दौर में यह वोट बैंक पुराने समाजवादियो-कम्युनिस्टों से होता हुआ नये समाजवादी विचारों वाले दलों से जुड़ा। दलित समुदायों में नक्सलवादियों की अच्छी पकड़ है। लालू प्रसाद के उदय [...]
Oct 31 2010 | Posted in
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परिवारवाद की बुराइयों से आज इस देश की राजनीति बुरी तरह कराह रही है। पिछले तिरसठ साल में जिन कुछ प्रमुख बुराइयों ने देश की राजनीति और सत्ता-नीति को बुरी तरह क्षति पहुंचाई हैं,उनमें परिवारवाद का प्रमुख स्थान है।परिवारवाद के सहारे अयोग्य व अनुभवहीन नेता भी देश-प्रदेश पर थोपे जा रहे हैं।पर इसके ठोस कदम [...]
Oct 30 2010 | Posted in
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