हुसैन चचा, तुसी ना जाओ
वैसे तो तुम ताऊ की उम्र के हो लेकिन हम तुम्हें चचा ही कहेंगे। हम ग़ालिब को भी चचा कहते हैं। चचा हमें मालूम है कि तुम खुश नहीं हो इस वक्त। अपने मुल्क से दूर रहकर एक आम इंसान तो फिर भी जिंदगी बसर कर लेता है लेकिन तुम तो हिंदुस्तान के नगीनों में [...]
Mar 4 2010 | Posted in तीर-ए-नज़र | Read More »